महाराजा सूरजमल के बलिदान को किया याद, वक्ताओं ने कहा-वे कुशल शासक व वीर योद्धा थे

महाराजा सूरजमल के 257 वें बलिदान दिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार को जिला जाट महासभा के तत्त्वावधान में सर छोटूराम पशुधन सहायक प्रशिक्षण संस्थान में विचार गोष्ठी का आयोजन साहब सिंह एडवोकेट की अध्यक्षता एवं इतिहासकार रामवीर सिंह वर्मा के मुख्य आतिथ्य में किया गया।

इतिहासकार रामवीर सिंह वर्मा ने कहा कि महाराजा सूरजमल साम्प्रदायिक समन्वय करने वाले युग पुरूष थे। देश की समृद्धि तथा सुखद भविष्य के लिए हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए कट्टर समर्थक थे। इसका प्रमाण यह है कि शहर में जहां गंगा मन्दिर एवं लक्ष्मण मन्दिर है वहीं जामा मस्जिद भी है।

अहमदशाह अब्दाली से पराजित मराठा सैनिकों के साथ वजीर गाजीउद्दीन को भी भरतपुर में शरण तथा सुरक्षा प्रदान की तथा उन पर दस लाख रुपए से अधिक धन व्यय किया। जाट महासभा के अध्यक्ष डाॅ. प्रेमसिंह कुंतल ने कहा कि महाराजा सूरजमल के राज्य में किसानों को खुशहाल बनाने के लिए कृषि को उन्नत करने वाले कानून बनाए।

उनके राज्य में कोई पीपल वृक्ष को नहीं काट सकता था। किसी धार्मिक स्थल को क्षति नहीं पहुंचा सकता था। डाॅ. राजीव शर्मा एवं सुनील गोयल प्रधान ने महाराजा सूरजमल को भारतीय संस्कृति का रक्षक बताते हुए उन्हें महान हिन्दू सम्राट बताया। राजस्थान जाट महासभा के प्रदेश महामंत्री राकेश फौजदार एवं डाॅ. अशोक अग्रवाल ने सूरजमल को किसान हितैषी बताया।

साहब सिंह चौधरी एडवोकेट ने महाराजा सूरजमल को सच्चे मायनों में प्रजा पालक, कुशल शासक एवं वीर योद्धा बताया। कार्यक्रम को सुभाष कुन्तल, गोरधन सिंह फौजदार एडवोकेट, डाॅ. लोकेश सिंघल, डाॅ. कपिल शर्मा, नौनिहाल सिंह डागुर, भगवानसिंह, पुष्पेंद्र कुंतल आदि ने भी संबोधित किया।

सुनील गोयल प्रधान ने प्रस्ताव रखा कि सरकुलर रोड का नाम महाराजा सूरजमल रोड रखा जाए। प्रस्ताव को सर्व सम्मति से पारित किया गया। संचालन राकेश फौजदार ने किया। इधर, महाराजा सूरजमल यूथ ब्रिगेड द्वारा महाराजा सूरजमल स्मारक पर जिला महासचिव अभिलेख दहवा के नेतृत्व में दीपोत्सव कार्यक्रम आयोजित हुआ।

कार्यक्रम में पर्यावरणविद् बच्चू सिंह वर्मा ने महाराजा सूरजमल के व्यक्तित्व और उनके योगदान की जानकारी दी। संभाग संयोजक हरिओम रायसीस ने बताया कि 25 दिसम्बर को सुबह 10 बजे कुम्हेर गेट से आगे स्थित अखड्ड के छौंकर का पूजन कर गांव गुंडवा स्थित एक निजी फार्म हाउस पर कार्यक्रम का आयोजन होगा। साथ ही 27 दिसम्बर को संस्था द्वारा विचार गोष्ठी का आयोजन होगा। दीपोत्सव में जिला उपाध्यक्ष शुभम सिनसिनी,यतिन फौजदार, चमन, पुष्पेंद्र टिकैत, राजेश ठाकुर,चमन आदि उपस्थित रहे।

महाराजा सूरजमल अतिकुशल नेतृत्व क्षमता, अद्वितीय शौर्य और बुद्धि चातुर्य के धनी थे: प्रो. धाकरे

वीर शिरोमणि महाराजा सूरजमल के बलिदान के 257 वर्ष पूर्ण होने पर स्मरण स्वरूप महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय के कुलपति व समस्त स्टाफ ने बलिदान दिवस की पूर्व संध्या पर डीग के जलमहल के मुख्य द्वार के निकट भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

कुलपति प्रोफेसर राजेश कुमार सिंह धाकरे ने महाराजा सूरजमल के चित्र पर माल्यार्पण किया। कुलसचिव शौकत अली व अन्य अधिकारियों ने पुष्प अर्पित किए। कुलपति ने जाट प्लेटो सूरजमल के व्यक्तित्व और चरित्र पर प्रकाश डालते हुए उनकी अतिकुशल नेतृत्व क्षमता, अद्वितीय शौर्य और पराक्रम तथा बुद्धि चातुर्य के बारे में बताया। उन्होंने ऐतिहासिक कालखंड को याद करते हुए बताया कि किस प्रकार महाराजा सूरजमल ने मुगल सेनाओं से टक्कर ली, मराठों की सहायता कर मराठा राज्य और भरतपुर रियासत के मध्य संबंध स्थापित किए।

उन्होंने कहा कि महाराजा सूरजमल ने अपने अदम्य साहस के बल पर ही भरतपुर जाट रियासत का प्रसार करते हुए धौलपुर, मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, मेरठ, गुड़गांव, रेवाड़ी और आगरा आदि जिलों को मुगलों से छीन लिया था। इस मौके पर परीक्षा प्रभारी डाॅ फर्बट सिंह, सहायक कुलसचिव प्रशान्त कुमार सिंह, अकादमिक विभाग प्रभारी लता शर्मा, विजय मैथिल, मोहन स्वरूप चतुर्वेदी, जगवीर सिंह, रूपसिंह, तेजवीर सिंह, राजकुमार शर्मा आदि ने भी विचार व्यक्त किए।



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