अतिक्रमण पर द्वेषपूर्ण कार्यवाही का आरोप : पीडि़त ने कहा मैं जूनागढ़ तोडऩे की शिकायत करूंगा तो क्या प्रशासन उसे तोड़ देगा? पढ़ें खबर
लॉयन न्यूज, बीकानेर। यूआईटी प्रशासन द्वारा नोखा रोड स्थित रामदेव नगर में दो दिन पूर्व अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही गई लेकिन इस कार्रवाई पर पीडि़त परिवार ने प्रशासन द्वारा द्वेषपूर्ण कार्यवाही करने का आरोप लगाया है। रामदेव नगर निवासी खेराजराम सियाग ने बताया कि दो दिन पहले यूआईटी की टीम अचानक पहुंची और यूआईटी द्वारा जारी पट्टे पर बने मकान के आगे का हिस्सा तोड़ दिया, जिससे उसके पूरे मकान में दरारें आ गई और यह दरारें कभी हादसे का कारण बन सकती है। खेराजराम सियाग ने बताया कि उनका मकान यूआईटी द्वारा जारी पट्टे पर बना हुआ है, एक ईंच भी अतिक्रमण नहीं, मकान के सामने 40 की जगह 42 फीट चौड़ी सड़क छोड़ी हुई है, फिर भी बिना कोई सूचना व नोटिस के मकान तोड़कर चले गए। आरोप है कि यूआईटी प्रशासन जिस अतिक्रमण को तोडऩे के लिए आया था उनका तो तोड़ा ही नहीं गया और पट्टे में बने मकानों को नुकसान पहुंचाकर चले गए। खेराजराम ने बताया कि जिस वक्त उनके मकान के आगे हिस्सा तोड़ा गया उस वक्त वे घर पर नहीं थे, किसी काम के लिए बाजार गए हुए थे, घर में बच्चे व पत्नी थी, लेकिन प्रशासन ने उनको भी सूचना नहीं दी और आते ही जेसीबी मशीन के द्वारा तोडऩा शुरू कर दिया जो कि उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि अगर मकान की पट्टियां टूट जाती और कोई हानि हो जाती तो उसका जिम्मेदार कौन होता।
रात को लगाए लाल निशान, सुबह आकर तोड़ दिए मकान
खेराजराम ने बताया कि उनके मकान के आगे का हिस्सा तोडऩे के बाद पता चला कि यहां यूआईटी के कर्मचारी रात को लाल निशान लगाकर गए और सुबह कार्यवाही को अंजाम ही दे दिया, यानि की संबंधित व्यक्ति को संभलने का मौका ही नहीं दिया। साथ ही उन्होंने बताया कि उनके मकान पर कोई निशान नहीं लगाया गया था फिर भी तोड़ा गया। उन्होंने कहा कि उनके मकान न तो छज्जा है और ही अतिक्रमण, चाहे तो यूआईटी के कर्मचारी सड़क का मापकर देख सकते है।
मैं जूनागढ़ तोडऩे का कहूंगा तो क्या आप जूनागढ़ तोड़ देंगे?
खेराजराम सियाग ने बताया कि अतिक्रमण तोडऩे पर वे यूआईटी प्रशासन से मिले और शिकायत की तथा कार्यवाही वजह जानी। इस पर अधिकारियों ने कहा कि उन्हें स्थानीय लोगों की शिकायत मिली थी और उसी शिकायत के आधार पर यह कार्यवाही की गई है। इस पर सियाग ने कहा कि अगर मैं आपको जूनागढ़ तोडऩे की शिकायत करूंगा तो क्या आप जूनागढ़ तोड़ देंगे, या फिर उसके बारे में पहले जांच-पड़ताल करोगे।
कलेक्टर को सौंपे पट्टे
अतिक्रमण तोडऩे की कार्यवाही को लेकर पीडि़त बुधवार सुबह कलेक्टर नमित मेहता से मिले और द्वेषपूर्ण कार्यवाही का आरोप लगाते हुए उचित न्याय की मांग की। जिस पर कलेक्टर ने परिवादी से जमीन का पट्टा मांगा। उसके बाद शाम को परिवादी ने जमीन का पट्टा कलेक्टर को सौंपा दिया।
आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
परिवादी बताया कि कलेक्टर को जमीन का पट्टा दे दिया, लेकिन गलत तरीके से तोड़े गए अतिक्रमण से हुए उसके आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा।
रास्ते पर किए गए अतिक्रमण को तोडऩे की नहीं देते सूचना- तहसीलदार
द्वेषपूर्ण कार्यवाही करने जैसा कोई मामला नहीं है, वहां के स्थानीय लोगों की शिकायत थी और उसी शिकायत के आधार पर जिला कलेक्टर व यूआईटी सचिव के दिशा-निर्देश पर अतिक्रमण हटाने की यह कार्यवाही की गई। यूआईटी की एप्रूड कॉलोनी का प्रत्येक रास्ता 40 फीट का होता है। लेकिन जिस रास्ते पर अतिक्रमण तोड़ा गया वह रास्ता आगे खेतों में जाता है इसलिए आगे तो हमने 40 फीट सड़क छोड़ा ली, उससे आगे कहीं 25 फीट से 30 फीट का रास्ता है। इसलिए वहां के लोगों का विरोध है कि अतिक्रमण तोडऩे की कार्यवाही में समांता रखी जाए, लेकिन समांता रखना बस की बात नहीं है क्योंकि यह रास्ता ही ऐसा है। इसलिए विरोध के चलते वहां अतिक्रमण तोडऩे की कार्यवाही बीच में रह गई। रास्ते पर किए अतिक्रमण को तोडऩे के लिए सूचना देते नहीं है, उसको बिना सूचना के ही तोड़ते है, फिर भी शाम को घरों पर रेड क्रॉस के चिन्ह लगाये गए थे। अतिक्रमण तोडऩे के दौरान कहीं ज्यादा भी टूट जाता है। रामदेव नगर में केवल एक या दो अतिक्रमण नहीं बल्कि 40 से 50 अतिक्रमण हटाये गए है। लेकिन द्वेषपूर्ण कार्यवाही जैसी कोई बात नहीं है।– यूआईटी, तहसीलदार, कालूराम

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