पहले कोटा में कोरोना महामारी का मामला तूल पकड़ा तो कोविद हॉस्पिटल में लगा दिया, अब जेकेलोन का मुद्दा उठा तो कोविद से हटाकर जेकेलोन में लगा दिया, कुछ ऐसी ही खानाबदोश तरीके से ड्यूटियां कर रहे हैं, ग्रामीण क्षेत्रों के वे नर्सिंगकर्मी, जिन्हें कोविड के नाम पर गांवों में पीएचसी-सीएचसी से हटाकर कोटा लगाया गया था।
असल में सितंबर में कोटा में एक साथ मरीज बढ़े तो सरकार हिली। जयपुर में सीएम के स्तर पर बैठक ली गई और आनन-फानन में कोटा ग्रामीण सहित बूंदी, बारां व झालावाड़ से 50 नर्सिंगकर्मी व 10 लैब टेक्नीशियन को 25 सितंबर को कोटा के नए अस्पताल (कोविड) में लगा दिया गया। इन्होंने वहां आकर ड्यूटियां ज्वॉइन कर ली। अब कोविड के मरीज कम हो चुके हैं, ऐसे में उन्हें रिलीव करने की तैयारी थी। लेकिन इसी बीच कोटा में जेकेलोन अस्पताल में नवजात बच्चों की मौत का मुद्दा उठा तो इन 50 में से 34 नर्सिंगकर्मियों को जेकेलोन हॉस्पिटल में लगा दिया।
अब इन नर्सिंगकर्मियों का कहना है कि इस तरह तो कोटा में रोजाना अलग-अलग तरह के मुद्दे आते रहेंगे और उनकी ड्यूटियां बदलती रहेगी। जबकि उनके मूल पदस्थापन वाले स्वास्थ्य केंद्रों पर अब व्यवस्थाएं प्रभावित होने लगी हैं। प्रदेश के जयपुर व अजमेर में भी इसी तरह से आसपास के जिलों से स्टाफ लगाया गया था, जिसे रिलीव किया जा चुका है। लेकिन कोटा में रिलीव करने की बजाय जेकेलोन में लगा दिया।
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