जामडाेली के राधिका विहार में ज्वैलर यशवंत साेनी, उनकी पत्नी ममता और दाेनाें बेटाें अजीत-भारत के सामूहिक सुसाइड करने के साढ़े तीन महीने पुराने मामले में कानोता थाना पुलिस ने एफआर लगा दी है। हैरानी की बात है कि पुलिस काे अभी तक सुसाइड नाेट की हैंड राइटिंग की एफएसएल जांच रिपाेर्ट भी नहीं मिली है।
बस्सी एसीपी सुरेश सांखला का कहना है कि यह लेन-देन का मामला था। सुसाइड नाेट में जिनका नाम था, उनकी देनदारी यशवंत काे थी। इस आधार पर ही उन्हें आराेपी नहीं मान सकते थे। एफआर के निष्कर्ष में जांच अधिकारी ने लिखा है कि यशवंत कर्जे में था और किसी से इस बात काे शेयर नहीं कर परिवार सहित फंदा लगा लिया। एफआर लगाने के लिए डीसीपी कार्यालय से आदेश हाे गए हैं। अब एफआर काेर्ट में पेश कर दी जाएगी। सुसाइड नाेट में ज्वैलर यशवंत ने कुछ हाई प्राेफाइल लाेगाें के नाम लिखे थे।
18 सितंबर; एक रात में ही खत्म हो गया था यशवंत का परिवार
ज्वैलर परिवार ने 18 सितंबर की रात काे राधिका विहार स्थित मकान की पहली मंजिल पर फंदा लगा लिया था। यशवंत की पत्नी ममता साेनी की आंखाें पर पट्टी बंधी थी ताे दाेनाें बेटाें के हाथ पीछे से बंधे थे। पुलिस काे सुसाइड नाेट मिला था। जिसमें लेन देन का पूरा हिसाब था और कुछ बड़े ज्वैलर्स के नाम लिखे हुए थे।
परिजन बाेले: हमें ताे पता ही नहीं, हम ताे आराेपियाें के खिलाफ चालान पेश करने का इंतजार कर रहे थे

इस सारे मामले में यशवंत के परिजनाें काे भी पता नहीं है कि जिन लाेगाें के चलते उनके बेटे-बहू और इनके दाेनाें बेटाें ने सामूहिक आत्महत्या की थी, उनकाे पुलिस ने बख्श दिया है। परिवार ताे बस चालान पेश करने का इंतजार कर रहा था। मामला दर्ज कराने वाले चेतन साेनी व देव सोनी ने बताया कि मामले में अभी तक हैंड राइटिंग एक्सपर्ट की रिपाेर्ट भी नहीं आई है। जांच अधिकारी ने गत दिनाें हमारे हस्ताक्षर करवाए थे कि मामले में चालान पेश करेंगे। ये कैसे हाे सकता है कि अधिकारियाें ने एफआर लगाने के आदेश दे दिए। पुलिस ने ताे हमें सुसाइड नाेट तक नहीं दिया।
सवालों के घेरे में पुलिस की फाइनल रिपोर्ट
- सुसाइड नाेट की हैंडराइटिंग जांच की एफएसएल रिपेार्ट के बिना पुलिस ने सुसाइड नाेट काे गलत कैसे मान लिया।
- सुसाइड नाेट में लेन-देन का हिसाब और ज्वैलर्स के नाम थे। पुलिस ने इनकाे पूछताछ के लिए बुलाया भी था। क्लीन चिट किस आधार पर दी गई यह समझ से परे है।
- जब मामले में एफआर लगाने के आदेश दे दिए ताे फिर परिजनाें काे ये क्याें कहा कि हम चालान पेश कर रहे हैं और यही कहकर जांच अधिकारी ने परिजनों के हस्ताक्षर लिए।
- ज्वैलर के लैपटाॅप में लेन-देन का हिसाब था, लेकिन एफआर में ये नहीं बताया गया कि क्या हिसाब मिला।
- यशवंत की माेबाइल काॅल डिटेल के आधार पर भी पुलिस ज्यादा जांच नहीं की। जांच अधिकारी ने माना है कि यशवंत कर्जे में था मगर ये जांच नहीं की कि लेनदार उसे प्रताड़ित कर रहे थे या नहीं। सवाल अब भी अधूरा है कि यशवंत के साथ परिवार के अन्य लाेगाें ने सुसाइड क्याें किया?
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