स्मार्ट सिटी की फंडिंग से होने वाले टेंडर फिर डिले, तालकटोरा का विकास रुका

राजस्थान पर्यटन विकास निगम खुद की प्रोपर्टी के विकास कार्यों के लिए तो जूझ ही रही है, अब स्मार्ट सिटी से मिलने वाले फंड का भी उपयोग तय नहीं करा पा रही। तालकटोरा के विकास कार्यों को लेकर दूसरी बार किए गए टेंडर जिम्मेदारों ने अटकाए हुए हैं। 11 नवंबर को इनकी तकनीकी बिड खोली गई थी।

इसके बाद पहले तो फाइनेंशियल बिड में पूरा एक महीना लगा दिया और अब है कि न तो चयनित फर्म को वर्कऑर्डर दे रहे हैं और न ही किसी कारण विशेष को सामने लाकर कोई फैसला कर रहे हैं। इससे जिम्मेदारों की भूमिका सवालों में है। यह हालात तब है जबकि जून में किए गए टेंडर पहले ही खारिज हो चुके हैं। दूसरी ओर इस लेटलतीफी और पर्यटन निगम की कार्यशैली के चलते शहर को बेशकीमती और आकर्षक तालकटोरा के टूरिज्म से वंचित होना पड़ रहा है।

फिलहाल यह ऐतिहासिक वॉटर बॉडी विकास कार्यों के अभाव में दूषित होकर केवल बास मार रही है। बता दें कि स्मार्ट सिटी की ओर से तालकटोरा के विकास कार्यों के लिए 21.48 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया गया है। कार्यकारी एजेंसी आरटीडीसी को भी काम के पेटे 9 प्रतिशत यानी 1 करोड़ 80 लाख रुपए मिलने हैं। इसके बावजूद न तो पहले खारिज किए टेंडर के कारण स्पष्ट हो पाए और न ही अब की प्रक्रिया सुलझा पा रहे हैं।

^तालकटोरा के टेंडर प्रक्रियाधीन है। देरी की फिलहाल कोई वजह नहीं है। जल्द प्रक्रिया पूरी होगी। लाइट एंड साउंड के वर्कऑर्डर जल्द हो जाएंगे।
-माधव शर्मा, कार्यकारी निदेशक, आरटीडीसी

लाइट एंड साउंड शो के ये काम प्रस्तावित किए गए थे
मंत्री-एमडी के बीच विवादित हुए काम के टेंडर कई बार पहले भी रद्द हो चुके। इसके बाद अब 7 जगहों पर लाइट साउंड एंड मल्टीमीडिया शो के काम होने हैं। इसके लिए 25 करोड़ के आसपास के काम हैं। इनसे जयपुर के जयनिवास उद्यान, धौलपुर, चित्तौडगढ फोर्ट, कुंभलगढ़, सांवलिया सेठ, प्रताप गौरव केंद्र उदयपुर और मीरा मंदिर मेड़ता के काम होने हैं। काम के लिए 5 फर्मों का चयन किया गया है।



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फाइल फोटो।


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