स्कूलें खुलने की सुगबुगाहट, बाजार में पहली से 12वीं कक्षा तक की कई किताबें ही नहीं

जिले के करीब दो लाख से अधिक स्टूडेंट्स को इस बार बाजार में पहली से बारहवीं कक्षा की विभिन्न विषयों की किताबों के लिए भटकना पड़ रहा है। मार्केट में इंग्लिश मीडियम की पहली से पांचवीं कक्षा के किसी भी विषय की पुस्तकें नहीं हैं, जबकि छठी से बारहवीं कक्षा की कई पुस्तकें बाजार में मिल भी नहीं रही है। पुस्तक विक्रेताओं ने राजस्थान पाठ्य पुस्तक मंडल की स्थानीय शाखा को इसकी डिमांड गत वर्ष अक्टूबर माह में सशुल्क दे दी थी। एक साल बीतने के बाद भी पुस्तकों के लिए पुस्तक विक्रेताओं को इंतजार करना पड़ रहा है।
हालांकि मंडल ने इस बार अप्रैल में ही स्कूलों तक किताबें पहुंचाने की तैयारी की थी, लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण के कारण परिवहन के साधन बंद होने से किताबें जोधपुर सहित प्रदेश के सभी जिलों के संग्रहण केंद्रों पर नहीं पहुंच पाई। इसके बाद परिवहन व्यवस्था सुचारु भी हो गई और अब आगामी 21 सितंबर से स्कूलें खुलने की सुगबुगाहट भी तेज हो गई है। इसलिए अभिभावक बच्चों के संग पुस्तकें खरीदने बाजार आ रहे हैं, लेकिन उन्हें दुकानों पर किताबें ही नहीं मिलने से निराश होना पड़ रहा है।

नियम : कोर्स बदलने पर नई अन्यथा पुरानी किताबें प्रकाशित करवाकर देते हैं

पहली से पांचवी कक्षा तक के विद्यार्थियों को सभी किताबें नई वितरित की जाती है। यदि कोर्स बदलता है तो कक्षा 6 से 12 वीं तक सभी किताबें नई वितरित की जाती है। यदि पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं होता तो पांचवीं तक के बच्चों को पुरानी किताबें मिलती हैं, जबकि छठी से 12वीं तक विद्यार्थियों को 50 फीसदी किताबें नई दी जाती है, जबकि शेष 50 फीसदी किताबें पुराने विद्यार्थियों से वापस लेकर वितरित की जाती हैं।

मंडल ने प्रिंटिंग करवाई 6 करोड़ पुस्तकें
जोधपुर संभाग पाठ्य पुस्तक एवं स्टेशनरी विक्रेता संघ के जिलाध्यक्ष पिंटू गट्टाणी का कहना है डीईओ कार्यालयों से सरकारी स्कूलों के लिए मिली किताबों की डिमांड और पुस्तक विक्रेताओं से मिली डिमांड के आधार पर पाठ्य पुस्तक मंडल ने इस बार छह करोड़ पुस्तकें प्रकाशित की हैं। इसमें से करीब 4.50 करोड़ किताबें सरकारी स्कूलों में तथा शेष डेढ़ करोड़ करोड़ पुस्तकें पुस्तक विक्रेताओं दी जाएंगी। 6 करोड़ किताबों में से अभी तक 2.44 करोड़ किताबें संग्रहण केंद्रों पर पहुंची हैं। शेष किताबें प्रिंटिंग प्रेस में होने से दिक्कतें आ रही हैं।
ढिलाई पाठ्य पुस्तक मंडल की
प्रदेश में इस बार कक्षा 6 से 9 और 11वीं कक्षा में एनसीईआरटी का सिलेबस लागू किया गया है। इसके तहत स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई भी शुरू हो चुकी है, लेकिन अधिकतर स्टूडेंट्स को बिना किताबों के पढ़ाई करनी पड़ रही है। हालांकि पाठ्य पुस्तक मंडल का दावा है कि किताबें पहुंचाने की हमारी तैयारी पूरी है। स्कूल खुलते ही नए सिलेबस की किताबें विद्यार्थियों के हाथों में होंगी। इस बार कोर्स में बदलाव के कारण जिले में करीब 6 करोड़ किताबें आनी हैं।
इन कक्षाओं की नहीं हैं पुस्तकें

  • पहली से पांचवीं कक्षा अंग्रेजी माध्यम के सभी विषय।
  • छठी कक्षा की सामाजिक विज्ञान।
  • सातवीं कक्षा की गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान प्रथम व द्वितीय।
  • नौंवीं कक्षा की हिंदी परिमल, सामाजिक विज्ञान द्वितीय।
  • दसवीं कक्षा की संस्कृत व संस्कृत सुधा, सांइस, मैथ्स, गुड इंग्लिश।
  • 11वीं कक्षा की अकाउंट्स द्वितीय, भौतिक विज्ञान प्रथम, रसायन विज्ञान प्रथम, होम साइंस द्वितीय तथा कंप्यूटर विज्ञान।
  • बारहवीं कक्षा की बिजनेस स्टडी, फिजिक्स, बायोलॉजी, ड्राइंग, समाजशास्त्र, भौतिक विज्ञान व मनोेविज्ञान।


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The opening of schools, not only many books from 1st to 12th standard in the market


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