मुख्य सचेतक महेश जोशी ने तालकटोरा की जिन कार्यों को लेकर अपनी राय जाहिर की थी, उन कार्यों की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। कार्यकारी एजेंसी आरटीडीसी ने जो दुबारा टेंडर लगाए गए थे, उनकी फाइनेंशियल बिड खोल दी है। इसमें फिर से उसी फर्म खंडेलवाल कंस्ट्रक्शन कंपनी को लोएस्ट दरों पर (28 % से कुछ ज्यादा) चुना गया है। पिछले बार ये दरें करीब 14 लाख और कम आई हैं।
इसके पीछे एक बड़ी वजह लंबे समय का खालीपन है। बहरहाल अब टेंडर कमेटी के पास मामला भेजकर अगले सप्ताह तक वर्कऑर्डर देने की स्थिति आएगी। इसके बाद मध्य जनवरी तक काम शुरू होने की उम्मीद है। जानकारी हो कि स्मार्ट सिटी की 18.18 करोड़ की फंडिंग से पहली बार तालकटोरा के विकास कार्य होंगे।
शहर के बीचोंबीच बनी इस वाटर बॉडी के दिन फिरने से लोकल टूरिज्म को बल मिलेगा। खासकर गोविंद देव मंदिर जाने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए यह बड़ी सौगात रहेगी। अब आरटीडीसी के लिए जल्द काम शुरू करा, गुणवत्तापूर्वक इसे समय रहते पूरे कराने का चैलेंज है।
जोशी ने सचिव को पत्र लिख शर्तें सुझाई थीं
टेंडर को लेकर मुख्य सचेतक और विधायक महेश जोशी ने सचिव भवानी सिंह देथा को पत्र लिखा था। इसमें कहा कि गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि शर्तें ऐसी हों, जिनमें अच्छे कार्य करने वाली फर्में आ सकें। इसके लिए उन्होंने टेंडर में दो शर्त के तौर पर 900 एमएम का आरसीसी ज्वाइंट पाइप वर्क और मलबा निकालने का अनुभव वाली फर्म को प्राथमिकता देने को कहा। भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा कि विभाग को उनके हिसाब से प्रक्रिया तय करनी है, मेरा मकसद कोई दबाव नहीं होकर केवल गुणवत्ता का है।
छह फीट तक मलबा भरा, लाइटिंग-फाउंटेन लगेंगे
अब तक के सर्वे में लेक में बरसों से मलबे की कई परत जम चुकी है। प्लानिंग मुताबिक 400 क्यूबिक मीटर मलबा निकालना है। यानी करीब 2 से 6 फीट तक। साथ ही खूबसूरती के लिए रुके हुए पानी में तैरने वाले आकर्षक लाइटिंग युक्त फ्लोटिंग फाउंटेन लगेंगे। पूरी लेक का संरक्षण और रीस्टोरेशन के साथ आईलैंड की खूबसूरती और रेलिंग, बैचेज आदि काम होंगे। इसके अलावा लेक की ओर झांकते 52 निजी मकानों के फसाड़ को एकरूप दिया जाना है। यहां से लेक में गिरने वाले सीवरेज, वेस्टेज को रोकना व बादल महल की खूबसूरती को निखारना भी है।
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