सरकारी स्कूलों में पोषाहार पकाने वाली कुक कम हेल्पर को अपने घर में चूल्हा जलाना हुआ मुश्किल

सरकारी स्कूलों में मिड डे मील योजना के तहत कार्यरत कुक कम हेल्पर को पिछले नौ माह से मानदेय नहीं दिया गया है। जिससे सरकारी स्कूलों में बच्चों को पोषाहार पकाने वाली महिलाओं के घर में आर्थिक तंगी की वजह से चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया है। लाॅकडाउन के बाद से ही सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों को बच्चों के लिए बंद कर दिया गया। तब से बच्चों के लिए बंद हुए स्कूलों के ताले अभी तक नहीं खुले हैं। इस दौरान बच्चों के लिए स्कूलों में पोषाहार पकाया नहीं गया है।

जिससे कुक कम हैल्पर को भी मानदेय नहीं दिया गया है। सरकार द्वारा कुक कम हैल्पर को बहुत ही कम राशि मानदेय के रूप में दी जाती थी। इसमें इन महिलाओं का घर खर्च मुश्किल से चल पाता था, लेकिन पिछले नौ माह से सरकार कुक कम हैल्पर के मानदेय के प्रति ध्यान नहीं दे रही है। इससे रूपवास ब्लाक के सरकारी स्कूलों में कार्यरत 392 कुक कम हैल्पर महिलाओं के परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहे है।

रूपवास के 190 स्कूलों में पकता है पोषाहार
रूपवास ब्लाक के 190 सरकारी स्कूलों में विभाग द्वारा तय मेन्यू के आधार पर पोषाहार पकाया जाता है। ब्लाक के 190 सरकारी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च माध्यमिक, संस्कृत स्कूल एवं पंजीकृत मदरसा में पोषाहार पकाया जाता है, जिनमें 392 कुक कम हैल्पर महिलाएं कार्यरत है, जो ज्यादातर गरीब, विधवाएं है।

अप्रैल से 1320 रुपए प्रतिमाह का मानदेय अटका
सरकारी स्कूलों में बच्चों को पोषाहार पकाने वाली कुक कम हैल्पर महिलाओं को सरकार द्वारा मानदेय के रूप में 1320 रुपए प्रतिमाह दिया जाता है। पिछले नौ माह से तो यह मानदेय राशि भी कुक कम हैल्पर को नहीं दी गई है। सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में मीड डे मील योजना के तहत 50 बच्चों पर एक एवं 150 पर दो कुक कम हैल्पर महिलाओं को लगाया जाता है। लाॅकडाउन के बाद से मानदेय नहीं मिलने के कारण कुक कम हैल्पर महिलाएं परेशान है।

^कुक कम हैल्पर को अप्रैल माह से मानदेय भुगतान नहीं आया है। उनके मानदेय संबंधी भुगतान के बारे में सरकार स्तर से कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले है। वैसे उनको मानदेय का भुगतान मिलेगा। नृपतसिंह गुर्जर, सीबीईओ रूपवास



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फाइल फोटो


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