न्यायालय विशिष्ट न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) प्रमोद कुमार मलिक ने पंप की एनओसी रिन्यू करने की एवज में 1.40 लाख रुपए की रिश्वत लेने के मामले में शनिवार को आरोपी बारां के तत्कालीन जिला कलक्टर इन्द्रसिंह राव की जमानत खारिज कर दी। इसके साथ ही विशिष्ट न्यायाधीश मलिक ने सुनवाई कर कड़ी टिप्पणी करते हुए लिखा कि आरोपी जिलाधीश रह चुका है, जमानत दी तो साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाह को प्रताड़ित कर सकता है।
29 सितंबर को निरोधक ब्यूरो की समीक्षा बैठक में भ्रष्टाचार के संबंध में राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति तथा इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए एसीबी के कृतसंकल्प होने संबंधी दिशा-निर्देश राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए थे। आरोपी जो कि जिलाधीश बारां के अहम पद पर बतौर लोकसेवक राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में पदस्थापित था।
राव ने जीरो टॉलरेंस नीति का उल्लंघन किया
न्यायाधीन ने लिखा कि आरोपी भ्रष्टाचार के संबंध में राज्य सरकार की जीरो-टॉलरेन्स की नीति का (अवैध रूप से अपने अधीनस्थ निजी सहायक सह अभियुक्त महावीर प्रसाद नागर के मार्फत रिश्वत लिए जाने पर) उल्लंघन किया जाना स्पष्ट हुआ है। आरोपी को यदि जमानत का लाभ दिया जाता है तो वह प्रतिष्ठित पद पर रह चुका है। प्रकरण के गवाह को प्रताड़ित करने व साक्ष्य से छेड़छाड़ किए जाने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
विशिष्ट न्यायाधीश मलिक ने यह भी लिखा कि वर्तमान समय में समाज में भ्रष्टाचार के मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, अभियुक्त के द्वारा भ्रष्टाचार निवारण के संबंध में राज्य सरकार की जीरो-टॉलरेन्स नीति का अपने अधीनस्थ के मार्फत उल्लंघन किए जाने से, अभियुक्त के विरुद्ध एसीबी में पूर्व में दर्ज प्रकरणों को देखते हुए व अपराध की गंभीरता को मद्देनजर आरोपी की ओर से प्रस्तुत जमानत आवेदन स्वीकार किया जाना न्यायोचित नहीं पाया जाता है। गौरतलब है कि खेड़लीगंज अटरू जिला बारां निवासी गोविंद सिंह ने 8 दिसंबर 2020 को कोटा एसीबी को शिकायत दी थी।
एसीबी की टीम ने रिश्वत मामले में बारां के तत्कालीन जिला कलेक्टर के पीए महावीर प्रसाद को पहले तथा कलेक्टर राव को बाद में गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने दोनों को 6 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। आरोपी कलेक्टर की ओर से उनके वकील ने कोर्ट में जमानत अर्जी पेश की।
आरोपी के वकील ने कहा-यह झूठी कार्रवाई है
बचाव पक्ष के वकील ने बहस में कहा परिवादी ने षड्यंत्र के आधार पर इन्द्रसिंह राव के खिलाफ झूठी कार्रवाई है। आरोपी के परिवादी से न तो रिश्वत राशि मांगी न ही प्राप्त की और न ही राव के कब्जे से रिश्वत राशि बरामद हुई है। आरोपी केन्द्रीय सेवा में आईएएस के पद पर पदस्थापित होने से केन्द्रीय स्तर के अधिकारियों के संबंध में कार्रवाई करने का अधिकार एसीबी को न होकर सीबीआई को हैं। वकील ने जमानत पर रिहा करने का अनुरोध किया।
आरोपी के केन्द्रीय सेवा में होने के बावजूद एसीबी को अधिकार
सहायक निदेशक अभियोजन अशोक कुमार जोशी ने तर्क दिया आरोपी के केन्द्रीय सेवा में होने के बाद भी संबंधित मामलों की सुनवाई का अधिकार एसीबी को है।
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