रिटायर कर्मचारी में पौधों की देखरेख व पौधरोपण का ऐसा जज्बा है कि कोरोनाकाल में उन्होंने सार्वजनिक स्थानों, पार्कों, स्टेडियम व गली-मोहल्लों में 300 से अधिक पौधे लगाए। पर्यावरण प्रेम का यह जज्बा क्रय-विक्रय समिति से रिटायर मीरा नगरी राजीव काॅलोनी निवासी 74 वर्षीय भगवानदास पुत्र पन्नालाल झंवर दिखा रहे हैं। झंवर ने बताया कि जब हरा पेड़ कटता देखता हूं तो दिल रो पड़ता है।
पौधे लगाने के साथ पौधे सुरक्षित चले इसके लिए वे गर्मी में प्रतिदिन सुबह 5 बजे व सर्दी में सुबह 6 बजे बाल्टी और पौधे लेकर घर से निकलते हैं। कई जगह नए पौधे लगाते हैं कई जगह पुराने पौधो को पानी पिलाते है। सेवानिवृत्ति के बाद पिछले 14 वर्षों से जगह-जगहग पौधे लगा रहे हैं। झंवर ने बताया कि उन्हें पौधरोपण व पौधों को पानी पिलाने में सुकून मिलता है।
घर के आसपास से पौधा लगाने की शुरुआत की। इसके बाद पार्क व इंदिरा गांधी स्टेडियम में पौधरोपण शुरू किया।पौधों के लिए ट्री-गार्ड की व्यवस्था भी की। वर्ष 2020 में उन्होंने इंदिरा गांधी स्टेडियम, शास्त्रीनगर मोक्षधाम, लव-कुश पार्क, रोडवेज बस स्टैंड के सामने रैलिंग के बीच, सांवलियाजी चिकित्सालय आदि जगह पौधरोपण किया।
अब तो लोग भी पौधे वाले बाउजी बुलाने लगे
बुजुर्ग झंवर ने बताया कि उन्होंने करीब 500 पौधे लोगों को निशुल्क वितरित किए। कई लोग उनसे पौधे मांगते हैं।तब वे पौधा देने के साथ पौधा लेने वाले व्यक्ति को उसकी देखरेख व नियमित पानी पिलाने के लिए पाबंद करते हैं। झंवर ने बताया कि कई बार सरकारी विभागों से पौधे व ट्री गार्ड लेने के लिए किसी संस्था का लेटरहेड चाहिए हाेता है।
इस पर उन्होंने प्रकृति व पर्यावरण प्रेम भारत नाम से संस्था का गठन किया है। जिसमें नई पीढ़ी को जोड़कर युवाओं को पौधरोपण व पौधों की सुरक्षा के लिए प्रेरित करेंगे। पर्यावरण प्रेम देखकर लाेग अब उन्हें पाैधे वाले बाउजी के नाम से पुकारने लगे हैं।
ट्री-गार्ड चोरी होने से परेशानी
झंवर ने बताया कि वह जनसहयोग, यूआईटी, नगरपरिषद व स्वंय के खर्च से ट्री-गार्ड जुटाते हैं। कई बार पार्कों व इंदिरा गांधी स्टेडियम से ट्री-गार्ड चोरी हो जाते है। तब उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। बिना ट्री-गार्ड के पौधे भी सुरक्षित नहीं रहते हैं।
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