ठंड जाने को है। माहौल में अब फाल्गुनी रंगत छायेगी। पिछली बार होली के बाद कोरोना को देखते हुए लॉकडाउन लगा दिया गया था, होली वापस आने को है। फरवरी का महीना शुरू होते-होते शहर में कोरोना पॉजीटिव कम हो गये हैं। कई बार तो एक भी नहीं होता। पीबीएम का कोविड सेंटर खाली हो चुका है। एहतियातन टीकाकरण का काम जारी है। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों के बाद अब प्रशासनिक अधिकारियों की बारी है। कलेक्टर-संभागीय आयुक्त टीका लगवा रहे हैं। फिर राजनेताओं का नंबर भी आएगा। कोरोना की विदाई को देखते हुए स्कूलें खुलने लगी हैं। छह से आठ तक की कक्षाओं को भी खोला जा रहा है। मास्क की पाबंदी भी अब सख्ती वाली नहीं रही है। मतलब, सरकार ने भी समझ लिया है कि कोरोना जाने वाला है। इस आने और जाने के बीच बने कोरोना-वॉरियर्स का सम्मान भी हो रहा है ताकि समाज को हौसला मिलता रहे। ऐसा नहीं होगा तो संभव है कि आने वाले समय में भटके हुए युवा गुंडों की गैंग में मिलेंगे। पिछले दिनों श्रीगंगानगर में एक बड़ी वारदात में बीकानेर के दो युवा भी पकड़ गये हैं। इन युवाओं के तार बदमाशों की बड़ी गैंग से जुड़े थे। बताया जाता है कि सालेक पहले ये युवा ऐसे नहीं थे। साहस को दुस्साहस बनते इतनी देर ही लगती है। वजह साफ है कि समाज इनकी परवाह नहीं करता। ऐसे कई युवा इन दिनों जुआ, सट्टा से आगे बढ़ते हुए नशा करने लगे हैं। बड़े-बड़े अपराध भी करते हैं, क्योंकि इन्हें राजनेताओं की शह होती है। इन राजनेताओं के लिए ये युवा चुनाव में काम करते हैं। इस काम के बदले इन्हें जो पोषण मिलता है, समाज के लिए वह कुपोषण का काम करता है। समाज को चाहिए कि युवाओं पर नजर रखे। अगर हम अच्छा समाज चाहते हैं तो हमारा दायित्व है अपनी आने वाली पीढ़ी की जरूरतों से जुड़ी अच्छाई-बुराई को समझें, लेकिन इसके लिए समाज को अपना किरदार बुलंद करना होगा। समाज को नेतृत्त्व देने के लिए किरदार बुलंद होना जरूरी है।
यह किरदार की खासियत है कि आज भी लोग बीकानेर के महाराजा गंगासिंह का याद करते हैं। उन्हें अंग्रेजों के आदेशों की पालना करते हुए अपने नगर का विकास किया। उन्होंने इस कार्य को शिद्दत से किया। बीकानेर को नहर और पीबीएम देने जैसे कार्य उनके नावें हैं। राव बीका के बसाये बीकानेर में की शासन परंपरा में लालसिंह के बाद एक हल्का-सा टर्न आता है। यह टर्न परंपरा-सम्मत होने के कारण स्वीकारा जाता है, लेकिन यह साफ है कि इसके बाद धीरे-धीरे राव बीका की कीर्ति कम होने लगती है। गंगासिंह की तवज्जो बढ़ जाती है। वरना, क्या ऐसा संभव है कि एक कस्बा डूंगरगढ़ श्रीडूंगरगढ़ बन जाए और गंगानगर और श्रीगंगानगर कहा जाने लगे। होता तो एक गजट नोटिफिकेशन ही है। बीकानेर भी तो श्रीबीकानेर हो सकता है। इस बीकानेर को श्रीबीकानेर बनाने के लिए कुछ तो करना ही चाहिए।
स्थानीय निकायों के चुनाव परिणाम आ चुके हैं। श्रीडूंगरगढ़ की बात करें तो यहां भाजपा अपरहैंड है, लेकिन अंतर्कलह का खतरा है। विकास मंच ने नोखा मेंं अपना जलवा कायम रखा है। रामेश्वर डूडी ने कन्हैयालाल झंवर को फ्री-हैंड देकर कांग्रेस को बचा लिया वरना त्रिकोणीय मुकाबले में बिहारीलाल से जीतना मुमकिन नहीं था। देखना यह है कि देवीसिंह भाटी के प्रभाव वाले देशनोक में कांग्रेस की मजबूती क्या रंग लाएगी। इधर, किसान आंदोलन में बीकानेर में कांग्रेस के नेता गोपाल गहलोत और दीपक अरोड़ा ने एक नई ही पहल कर दी। घोषणा कर दी कि केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को बीकानेर में ही नहीं घुसने देंगे। अगर इसे सोच-समझकर किया जाता तो यह घोषणा राष्ट्रीय स्तर की सुर्खी बनती, लेकिन कहीं कोई चूक रह गई। उलझ पड़े सांसद पुत्र रविशेखर मेघवाल से। नयाशहर थाने में एससीएसटी एक्ट में मामला दर्ज हो गया।
किसान आंदोलन को लेकर महिपाल सारस्वत, रामनिवास कूकणा, बजरंग छींपा आदि युवाओं ने अलख जगा रखी है, लेकिन लंबा हो रहा यह आंदोलन झूलने के कगार पर है। इस आंदोलन को राजस्थान में मजबूती देने के लिए अकेले रामेश्वर डूडी के दिल्ली पहुंचने से कुछ नहीं होगा। बड़ी पहेली तो इस आंदोलन में अशोक गहलोत के चुप रहने से पैदा हो रही है। कहीं, उन्हें इस बात का डर तो नहीं कि इस आंदोलन की ओट में राजस्थान में कोई बड़ा किसान नेता बनकर न उभर जाए। अगर ऐसा है तो भी अशोक गहलोत को समझना चाहिए कि उनके लिए दिल्ली का टिकट फाइनल है। भाजपा और कांग्रेस ने तैयारी कर ली लगता है कि अगले चुनाव वसुंधराराजे और अशोक गहलोत के नेतृत्त्व में नहीं लड़े जाएं। कोई भी पार्टी नहीं चाहेगी कि किसी नेता का कद पार्टी से ऊपर जाए।
इस बीच पेट्रोल के दाम सौ के पार हो चुके हैं। फेसबुक पर दोस्ती और फिर शादी के झांसे में आई युवती के फ्रस्टेशन ने सेनेटाइजर पीने पर मजबूर कर दिया। रांगड़ी चौक में लूट की वारदात हुई है। भावना मेमोरियल ट्रस्ट ने मेघवाल समाज की 30 युवतियों का सामूहिक विवाह करवाने की परंपरा का निर्वहन किया। नगर निगम आठ फरवरी को रवींद्र रंगमंच पर साधारण सभा करवाने के मूड में है। साल भर से कमेटियां नहीं बनने के कारण शहर के कई कामकाज लंबित पड़े हैं। देखा जाए तो ऊपर से लेकर नीचे तक यही तो चल रहा है। सत्ता अपनी सहूलियत देख रही है और विरोधियों को जिंदा रहने के लिए मुद्दे चाहिए। 21 फरवरी को आनंद वि. आचार्य की जयंती है। उनका एक लोकप्रिय शेर है
दिल में हल्ला बोल हो, आंखों में पानी चाहिए
हैं छिछोरे हमको दुश्मन खानदानी चाहिए

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