सांचू पहुंचा आईएएस अफसरों का दल, पाक की रनिहाल पाेस्ट भी देखी

बीकानेर से सटी भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पर्यटकों की चहल-पहल शुरू हो गई है। फर्स्ट विजिटर के रूप में रविवार काे प्रशासनिक अधिकारी सपरिवार सांचू पहुंचे। दूरबीन से सीमा पार पाकिस्तान की रनिहाल पाेस्ट देखी, जिसे भारतीय सेना ने 1971 में कैप्चर किया था।

आईएएस कनिष्क कटारिया, सांवर वर्मा और रिटायर्ड अतिरिक्त मुख्य सचिव जेसी मोहंती ने परिवार सहित रविवार का दिन सांचू पाेस्ट पर बिताया। बीएसएफ बीकानेर सेक्टर के डीआईजी पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने सांचू के सामरिक महत्व की जानकारी दी। बताया कि इस पाेस्ट पर 1965 और 1971 का युद्ध लड़ा गया था। तब आर्मी के साथ बीएसएफ ने भी दुश्मनों को खदेड़ा था। पर्यटकों काे भारत-पाक सीमा रेखा की जानकारी दी।

बॉर्डर टूरिज्म

बीकानेर से सटी भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बॉर्डर टूरिज्म का आगाज हो चुका है। बीएसएफ की सांचू पाेस्ट काे इसके लिए विकसित किया जा रहा है। पिछले दिनाें बीएसएफ ने वहां एक आयोजन भी किया था, जिसमें युद्धवीरों काे परिवार सहित पाेस्ट का भ्रमण कराया था। रविवार काे पहली बार वहां पर्यटकों का दल पहुंचा।
^यह सुखद संकेत है कि पहले पर्यटक के रूप में आईएएस आफिसर्स ने सांचू का भ्रमण किया। अधिकारी और उनके परिवार पाेस्ट और बाॅर्डर देख रोमांचित हुए। उन्होंने पोस्ट को आधुनिक ताैर पर विकसित करने का सुझाव भी दिया।
पुष्पेन्द्र सिंह राठाैड़, डीआईजी



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Sanchi's team of IAS officers arrived, also saw Pakistan's Ranihal past


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