हरीश बी. शर्मा
बातें भले ही कितनी हो जाए, लेकिन दर्शन का गूढ़ तत्त्व यही समझ में आता है कि इस सृष्टि में प्राणी के पास संतति के अलावा कोई काम नहीं है। शास्त्रों में यही धर्म है, यही अर्थ है, यही मोक्ष है—जो काम के इर्द-गिर्द सिमटा हुआ है। इसे जंगली अर्थों में समझा जाए या फिर कत्र्तव्य की पूर्ति। प्राणी वंश वृद्धि के लिए जुटा रहता है। यह वंश कालांतर में नस्ल, जाति, सम्प्रदाय और धर्म से परिभाषित होने लगा, क्योंकि मानव में बैठे वैज्ञानिकों को लगा कि अगर ऐसे-ऐसे किया जाए तो वैसे-वैसे परिणाम मिल सकते हैं। यहां वैसे-वैसे को श्रेष्ठ बनने की आकांक्षा से समझा जा सकता है। सृष्टि के आदि से आज तक प्राणी-मात्र को नस्ली बनाने के लिए अनेक उपक्रम किये जाते रहे हैं। जानवरों से लेकर मनुष्यों तक नस्ल-सुधार कार्यक्रम के कई प्रसंग लोक में प्रचलित है। मोटे तौर पर इसका एक बड़ा आधार विवाह नाम की संस्था में नजर में आता है। समझदार भले ही यह दावा करने लगे हैं कि आने वाले 50 सालों बाद विवाह नाम की संस्था खत्म हो जाएगी, लेकिन इस बात से किसी को गुरेज नहीं है कि विवाह नाम की संस्था का जो विधान बना है, उसे युक्तियुक्त माना, वैज्ञानिक भी बताया गया है, लेकिन जैसे-जैसे इसमें धर्म, जाति और समाज ही नहीं, कुल और गौत्र तक की सीमाएं रखी जाने लगी, स्वागत भी हुआ तो विरोध भी शुरू हो गया। विवाह से जब प्रेम का तत्त्व गायब हुआ तो उसमें सुरक्षा, प्रभाव और शक्ति तत्त्व हावी होने लगा। विवाह से प्रेम गायब हुआ और शादियां अरेंज होने लगी, जिसने प्रेम करके विवाह करना चाहा, समाज उसका दुश्मन हो गया।
यह तो है विवाह नाम की संस्था की अंतर्कथा। इस अंतर्कथा का संदर्भ पिछले दिनों बीकानेर में हुए अंतर-धार्मिक विवाह के बाद हुए हंगामे से जोड़ा जाए तो कुछ बातें समझ में आ सकती है, जिसे लव-जिहाद तक कह दिया गया। कहीं ये तार लिव-इन में जुड़े नजर आते हैं। हालांकि, इस प्रकरण की परतें जिस तरह खुल रही है, उसमें रंजिश और साजिश ज्यादा नजर आ रही है, प्रेम तिरोहित होता नजर आ रहा है। यही वजह है कि राजनीति को रोटियां सेंकने का मौका मिल गया है। जिस तरह से धमकी, प्रदर्शन और मुकदमेबाजी से माहौल बना, उसने सारे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया। वरना, जिस तरह से लड़की ने वीडियो पर अपनी बात कही, एक बार तो मुंह बंद कर दिया था सभी का। लड़की के तर्क धांसू और मासूमियत वारी जाने जैसे थी, लेकिन समाज ऐसी मासूमियत का ही तो दुश्मन है। मामला पूरी तरह से यू-टर्न ले चुका है। प्रेम, विवाह और साहस के परे कहानियां कुछ और ही सामने आ रही है। सोशियल मीडिया न होता तो शायद इतना कुछ भी नहीं होता।
सोशल मीडिया पर निजता की नूरा-कुश्ती के बीच एक और ऑडियो इन दिनों नोखा से वायरल है। नोखा में विकास मंच ने जिस तरह से अपनी रणनीति बनाई उससे कांग्रेस बैकफुट पर है। यह समझ आने लगा है कि झंवर बड़ी रणनीति के शिकार हो चुके हैं। बीकानेर विधानसभा पूर्व में कन्हैयालाल झंवर ने जिस तरह चुनाव लड़कर अपनी महत्वाकांक्षा का परिचय दिया है, उसने भाजपा ही नहीं कांग्रेस में भी अफरा-तफरी मचा दी थी। ऐसे में नारायण झंवर को बड़ी लड़ाई लडऩी पड़ेगी। बीकानेर जिले में नोखा सहित देशनोक और श्रीडूंगरगढ़ में निकाय चुनाव होने हैं। भाजपा जहां तीनों निकायों पर मुकाबले के मूड में है तो कांग्रेस ने प्रत्याशी दो जगह ही उतारे हैं।
फ्रंट लाइनर्स को वैक्सीनेशन होने लगा है। शुरुआत धीमी रही, लेकिन अब वैक्सीन के प्रति भरोसा होने लगा है, फिर भी एहतियातन अभी उन लोगों को वैक्सीन नहीं लगाई जाएगी, जिन्हें साल शुरू होते-होते कोरोना पॉजीटिव हुआ है या यूं समझिये कि अभी तक कोरोना हुए एक महीना भी नहीं हुआ होगा, उनका नंबर अभी नहीं लगाया जाएगा। इस तरह के मामलों में रिस्क की गुंजाइश है।
इस बीच बड़ी खबर यह है कि बीकानेर के सीएमएचओ डॉ. बी.एल.मीणा ही रहेंगे। न्यायालय के आदेश से वे यहां आए हैं। कोरोना काल में मैन ऑफ द सीरीज रहे मीणा का स्थानांतरण उस दिन कर दिया गया, जब बीकानेर में जीरो पॉजीटिव दर्ज हुए। डॉ. सुकुमार कश्यप को बीकानेर लगाया गया। अभी डॉ. कश्यप अपने आने के रास्ते बना ही रहे थे कि कोर्ट के आदेश ने स्वास्थ्य विभाग को सकते में ला दिया है। डॉ. बी.एल.मीणा को बीकानेर से प्यार है। उनका ट्रांसफर हुआ तब लोगों का कहना था कि उन्होंने मंत्री के करीबियों की दुकानों पर कार्रवाई की तो तबादला हो गया। देखते हैं मंत्री क्या करते हैं।
एसीबी में नये एसपी गगनदीप सिंगला आ गए हैं। एसपी प्रीति चंद्रा शहर में होने वाले अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस को सुधारने के अभियान में हैं। नशे के लिए काम ली जाने वाली टेबलेट्स की खेप पकड़ी जा रही है तो दूसरी ओर जेल में गुटबाजी और लड़ाई की घटनाएं सामने आ रही है। 007 नाम की गैंग के गुर्गे पकडऩे में पुलिस सफल रही है। इस बीच बीकानेर में नाइट-कफ्र्यू भी खत्म हो गया है। वैक्सीन आने से पहले कोरोना किसके डर से भाग गया, इस बहस के लिए किसी के पास समय नहीं है। बर्ड-फ्लू की जांच के लिए पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय ने प्रस्ताव भेज दिये हैं।
महापौर सुशीलाकंवर राजपुरोहित ने पिंक ऑटो शुरू करवाये हैं, जिसे महिलाएं चलाएंगी। कॉल-सेंटर बनाया है ताकि लोग अपनी शिकायतें दर्ज करवा सकें और गृहकर की वसूली के लिए भी सख्त हुई हैं। इस बीच सड़क सुरक्षा सप्ताह भी शुरू हुआ है तो सूरसागर के लिए भी नए सिरे से योजना बनेगी। इस सूरसागर पर अब तक कितना रुपया लगा है, यह भी बड़ा सवाल है। जवाब आरटीआई से भी मिल जाए तो बड़ी बात है।
अपनी हालत का खुद अहसास नहीं है मुझको
मैंने औरों से सुना है कि परेशान हूं मैं

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