लॉयन न्यूज, बीकानेर। बीकानेर में रियासत काल से ही लोकनाट्य परंपरा रम्मत होने की जानकारी सामने आती है। ऐसी ही एक रम्मत है ‘फक्कड़दाता की रम्मत’। होलाश्टक के दिन ही आयोजित होने वाले इस रम्मत में जहां ‘खयाल’ में देशकाल की तात्कालिक परिस्थितियों पर हास्य और व्यंग्य के जरीये कटाक्ष किया जाता है। रम्मत के कवि कैलाश पुरोहित (तैनु महाराज) ने लॉयन से बातचीत में बताया की इस बार खयाल में जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर व्यंग्य के माध्यम से कटाक्ष किया गया है तो वहीं दिन-ब-दिन बढ़ती महंगाई और पैट्रोल व घरेलु गैस के बढ़ते दामों को लेकर जनता को हो रही परेशानी को भी चित्रित किया है। वहीं प्रेम और विरह के लिए गाये जाने वाले ‘चौमासे’ में एक पत्नी का अपने पति को परदेस नहीं जाने के निवेदन को भी आधुनिक तर्ज पर गाकर नवाचार करने का प्रयास किया गया है। रम्मत में वरिष्ठ कलाकार जुगलकिशोर ओझा, मदन जैरी के निर्देशन में ही सभी कलाकारों को रम्मत का रियाज करवाया जाता है। रम्मत में श्रीगणेश का किरदार सुंदरलाल पुरोहित, बोहरा-बोहरी – शंकरलाल छंगाणी, रामजी रंगा, खाकी – शिवशंकर ओझा, अमिताभ ओझा, जाट-जाटणी कनु रंगा व रामजी रंगा द्वारा निभाया जाता है। गायन मण्डली में मास्टर सावन कुमार, मदन जैरी, महेश पुरोहित, दाऊजी ओझा, राणा साब, पं. नवला महाराज, श्याम व्यास आदि द्वारा सहयोग किया जाता है।

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