हाईकोर्ट ने पिछले साल के मुकाबले शराब व बीयर की बिक्री दस फीसदी नहीं बढ़ाने पर शराब कारोबारियों पर जुर्माना लगाने के प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। वहीं अदालत ने स्पष्ट किया कि कारोबारी लाइसेंस की शर्तों काे मानने के लिए बाध्य हैं और कुछ बाध्यताएं नहीं लगाई गई तो इससे शराब का अवैध कारोबार बढ़ सकता है।
जस्टिस पंकज भंडारी व एमके व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश सतवीर व अन्य की याचिकाओं पर दिया। अदालत ने कहा कि प्रार्थियों ने याचिकाओं में तथ्यों को भी छिपाया है। याचिकाओं में कहा था कि आबकारी नीति-2020 में प्रावधान किया कि दुकान संचालक को पिछले साल के मुकाबले दस फीसदी अधिक शराब व बीयर बेचनी है। यदि वह विभाग से तय मात्रा में शराब नहीं लेता तो उस पर प्रति लीटर जुर्माना वसूला जाएगा।
इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि शराब का कारोबार व्यापक पाबंदियों यानि बिक्री का निर्धारित समय, सूखा दिवस और विज्ञापन पर पाबंदी होती है। वहीं जुर्माने का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 47 के विपरीत भी है। वहीं राज्य सरकार ने जवाब में कहा कि लाइसेंसधारक उसकी शर्तों को मानने के लिए बाध्य हैं। इसके अलावा आबकारी नीति के प्रावधान को हाईकोर्ट की बजाय सक्षम प्राधिकारी अधिकारी के यहां अपील में चुनौती दी जा सकती है। इसलिए याचिकाएं खारिज की जाएं।
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