केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के बुलाए भारत बंद का असर ज्यादा नहीं दिखा

केंद्र सरकार के तीन कृषि सुधार कानूनों के विरोध में मंगलवार को बुलाए गए भारत बंद का जोधपुर जिले में कोई असर नहीं दिखा। सभी गांव कस्बों में बाजार खुला रहा। शांतिपूर्ण बेअसर बंद से पुलिस व प्रशासन राहत की सांस ली। कांग्रेस के विभिन्न संगठनों ने कहीं टायर जलाकर प्रदर्शन, सद्बुद्धि यज्ञ व बाजार बंद करवाकर प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के नाम उपखंड व अन्य अधिकारियों को ज्ञापन दिए।

ओसियां कस्बे सहित ग्रामीण क्षेत्र में कोई असर देखने को नहीं मिला। मंगलवार को प्रातः हमेशा की तरह ओसियां कस्बे के तहसील रोड, सदर बाजार, न्यू बस स्टैंड, पुराना बस स्टैंड, चाडी चौराया, कबूतरों का चौक आदि बाजार दिन भर खुले रहे। पीपाड़ में भी बंद बेअसर रहा। रोज की भांति सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान खुले रहे। नगर पालिका चुनाव को लेकर दोनों पार्टियां वोट समीकरण के बिगड़ते बंद से दूरी बनाए रखी।

ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष इस्माईल खान सिंधी ने उपखंड अधिकारी शैतानसिंह राजपुरोहित को राष्ट्रपति के नाम बिल को वापस लेने का ज्ञापन सौंपा। बाप में भी हमेशा की भांति समय पर दुकानें खुली। बंद को लेकर कोई संगठन आगे नहीं आया। बावड़ी में कई गांव समर्थन में तो कई गांवों में बंद बेअसर रहा। निवर्तमान प्रधान अलाराम मेघवाल के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बंद का आह्वान किया।

सोयला, खेड़ापा के बाजार बंद रहे तो बावड़ी में बेअसर रहा। तिंवरी में कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष बंशीलाल कच्छवाह, तिंवरी सरपंच अचलसिंह गहलोत, यूथ कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष सांवर , बड़ला बासनी सरपंच प्रतिनिधि जितेंद्र सिंह,गगाड़ी सरपंच प्रतिनिधि भेराराम पालीवाल, शिव नगर सरपंच पुरखाराम भूंकर, पूर्व सरपंच कालूराम टाक, घेवड़ा सरपंच केवलराम मेघवाल, चण्डालिया सरपंच प्रतिनिधि मांगीलाल बैरड़ सहित बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध जताया। बालेसर में यूथ कांग्रेस शेरगढ़ विधानसभा अध्यक्ष पारस सांखला के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपा। देचू में बंद को लेकर व्यापारियों व कांग्रेस ने समर्थन दिया।

कुछ देर के लिए बाजार बंद रहे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अगरसिंह राठौड़, ब्लॉक अध्यक्ष शकूर खान , मोहम्मद शरीफ खिलजी ने बताया कि केंद्र सरकार को किसानों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। भोपालगढ़ में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष राजेश जाखड़, एनएसयूआई के राष्ट्रीय संयोजक व रजलानी सरपंच पारस गुर्जर, शिवकरण सैनी व अन्य नेताओं ने पीएम का पुतला फूंका।

फलोदी में भारत बंद के आह्वान पर अखिल भारतीय किसान सभा, स्टूडेंट्स फैडरेशन ऑफ इंडिया, सीटू, डीवाईएफआई, जनवादी नौजवान सभा एवं विभिन्न जन संगठनों द्वारा रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया गया। उपखंड कार्यालय के सामने प्रधानमंत्री का पुतला फूंका एवं केन्द्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष जताया गया। एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।

बाप ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में हाइवे पर ट्रैक्टर खड़े कर जाम लगाया। 20 मिनट तक सांकेतिक प्रदर्शन चला। प्रवक्ता पहाड़ सिंह रावरा, मनोज पुरोहित, नंदकिशोर तंवर सहित कई किसान उपस्थित थे। पुलिस भी मौके पर पहुंची।
लोहावट: कांग्रेस ने बंद कराए बाजार
लोहावट में कांग्रेस व व अन्य संगठनों ने बंद को समर्थन दिया। एक घंटे के लिए बंद कराई गई। काग्रेंस युवा नेता जगदीश सियाग,ओमप्रकाश राव, यूथ कांग्रेस के महासचिव जेताराम जगुवाणी, व्यापार संघ अध्यक्ष इन्द्रप्रकाश राठी आदि ने एसडीएम को ज्ञापन दिया।
भीकमकोर : आरएलपी-किसान यूनियन ने प्रतियां जलाई
आएलपी व भारतीय किसान श्रमिक जनशक्ति यूनियन ने कानून की प्रतियां जलाई। दोपहर 3 बजे तक बंद रखा गया। यूनियन के जिला सचिव सोहन पूनियां, तहसील अध्यक्ष भीखाराम पूनियां व भैराराम भाखर, स्वरुपराम ने कहा कि 12 को दिल्ली कूच करेंगे।

आऊ: किसानों व कांग्रेस कार्यकर्ताओं का धरना
आऊ मार्केट पर भारत बंद का असर नहीं रहा। गांवों से कई किसान व कांग्रेस कार्यकर्ता मुख्यालय पर पहुंचे। सरपंच दिनेश मेघवाल, गोरछियां का बेरा सरपंच बाबूलाल चौधरी, सारणपुरा सरपंच नारायण सिंह, किसान बद्रीराम सारण ने ज्ञापन दिए।

मथानिया: थोड़ी देर के लिए दुकानें बंद की
मथानिया में भारत बंद के आह्वान पर में मिला जुला असर दिखा। दुकानें दो तीन घण्टे के लिए बन्द की गई। बन्द के दौरान कस्बे में पूर्ण रूप से शांति रही। कस्बे में मेडिकल स्टोर , पेट्रोल पंप व एमरजेंसी सेवाएं पूर्ण रूप से खुली रही।

श्रीलक्ष्मणनगर : पूनासर में आंदोलन का असर
श्रीलक्ष्मणनगर. पूनासर में मंगलवार को किसान आंदोलन के लिए भारत बंद का पूर्ण रूप से समर्थन किया गया। इस अवसर पर गांव के किसान गिरधारीराम कंस्वा ,भगवान जाणी,चेतनराम सियाग सहित कई किसानों व व्यापारियों ने बाजार बंद रखा।



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The effect of the Bharat Bandh called by the farmers against the three agricultural laws of the central government did not show much.


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