वसूलते हैं मनमाना ब्याज, रकम नहीं देने पर धमकाते भी हैं

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि अगर डिजिटल प्लेटफॉर्म या मोबाइल एप के जरिए लोन के लिए अप्लाई कर रहे हैं, तो सावधान हो जाएं। इसके जरिए न सिर्फ आपके डॉक्यूमेंट्स के साथ फर्जीवाड़ा किया जा सकता है, बल्कि ऊंची ब्याज दरों पर लोन दिया जाता है। इसके अलावा रिकवरी का तरीका भी गलत होता है। आरबीआई ने ऐसे मोबाइल एप और डिजिटल प्लेटफॉर्म से अनाधिकृत ऋण लेने से बचने को कहा है, जो तुरंत और बिना कागजात के पैसे देने का वादा करते हैं।

आरबीआई की इस चेतावनी के बाद दैनिक भास्कर के एक्सपर्ट पैनल में ऐसे एप्स पर पड़ताल की, ताे ज्यादातर बातें सही साबित हुईं। कोरोना का फायदा उठाकर फर्जी लोन एप्स धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं। जल्द कर्ज पाने के लिए लोग इन एप्स पर आधार कार्ड नंबर, पैन, बैंक खाता आदि निजी जानकरी साझा कर रहे हैं। बाद में ये एप्स उन जानकारी के जरिये फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहे हैं। इस स्पेशल रिपाेर्ट में पढ़ें लाेन देने वाले ऐसे एप्स के बारे में वाे सबकुछ जाे आपके लिए जानना जरूरी है-
^एप संबंधी लोन के कई मामले मेरी जानकारी में भी आए हैं, लेकिन किसी ने लिखित शिकायत नहीं दी। लोन नहीं देने पर बेवजह दबाव बनाना कानूनन गलत है। ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई हो सकती है। ऐसे मामलों से निपटने के लिए साइबर सेल टीम तैयार कर रहे हैं।
-प्रफुल्ल कुमार, आईजी
BHASKAR EXPLAINER } सरकार की मंजूरी के बिना चल रहे हैं ज्यादातर एप्स इसलिए सावधानी जरूरी
इन 5 तरीकों से सही व गलत एप्स को पहचानें

1. सिबिल स्कोर को लेकर गंभीर नहीं : आप कर्ज लेने के लिए लोन एप्स से संपर्क करते हैं और वह आपके सिबिल स्कोर को लेकर गंभीर नहीं तो यह खतरे का संकेत है। कोई भी सही एप सबसे पहले आपके कर्ज और बिल भुगतान की आदत को सिबिल स्कोर से चेक करता है। ऐसा जो नहीं कर रहा है उससे आप कर्ज लेने का फैसला नहीं करें।
2. समय सीमा के अंदर आवेदन करने का दबाव : अगर लोन एप आप पर तय समय सीमा के अंदर लोन के लिए आवेदन करने का दबाब बनाता है तो यह सही नहीं है। लोन की जरूरत आपको है तो आप अपनी जरूरत के अनुसार आवेदन करेंगे। अगर कोई एप इस तरह का दबाब बनाए तो खतरे को भांप लें और उससे लोन न लें।

3. ऋणदाता का कोई भौतिक पता नहीं : किसी भी एप से कर्ज लेने से पहले यह जानकारी जरूर जुटा लें कि उसकी मालिकाना हक वाली कंपनी का कोई भैतिक पता है या नहीं। अगर, आपको कंपनी की वेबसाइट पर उसका कोई भौतिक पता नहीं दिखता है तो आप उससे लोन लेने के फैसले को बदल दें।
4. कंपनी की वेबसाइट सुरक्षित नहीं : वेबसाइट पर एप सुरक्षित नहीं दिखता है या किसी बड़ी कंपनी की वेबसाइट का कॉपी लगता तो समझ लें कि यह लोन की आड़ में फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए किया गया है।
5. शुल्क की जानकारी नहीं: अगर आपका ऋणदाता आवेदन, मूल्यांकन या क्रेडिट रिपोर्ट शुल्क के विस्तृत विवरण का खुलासा नहीं कर रहा है, तो उस एप से लोन लेने का फैसला तुरंत खत्म कर दें।

लोन पर लेते हैं 24 फीसदी तक ब्याज

  • मार्केट में मौजूद कई मोबाइल एप लोन पांच सौ से लेकर 15 लाख तक का लोन दे रहे हैं।
  • लोन लेने के लिए केवल आधार और पेन कार्ड अपलोड करना होता है।
  • आधार और बैंक से जुड़ा हुआ एक मोबाइल नंबर देना होता है।
  • वे 12 से 24 प्रतिशत तक ब्याज दर लेते हैं।
  • किस्त काटने के लिए लोन को बैंक अकाउंट से जोड़ दिया जाता है।
  • ये लोन 15 दिनों से लेकर पांच साल की अवधि के लिए दिया जाता है।
  • लोन की लिमिट, अवधि और ब्याज सब कंपनी और एप के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।
  • कई एप पर नहीं है आरबीआई का कंट्रोल।
  • एप डाउनलोड करते समय इन बातों का रखें ध्यान
  • एप के टर्म एंड कंडीशन को पूरा पढ़कर इसकी इजाजत दें।
  • आरबीआई की गाइडलाइन में आने वाली कंपनी को लोन के लिए चुने।
  • एप में अपनी डेट ऑफ बर्थ, सीवीसी और एटीएम पिन कभी न दें।
  • लोन के ब्याज दर और नियम की अच्छे से जानकारी लें।

इन उदाहरणों से समझें ऐसे एप्स का फर्जीवाड़ा

बिना पूछे बना देते हैं गारंटर, फिर देते हैं धमकी

कोटगेट थाने पर नोडल ऑफिस में बीकानेर के एक व्यक्ति ने शिकायत दी है कि उसके पड़ोसी ने एप के जरिए लोन लिया। एक दिन उसके पास एजेंट का फोन आया जिसने लोन नहीं चुकाने पर धमकी दी। कहा कि वह गारंटर है, इसलिए उस पर भी कार्रवाई होगी। यानी संबंधित व्यक्ति से बात किए बिना ही उसे गारंटर बना दिया।

ऐसी ही शिकायत आई। लोन का पैसा चुकाने के लिए बैंक से फोन आया तब युवक को पता चला कि मोहल्ले के एक व्यक्ति ने उसे गारंटर बनवा दिया। लोन नहीं चुकाने पर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
एग्जीक्यूटिव ने धमकाया तो महिला ने की आत्महत्या

हाल ही एक महिला ने एप के एग्जीक्यूटिव द्वारा धमकाए जाने के बाद आत्महत्या कर ली। मीडिया के अनुसार पैसा न चुकाने पर एप के एग्जीक्यूटिव ने महिला को अपनी न्यूड पिक्चर शेयर करने को कहा था। इन एप्स के खतरे के बावजूद देश में अब तक 15 लाख यूजर्स इन्हें डाउनलोड कर चुके हैं।
एक छात्रा काे फ्री लोन का ऑफर मैसेज मिला। एप में उनके अकांउट की जानकारी और डेबिट कार्ड का नंबर और सीवीसी भी मांगा गया। एप में जानकारी देने के कुछ घंटों में ही उनके अकाउंट के सारे पैसे निकाल लिए गए।

प्ले स्टाेर पर हैं ऐसे 480 से ज्यादा एप्स

भारत में कर्ज देने के लिए गूगल प्ले स्टोर पर 484 लोन एप्स उपलब्ध हैं। इसमें कई चीन के एप्स भी हैं। जल्द कर्ज पाने के लिए लोग इन एप्स पर आधार कार्ड नंबर, पेन कार्ड, बैंक खाते जैसी निजी जानकारी साझा कर रहे हैं। बाद में ये एप्स उन जानकारी के जरिये फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहे हैं।
ऐसे एप्स से लोन में कई दिक्कतें

कई एप पांच सौ से एक हजार तक के लोन एक मिनट में दे देते हैं। इतनी आसानी से मिलने वाले लोन की एवज में एप मोबाइल में कई एक्सेस लेते हैं। इसकी इजाजत हम एप को टर्म एंड कंडीशन में अनजाने में उसे दे देते हैं। इसके साथ ही एप हमारे बैंक की डिटेल और पिन भी एक्सेस करने लगते हैं।

गूगल ने चीन के सर्वर वाले 5 एप्स पर बैन लगाया

चीनी सर्वर के जरिए एप स्टोर में मौजूद 5 फाइनेंशियल एप्स को गूगल ने बैन कर दिया गया है। ये सभी एप्स गैर कानूनी थे, क्योंकि इन्हें सरकार की ओर से मंजूरी नहीं मिली है। आरबीआई के अनुसार ऐसे एप्स से लोन लेने से पहले यह देख लेना चाहिए कि उन्हें बिजनेस करने के लिए सरकार की मंजूरी हासिल है या नहीं।

ये हैं वो पांच एप्स

गूगल प्ले स्टोर ने ओके कैश, गो कैश, फ्लिप कैश, ई-कैश और स्नैपइट लोन को बैन कर दिया है। गूगल ने कहा है कि किसी भी देश में फाइनेंस से जुड़े एप्स के संचालन के लिए स्थानीय सरकार से मंजूरी लेना अनिवार्य है, जबकि ये पांचों एप्स बिना सरकार से मंजूरी लिए गूगल प्ले स्टोर से संचालित हो रहे थे।



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