जंडावाली की डॉ. नजमा प्रदेश की पहली ऐसी महिला, जिन्होंने ‘राठ समुदाय’ की महिलाओं पर की पीएचडी

एक कहावत आपने जरूर सुनी होगी ‘उड़ने के लिए पंखों की नहीं हौसलों की जरुरत होती है’ और यही कहावत गांव जंडावाली निवासी डॉ. नजमा खातून पर एकदम सटीक बैठती है। नजमा ने वर्ष 2020 में ‘राठ समुदाय की मुस्लिम महिलाओं की सामाजिक एवं धार्मिक परिस्तिथि’ विषय पर जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से पीएचडी पूरी की है।

ख़ास बात यह है कि पीएचडी पूरी करने की उनकी यह यात्रा इतनी आसान भी नहीं थी। ठेठ देहाती किसान परिवार में पली-बढ़ी नजमा को सामाजिक परंपराओं और बंधनों के चलते मिडल क्लास पास करने के बाद अपनी पढ़ाई को विराम देना पड़ा था। वर्ष 2002 में उनकी शादी अशफाक हुसैन से हुई। भास्कर से बात करते हुए डॉ. नजमा बताती हैं कि उनके दो बच्चे वसीम और शाइस्ता ने उनकी पढ़ाई में बड़ा योगदान दिया है। दरअसल, शादी के बाद पढ़ाई ठीक से नहीं हो पा रही थी। उनके दोनों बच्चे इंग्लिश स्कूल में पढ़ते थे। उनको कोचिंग करवाते हुए उनमें दोबारा पढ़ने की लालसा जागी। जब यह बात उन्होंने अपने पति अशफाक से साझा की, तो उन्होंने भी अपनी पत्नी को पढ़ाने के लिए जमीन-आसमान एक कर दिए। आज डॉ. नजमा राजस्थान की पहली ऐसी महिला हैं, जिन्होंने डबलीराठान गांव में मुस्लिम समाज के पंजाबी भाषी ‘राठ समुदाय’ विषय पर पीएचडी की है।

महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करना ही एकमात्र उद्देश्य
डॉ. नजमा बताती हैं कि इस्लाम धर्म के अनुसार महिलाओं को अपने अधिकारियों के बारे में बहुत कम ज्ञान है। उनका उद्देश्य समाज की महिलाओं को कुरान प्रदत्त अधिकारों का ज्ञान कराना और शिक्षा के प्रति जागरूक करना है। वे अपने शोध के माध्यम से राठ समुदाय की महिलाओं के सामाजिक, धार्मिक व आर्थिक स्तर को आमजन के सामने लाना चाहती हैं। उन्होंने अपनी उपलब्धि का श्रेय स्व. दादा मुहम्मद इसहाक, पिता एडवोकेट माेहम्मद मुश्ताक जोइया, पति अशफाक हुसैन, भाई मुजफ्फर अली, शब्बीर सहित अपने परिवार और शिक्षकों को दिया है।

राठ समुदाय की विषमताओं को किया उजागर
उन्होंने राठ समुदाय की महिलाओं के जीवन और पिछड़ेपन को अपने शोध का लक्ष्य बनाया था। यह अनूठा विषय इलाके के राठ समुदाय की उन विषमताओं को उजागर करने वाला है। जिसपर आज तक किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। डॉ. नजमा ने बताया कि इस अनूठी पहल की प्रेरणा उन्हें मुस्लिम सोशल एंड कल्चरल सोसायटी द्वारा प्रकाशित एक लेख से मिली थी।

8वीं के बाद घर बैठे की सारी पढ़ाई
शादी के बाद नजमा ने घर परिवार की जिम्मेदारियों को बखूबी संभालते हुए अपनी पढ़ाई के लिए समय निकाला। कक्षा 8वीं के बाद उन्होंने घर बैठे ही पढ़ाई की थी। उन्होंने पत्राचार के माध्यम से कोटा ओपन यूनिवर्सिटी से समाजशास्त्र विषय में स्नातक डिग्री हासिल की। इसके बाद 2016 में उनके भाई ने पीएचडी करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद उन्होंने ‘श्रीगंगानगर लोकसभा संसदीय क्षेत्र में हनुमानगढ़ जिले के डबलीराठान गांव की राठ मुस्लिम महिलाओं की सामाजिक और धार्मिक परिस्थिति का अध्ययन’ विषय चुना।



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Dr. Najma of Jandawali is the first woman in the state who did PhD on women of 'Rath community'


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