एमजी हाॅस्पिटल में अब मशीनाें से कपड़ाें की धुलाई हाेगी, इससे संक्रमण का खतरा नहीं रहेेगा। एमजी हाॅस्पिटल के वार्डाें में मरीजाें के काम आने वाले चद्दर, बेडसीट धाेने का काम हाथाें से हाेता था। इससे संक्रमण का खतरा रहता था। एमजी हाॅस्पिटल के महिला एवं बाल चिकित्सा इकाई के पीछे 46 लाख रुपए की लागत से मैकेनिकल लॉन्ड्री तैयारी की गई है। यहां धुलाई की अत्याधुनिक मशीनें हैं जिनमें धुलाई के साथ कपड़े सुखाए भी जा सकते हैं। बारिश व सर्दी के माैसम में हाॅस्पिटल के गंदे चद्दर व बेडशीट काे सुखाने में समय लगता था।
हाॅस्पिटल में हर दिन सैकड़ों बेडशीट व चद्दर धोने के लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से ठेका दिया जाता है। इसके बावजूद बरसात के मौसम में दो-दो दिन तक कपड़े नहीं सूखने से मरीजों व अस्पताल प्रबंधन को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अब मैकेनाइज्ड लांड्री से समय पर कपड़ों की धुलाई के चलते मरीजों व उनके परिजनाें को काफी राहत मिलेगी। पीएमओ डाॅ. अरूण गाैड़ ने बताया कि ये मशीनें जिला स्वाथ्य समिति की ओर दी गई हैं। जिसे में जिला कलेक्टर शिवप्रसाद एम नकाते ने स्वीकृत करवाई है।
एक घंटे में धुल सकेंगे 60 किलाे तक कपड़े
हाॅस्पिटल में लगी अत्याधुनिक मशीन से एक घंटे में 60 किलाे तक कपड़ाें की धुलाई की जा सकेगी। यहां पर तीन तरह की मशीनें लगी हैं। जिनमें धुलाई करने की, कपड़ाें काे सुखाने व कपड़ाें पर इस्त्री करने की मशीनें हैं। अब तक यहां पर हर साल 10 से 12 लाख रुपए कपड़ाें की धुलाई पर खर्च हाेते थे, अब वाे नहीं हाेंगे। साथ ही एमजी हाॅस्पिटल परिसर में सीएमएचओ ऑफिस के पास ही अस्पताल के संक्रमित कपड़ाें की धुलाई हाेती थी, यहां पर ही कपड़े सुखाने के दाैरान कई बार कुत्ते सहित अन्य जानवराें के कारण संक्रमण का डर रहता था। अब मशीन से कपड़े धुलवाए व सुखाए जाएंगे।
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