राज्य उपभोक्ता आयोग की सर्किट बैंच, बीकानेर ने संतान की चाह में कराई गई जांच के दौरान लापरवाही से विवाहिता की मौत होने के मामले में बीकानेर के प्रताप प्रसूति गृह टोडा हाउस पर 15,21,500 रुपए का हर्जाना लगाया है। वहीं हर्जाना राशि पर 15 जुलाई 2009 से 9 प्रतिशत ब्याज भी देने के लिए कहा है। कार्यवाहक अध्यक्ष कमल कुमार बागड़ी व सदस्य शोभा सिंह की बेंच ने यह आदेश मुकेश कुमार नाहटा के परिवाद पर दिया।
वहीं आयोग ने इस मामले में जिला उपभोक्ता मंच बीकानेर के आदेश को भी रद्द कर दिया। आयोग ने आदेश में कहा कि नर्सिग होम के डॉक्टर्स ने लेप्रोटोमी की स्वीकृति लिए बिना ही उसे कर दिया। जबकि अस्पताल में न तो इस सर्जरी को करने के लिए संसाधन थे और न ही आईसीयू था। तबीयत खराब होने पर मरीज को एडवांस सेंटर में रैफर किया जाना चाहिए था लेकिन वह भी नहीं किया गया। ऐसे में अस्पताल की इलाज में हुई गंभीर लापरवाही से ही प्रार्थी की पत्नी की मौत हुई है। मामले के अनुसार, परिवादी व उसकी पत्नी अनुपमा ने शादी के चार साल तक संतान नहीं होने पर प्रताप प्रसूति गृह में संपर्क किया था।
अस्पताल प्रबंधन ने 14 जुलाई 2007 को परिवादी की पत्नी अनुपमा की लेप्रोस्कोपी की, लेकिन इससे पहले होने वाली जांचे नहीं की गई। जांच के दौरान सही जगह जांच निडल नहीं डालने के चलते अनुपमा के इंजरी हो गई और ऑपरेशन भी कर दिया गया। परिवाद में कहा कि जांच निडल की स्प्रिंग को लापरवाहीपूर्वक पीछे खींचने से नुकीला सिरा आंत तक चला गया और नसें कट गई। जिसके चलते अनुपमा की मौत हो गई।
आयोग ने आदेश में माना की अस्पताल में इलाज के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं थे और गंभीर चिकित्सीय लापरवाही के चलते परिवादी की पत्नी की मौत हुई है। आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद नर्सिंग होम को हर्जाना देने का आदेश सुनाया।
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