(ओमप्रकाश शर्मा). नगर निगम में बिल पास करवाना है तो कोरोना पॉजिटिव होना जरूरी है...जी, हां। निगम में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। लंबे समय से अटके पैसों का भुगतान नहीं किया जा रहा था तो ठेकेदार ने प्रार्थना पत्र लगाया कि उनका बेटा कोरोना संक्रमित हो गया है और इलाज के लिए पैसों की जरूरत है। इसलिए, बकाया भुगतान दिलाया जाए। निगम के अफसरों पर इसका असर भी दिखा और अटकी फाइल टेबल दर टेबल दौड़ने लगी। खंजाची तक पहुंचते ही फाइल फिर अटक गई।
मैसर्स लक्ष्मी इलेक्ट्रिकल्स एण्ड डेकोरेटर्स फर्म के 2.64 करोड़ रुपए के बिल बकाया हैं। संचालक के बेटे के कोरोना पॉजिटिव आने के बाद निगम के अधिकारियों ने 17 दिसंबर काे बिलाें का भुगतान करने की मंजूरी दी थी और फाइल लेखा शाखा में भेज दी थी, लेकिन तब से लेखा शाखा के अधिकारियों ने फाइल को दबा रखा है। नगर निगम के करीब एक हजार ठेकेदार हैं, जो सीवरेज, सिविल, उद्यान, कचरा संग्रहण, लाइट मेंटिनेंस समेत अन्य काम करते है। जिनके करीब नगर निगम में 300 करोड़ रुपए बकाया चल रहे हैं। ग्रेटर नगर निगम की आर्थिक स्थिति फिलहाल खराब चल रही है। वहीं हैरिटेज नगर निगम में हाल ही में सरकार ने बजट दिया है।
कैशियर तो मजबूर हैं
^नोटशीट आ गई थी। भुगतान नहीं करने के पीछे मेरी मजबूरी समझो। मैं कल अफसरों से बात करता हूं और फिर भुगतान करा देंगे।
-अनिल चौहान, कैशियर, नगर निगम
एओ के पास चार्ज ही नहीं
^पता है, पर मुझे अभी चार्ज नहीं दिया है। एफए के रिलीव होने के बाद मेरी जिम्मेदारी। कैशियर ने भुगतान क्यों रोका, पता नहीं।
-अनिल शर्मा, सीनियर एओ नगर निगम
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