एक नाबालिग बेटा अपने नेत्रहीन पिता की आंखों का इलाज करवाने के लिए पैसा कमाने के लिए घर से भागा। एमपी के मुरैना जिले में एक ठेकेदार ने उसे काम दिया। कुछ दिन काम करवाने के बाद उसे बिना पैसे दिए ही भगा दिया। इसके बाद बालक किसी ट्रेन से धौलपुर आ गया। जिसके बाद चाइल्ड हेल्प लाइन ने उसे बाल संप्रेक्षण गृह में रखवा दिया।
बाल कल्याण समिति सदस्य गिरीश गुर्जर जब बाल संप्रेक्षण गृह निरीक्षण के लिए पहुंचे तो बालक अपने पिता के पास जाने की कहकर रोने लगा। इसके बाद उसकी जानकारी जुटाई तो बालक यूपी के मुरादाबाद जिले का रहने वाला निकला। इस पर गुर्जर ने मुरादाबाद बाल कल्याण समिति से संपर्क कर बालक के पिता को बुलवाया, लेकिन उन्होंने नेत्रहीन होने का हवाला देकर आने में असमर्थता जताई।
साथ ही बेटे को लेने के लिए उसके जीजा को धौलपुर भेजा। जीजा ने धौलपुर पहुंचकर पिता से वीडियो काॅलिंग के जरिए बात करवाई। इसके बाद बालक को जीजा को सौंप दिया। बाद में नेत्रहीन पिता ने भी बाल कल्याण समिति का धन्यवाद जताया।
पिता भी घर से कर चुका था पलायन
गुर्जर ने बताया कि जब मुरादाबाद समिति को पूरा मामला बताया तो समिति सदस्य बालक द्वारा बताए गए पते पर पहुंचे लेकिन वहां उन्हें पिता नहीं मिला। जानकारी करने पर पता चला कि वह बेटी के घर पर है। जिसके बाद सदस्यों ने उससे संपर्क किया और बेटे की जानकारी दी। इस पर बालक को मौके पर पहुंचे जीजा के सुपुर्द किया गया और पिता को इसकी सूचना दी गई।
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