राजस्थान यूनिवर्सिटी ग्रेजुएशन फर्स्ट ईयर के छात्रों को कोरोना की वजह से प्रमोट करने का सर्टिफिकेट देने पर अड़ी है। जिसके विरोध में छात्र संघटन भी उतर आए हैं। मामला प्रमोट हुए करीब ढाई लाख छात्रों से जुड़ा है।
इस संबंध में पूर्व मंत्री एवं विधायक कालीचरण सराफ ने राजस्थान यूनिवर्सिटी द्वारा अगली कक्षा में प्रमोट किए जा रहे छात्रों के सर्टिफिकेट पर कोरोना की मुहर लगाने के निर्णय पर आपत्ति जताते हुए बिना मुहर लगाए छात्रों को प्रमोट करने की मांग की है।
सराफ ने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना के कारण प्रमोट किया जा रहा है इसमें छात्रों की कोई गलती नहीं है ऐसे में यदि उनके सर्टिफिकेट पर कोरोना के कारण प्रमोट की मुहर लगाई जाएगी तो उनके एकेडमिक रिकॉर्ड पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है तथा नौकरियों में चयन के समय उनके साथ भेदभाव की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
एबीवीपी के प्रदेश मंत्री होशियार मीणा ने कहा कि सर्टिफिकेट में कोरोना लिखकर राजस्थान सरकार युवाओं के साथ में धोखा कर रही है। मार्कशीट के अंदर अंको का प्रावधान हो। पिछली कक्षाओं के अंकों का औसत निकालकर नंम्बर दिए जा सकते हैं। सर्टिफिकेट में अगर अंको की जगह कोविड-19 लिखा हुआ होगा तो यह राजस्थान के प्रत्येक छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा। अगर सरकार ने छात्रों की मांग नहीं मानी तो हम बड़ा प्रदर्शन करेंगे।
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