शहर के जिन किले-महल-म्यूजियम पर पर्यटन का पूरा दारोमदार है, उनकी हालत दिन-ब-दिन खराब हो रही है। अल्बर्ट म्यूजियम से लेकर जंतर मंतर और हवामहल से लेकर आमेर महल तक सबको संरक्षण की जरूरत है। यहां पर्यटकों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जरूरतें काम मांग रही है। कहीं शौचालय जैसी बेसिक सुविधा नहीं है तो कहीं छज्जे-कंगूरे गिरने को है।
टूरिज्म सेक्टर से जुड़े गाइड-टूर आपरेटर और खुद पर्यटक तो इन हालात पर पहले ही दुखी थी, अब तो यहां के इंचार्ज भी कामकाज नहीं होने से आहत हैं। पड़ताल में सामने आया कि कामकाज के लिए वो ही आए दिन ‘आवश्यक-अत्याश्यक’ पत्रों के साथ कई-कई रिमाइंडर भेज चुके हैं, लेकिन स्मारकों पर जल्द कामकाज कराने के लिए बना आमेर विकास प्राधिकरण (एडमा) ही इन मांगों को ‘हेरिटेज’ बनाए सुस्त ‘पाषाण’ बना बैठा है। भास्कर ने प्राधिकरण के सिस्टम को खंगाला तो यही सच्चाई चीखती नजर आई।
बजट लैप्स, स्टाफ की कमी और सिस्टम की नाकामी
अमूमन काम नहीं होने के पीछे स्टाफ और बजट दो जरूरी पहियों में कोई डांवाडोल रहता है। यहां 3 कार्यकारी निदेशक सहित 3 एक्सईएन और 2 एईएन हैं तो दो साल से 8-8 करोड़ का बजट भी। पिछले साल भी बजट और टीम का उपयोग नहीं किया था, वहीं अब जबकि सभी विभागों में कामकाज पटरी पर लौट रहे हैं तो भी यहां खालीपन बरकरार है।
पुरातत्व: अधीक्षक बोले- कहते-लिखते थक गए काम होते ही नहीं
^हवामहल के मुख्य ‘मुकुट’ पर रंग-रोगन, फर्नीचर का काम 2013 के बाद नहीं हुआ। म्यूजिकल फाउंटेन और संरक्षण-जीर्णोद्धार के अन्य काम भी पेंडिंग है। लगातार एडमा को लिख रहे हैं।
-सरोजनी चंचलानी, अधीक्षक, हवामहल
^ वायु परीक्षण वाली बड़ी घड़ी पर संरक्षण के काम सहित कई जगह खमीरा बाकी है। टूरिस्ट फेसिलिटी के अलावा छज्जे वगैरह के संरक्षण के लिए लिखा हुआ है।
-मौ. आरिफ, अधीक्षक, जंतर-मंतर
^ पूरे महल के आंतरिक हिस्सों में सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी लगाने हैं। वॉल्टेज के ईश्यू, पानी की परेशानी, दलाराम बाग से केसर क्यारी तक वायरिंग-लाइट, हेरिटेज पोल ठीक कराने, मुगल गार्डन में म्यूजिकल फाउंटेन सहित पूरे महल में लाइटों के काम पेंडिंग है। परकोटे और परियों के बाग की दीवार क्षतिग्रस्त है, शौचालय नहीं है। मावठा पार्किंग और महल में छज्जों की मरम्मत होनी है।
-पंजक धरेंद्र, अधीक्षक, आमेर महल।
^विद्याधर गार्डन में टूटी दीवार, सिसोदिया रानी बाग में कंजर्वेशन के काम और अल्बर्ट म्यूजियम में डूबे ऑब्जेक्ट के काम कराने हैं।
-राकेश छौलक, अधीक्षक, सेंट्रल म्यूजियम-नाहरगढ़, गार्डन
आमेर विकास प्राधिकरण: भास्कर ने हालात बताए तो कबूले हालात
^ हां, जितना खर्च करना है, उतना नहीं हो पाया। पिछले साल भी पूरे काम नहीं हो पाए थे। इस साल 8 करोड़ का बजट था, जो रिवाइज होकर 5 करोड़ रह गया। फिलहाल सवा 2 करोड़ के आसपास के काम हुए हैं। काम इंजीनियरिंग विंग देख रही है।
-नरेंद्र सिंह, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (फाइनेंस), आमेर विकास प्राधिकरण
^काम आगे बढ़ा रहे हैं। हां, बजट और टीम का कोई ईश्यू नहीं है। कोविड आदि की वजह से चीजें सफर कर रही थीं। स्मारकों से जो डिमांड आई हुई है, उसको जल्द निकालेंगे।
-सत्येंद्र कुमार, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (वर्क्स), आमेर विकास प्राधिकरण
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