गया कोरोना, बढ़ी अराजकता, झंवर पर भारी बिहारी,एक और अंडर ब्रिज की तैयारी

हरीश बी. शर्मा
कोरोना का भूत तो शहर से उतर गया, लेकिन अराजकता बढ़ती जा रही है। सिकंदराबाद ट्रेन में लूटमार। राहगीरों को लूटने वाला अशोक गिरफ्तार और पांच हजार की रिश्वत लेते पकड़ा गया हैड कांस्टेबल रेवतराम इस बात के उदाहरण है कि लोगों के पास पैसा नहीं है, लेकिन जरूरतें बढ़ती जा रही है।
चोरियां तो हर दिन हो रही है। दुकानें, घर और मंदिर-किसी को भी नहीं छोड़ा जा रहा। पुलिस परेशान है। एसपी प्रीति चंद्रा ने सघन गश्त के निर्देश दिये हैं।
कुछ लोगों का मत है कि कोरोना के कारण बढ़ी बेकारी के कारण चोरियां बढ़ी हैं। कुछ इससे दीगर राय रखते हैं। दीगर राय यह कि बड़ी से बड़ी चोरी की सजा 4 साल से ज्यादा की नहीं है। यही वजह है कि चोरों के हौसले बुलंद है। हालांकि, पुलिस ने चोरों को पकड़ा भी है, लेकिन जरूरत है कि कानून का डर हो।
कानून सख्त नहीं होगा तब तक इसी तरह चोरियां जारी रहेगी, लेकिन कानून सख्त हो भी कैसे। सिर्फ चोरी की घटनाओं पर ही क्यों कानून की सख्ती तो सब पर होनी ही चाहिए। कानून नहीं लागू करवाने का दोष भी व्यवस्थाओं पर तय होना चाहिए। किसी एसपी-कलेक्टर ही नहीं प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री से भी यह जवाब-तलबी होनी चाहिए कि उस पर जो भरोसा या उससे जो अपेक्षा की गई, उस पर वह बेहतर क्यों नहीं साबित हो सका। यही नहीं, इस कमतरी का दंड भी उसे मिलना चाहिये। कभी लोकपाल जैसे विषय इसी दिशा में एक कदम के रूप में उठाये गए थे, लेकिन अन्ना के अंदोलन में एनजीओज और ब्यूरोक्रेट की घुसपैठ ने न सिर्फ आंदोलन को खत्म किया बल्कि भाजपा को बड़ा अवसर दे दिया। दिल्ली फहराये गए तिरंगों के माध्यम से ‘भाजपा’ ने जिस तरह अन्ना के आंदोलन में एंट्री की, एक केस-स्टडी है। इतिहास साक्षी है कि भाजपा ने इस आंदोलन के परिणाम लपक लिए थे।
पीबीएम अस्पताल में लपके सक्रिय हैं, जो प्राइवेट लैब से अच्छे डॉक्टर्स तक कि सेवाएं उपलब्ध करवा सकते हैं। बिना अस्पताल के यह कैसे संभव है। पिछले दिनों पीबीएम में एक लपका पकड़ा गया। इस तरह के लपकों ने बीकानेर के पर्यटन उद्योग का भी बेड़ा गर्क कर रखा है।
अच्छी खबर यह है कि बीकानेर संभाग में पोटाश के उत्खनन को लेकर प्रक्रिया शुरू हो गई है। बीकानेर सहित हनुमानगढ़ सहित नागौर, श्रीगंगानगर में पोटाश मिलने के बाद से सरकार इसके उपयोग के लिए योजना बना रही थी। लगभग दस साल से चल रहे इस प्रोजेक्ट की भनक लगते ही लोगों ने जमीनें खरीद ली। हालांकि, सरकार अब जागी है।
देश के नक्शे पर बीकानेर के पोटाश उत्खनन क्षेत्र के रूप में सम्मिलित होने से नई पहचान बनेगी। इधर, बीकानेर ने 26 जनवरी को कृषि कानून के विरोध में ट्रैक्टर रैली ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। एक हजार के करीब ट्रेक्टर सड़कों पर थे। संयुक्त किसान संघर्ष समिति के बैनर तले हुए इस कार्यक्रम ने बीकानेर को किसानों की लड़ाई में साथ खड़ा कर दिया। भाजपा के प्रभाव वाले बीकानेर में यह प्रदर्शन नई राजनीतिक जमीन की संभावना है।
इधर, केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल और राजस्थान सरकार के काबीना मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला रेल बायपास के मुद्दे पर साथ खड़े नजर आए। मतलब, एलिवेटेड रोड की चूसनी खत्म। सुना है कि एक अंडर ब्रिज कोयला गली से स्टेशन रोड तक बनाया जा सकता है।  बहरहाल, कोटगेट पर जाम बढऩे लगा है। रेल फाटक बंद होने लगा है और लोग परेशान होने लगे हैं।
इधर महंगाई भी आसमान छू रही है। पेट्रोल का शतक पार चिंता का कारण बन रहा है। कहते हैं कि नये कृषि कानून के लागू होने पर भी महंगाई बढ़ेगी।
नोखा, श्रीडूंगरगढ़  और देशनोक में पालिका चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। नारायण झंवर और कौशल दुग्गड़ इस बार निशाने पर हैं। भाजपा के लिए बिहारी बिश्नोई ने नोखा में अपनी सारी ताकत झौंक दी है। कन्हैयालाल झंवर और नारायण झंवर जहां इस बार अपना अस्तित्व बचाने में जुटे हैं वहीं बिहारी बिश्नोई यह साबित करना चाहते हैं कि नोखा में वे निर्विवाद हैं। शायद यही वजह है कि देहात अध्यक्षी छिन जाने के बावजूद वे भाजपा देहात अध्यक्ष ताराचन्द सारस्वत से अभी भी अधिक सक्रिय हैं। बीकानेर कांग्रेस भी नए अध्यक्ष के इंतजार में है। प्रदेश की कार्यकारिणी बनने के बाद अब शहरों में भी बदलाव होगा। हालांकि, राजनीति के पंडितों का मानना है कि बदलाव नहीं होगा, लेकिन प्रयास पूरे हैं।
नगर निगम गृह और सम्पत्ति कर की वसूली के प्रयास में है। इसे देखते हुए नगर विकास न्यास भी लीज मनी वसूली अभियान में लग चुकी है। इस बार न्यास ने गणतंत्र दिवस पर दिए जाने वाले पुरस्कार नहीं बांटे।
वरिष्ठ पत्रकार अभय प्रकाश भटनागर की स्मृति में हर साल होने वाले कार्यक्रम में इस बार साहित्यकार सरल विशारद, मदन सैनी व पत्रकार अशोक माथुर व बाबूसिंह कच्छावा का सम्मान किया गया। भुवालका जन कल्याण ट्रस्ट से सम्मानित होने पर मधु आचार्य ‘आशावादीÓ का नागरिक अभिनंदन किया गया।
कला रंग राग नाम से चल रहा वर्चुअल समारोह भी लोगों को भा रहा है। मार्च में बीकानेर थियेटर फेस्टिवल भी है। होली भी है। इससे पहले बसन्त पंचमी का अबूझ सावा भी है। सरकार ने कोरोना एडवायजरी के तहत अनेक प्रतिबन्धों को वापस ले लिया है। कोरोना का भयावह और तनावमुक्त काल जा चुका है, लेकिन मोबाइल की कॉलर ट्यून फिर से डरा देती है।
‘कभी यक-ब-यक तवज्जोह कभी दफ़अतन तगाफुल
मुझे आजमा रहा है कोई रुख बदल बदल कर’

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