चरणवार मतदान के साथ ही गांवों से गायब होते जा रहे हैं कई प्रमुख उम्मीदवार

पंचायत चुनाव की प्रक्रिया और प्रचार जारी रहने के समानांतर ही गांवों से प्रत्याशियों के गायब होने का सिलसिला भी चल रहा है। वैसे तो मतदान पूरा होने के साथ ही अपने उम्मीदवारों की बाडाबंदी नई बात नहीं है पर इस बार के चुनाव कार्यक्रम ने इस मामले में भी नया और रोचक अंकगणित ला दिया। जिन उम्मीदवारों को प्रचार के लिए सबसे कम दिन मिला, वे सबसे अधिक दिन की बाडाबंदी में चले गए। वहीं जिनको प्रचार में सबसे अधिक दिन मिल रहे, वे सबसे कम दिन के लिए सियासी कैद में रहेंगे।


जिले में अब तक तीन चरण में 8 पंचायत समिति क्षेत्रों में मतदान हो चुका है। कुल 173 में से 120 पंस सदस्य और 25 में से 16 जिप सदस्यों के लिए वोटिंग पूरी हो गई। जहां जिस दिन मतदान था, दोनों सियासी दलों के कर्ताधर्ताओं ने विश्वसनीय लोगों को दिनभर अपने उम्मीदवारों के आगे पीछे लगा रखा था। जैसे ही शाम 5 बजे मतदान पूरा हुआ, वैसे ही उनको गाडियों में बिठाकर ले जाने का सिलसिला शुरू हो गया। खासकर पंस प्रत्याशियों की बाडाबंदी तेजी से शुरू हुई। किसको ले जाना है, किनको अभी नहीं लेना है, उठाते ही कहां आना है और फिर किस रुट पर कब कहां तक जाना है। आदि सब कुछ फिक्स था। जिम्मेदार पदाधिकारी या कार्यकर्ता, वृद्व, बीमार या पारिवारिक कार्यक्रम वाले प्रत्याशी को ले जाने में जल्दबाजी नहीं की गई।


क्योंकि मतदान अलग अलग दिन लेकिन नामांकन प्रक्रिया और जिला प्रमुख-प्रधान चुनाव एक ही साथ: राज्य चुनाव आयोग ने मतदान तो चार चरणों में रखा पर सभी की नामांकन प्रक्रिया एक साथ रखी। जिप व पंस उम्मीदवारों के लिए11 नवंबर को नाम वापसी और चुनाव चिन्ह आबंटन के साथ ही एक तरह से कैंपेन शुरू हो गया था। सभी के नतीजे 8 दिसंबर को आ जाएंगे लेकिन प्रधान-जिला प्रमुख का चुनाव 10 और उप प्रधान-उप जिला प्रमुख चुनाव 11 दिसंबर को होना है। राजनीतिक दलो का पूरा जोर अपना बोर्ड बनाने पर ही है, ऐसे में वे प्रत्याशियों खासकर जितने वालों को 11 दिसंबर तक सुरक्षित रखना चाहेंगे। बाडाबंदी का पूरा तामझाम इसी हिसाब से बिठा रखा है।

कांग्रेस-भाजपा की अंतराक्षी... बैठे-बैठे क्या करें, करे न कुछ काम, शुरू करें अंतराक्षी, ले हरी (नेता) का नाम

दोनों पार्टियों ने 23नवंबर को मतदान के बाद ही अपने पंस प्रत्याक्षियों को अज्ञातवास पर भेज दिया। जहां वे खाली समय में धूप सेवन करते हुए अंतराक्षी, गीत-भजन, भ्रमण- दर्शन आदि से समय पास कर रहे हैं। दैनिक भास्कर के पास दोनों खेमों के ऐसे ही अन्तराक्षी करते हुए फोटो हैं। भाजपा के दोनों मंडल अध्यक्ष शंभूलाल जाट व छोगालाल गाडरी, महामंत्री दिनेश पराशर समेत सभी 15 प्रत्याशी एकसाथ हैं। कांग्रेस में पूर्व प्रधान भैरुलाल चौधरी सहित दो-तीन को छोड़कर सभी प्रत्याशी एकसाथ हैं। हालांकि चौधरी ही अगुवाई करते हुए प्रत्याशियों के बीच आ जा रहे हैं।

कहां है अज्ञातवास... कोटा, पुष्कर, मप्र से लेकर उदयपुर, कुंभलगढ़ और गुजरात-हरियाणा तक: बेगूं-रावतभाटा क्षेत्र के भाजपा प्रत्याशी कोटा और मप्र की ओर है। कपासन, राशमी, भूपालसागर, भदेसर, बड़ीसादड़ी, डूंगला क्षेत्रों के दोनों दल अपने प्रत्याशियों को उदयपुर, नाथद्वारा, कुंभलगढ़, पुष्कर आदि क्षेत्रों में ले गए। कोरोनाकाल के कारण फिलहाल जिले या संभाग के आसपास में ही रिसोर्ट बुक किए। आगामी दिनों में कुछ नेता अपने प्रत्याशियों को गुजरात व हरियाणा तक भी ले जा सकते हैं।

भाजपा: जिप के उम्मीदवार अभी पंसवार बंटे हुए हैं, 5 को सभी 25 की कनेक्टिविटी एक साथ होगी
भाजपा मतदान हो चुके क्षेत्रों में पंस व जिप दोनों उम्मीदवारों को एक साथ अज्ञातवास में लेती जा रही है। इन क्षेत्रों के पूर्व विधायक सुरेश धाकड़ और भाजयुमो जिलाध्यक्ष हर्षवर्धनसिंह सहित तीन-चार को छोड़कर उसके अधिकांश जिप प्रत्याशी भी बाडाबंदी में है। वे पंस उम्मीदवारों के साथ अलग अलग कैंपों में है पर 4 दिसंबर को सभी जिप प्रत्याशियों को एक साथ एक अलग कैंप में ले लेंगे। अंतिम चरण में 5 को मतदान पूरा होते ही शेष 9 प्रत्याशी भी इनके बीच पहुंच जाएंगे। इसके बाद प्रमुख-उपप्रमुख चुनाव तक ये सभी जिला चुनाव प्रभारी दामोदर अग्रवाल व जिलाध्यक्ष गौतम दक सहित सीधे संगठन की निगरानी में रहेंगे। प्रदेश और संगठन स्तर पर मुख्य फोकस जिप बोर्ड बनाने पर है।


कांग्रेस: विस व पंसवार बड़े नेता ही देख रहे अपने क्षेत्रों का पूरा इंतजाम, उम्मीदवारों पर नजर
कांग्रेस में फिलहाल झुलाया प्रदेश तक की निगरानी की बजाए विसवार या पंसवार नेता ही अपने उम्मीदवारों पर निगाह रखे हुए हैं। बाडाबंदी का जिम्मा भी वे अपने स्तर पर उठाए हुए है। उनका फिलहाल मुख्य फोकस अपनी पंस में बोर्ड बनाने पर है। इसके लिए जिताऊ निर्दलीयों से भी पूरे संपर्क में हैं। हालांकि ये नेता अपने इलाके के जिप वार्डों की स्थिति और प्रत्याशियों पर भी नजर रखे हुए हैं ताकि बोर्ड बनने की स्थिति में अपना रोल अदा कर सके। पंचायत चुनाव अभियान के दौरान ही कांग्रेस के प्रदेश पर्यवेक्षक धर्मेंद्रसिंह, मंत्री उदयलाल आंजना व अंतरिम जिलाध्यक्ष मांगीलाल धाकड़ तक को कोरोना या बीमारी के कारण मैदान छोड़ना पड़ गया था। हालांकि आंजना अब आखिरी चरण के प्रचार में लौट आए हैं।



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Many leading candidates are disappearing from villages with phase wise voting


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