भीतरी शहर में बड़े वाहनाें के एंट्री टाइम व टैक्सियाें की संख्या पर नियंत्रण करने से सुगम हाे सकता है ट्रैफिक
ऐतिहासिक वॉल सिटी साढ़े पांच सदी से ज्यादा उम्र की हाे चुकी है। हालांकि समय के साथ बढ़ती जनसंख्या और वाहनाें से यहां यातायात के हाल बेहाल हैं। एक बार बाइक सवार भी फंस जाए तो बाहर निकला संभव नहीं हो पाता। अब शहर के लोगों में ऐसी समस्याओं के समाधान की अपेक्षाएं बढ़ रही हैं। इस बीच कोटा में लगातार डवलपमेंट प्रोजेक्ट की तरह अब जोधपुर में भी वैसे ही बड़े प्रोजेक्ट पर सीएम अशोक गहलोत ने फोकस शुरू किया है। शहर में बड़े विकास कार्यों के साथ ही भीतरी शहर की यातायात व्यवस्था सुगम करने के प्लान पर भी विचार हो रहा है।
सीएम गहलोत ने शहर के विकास को लेकर वीसी के माध्यम से जोधपुर के अफसरों से मुखातिब होकर मंथन किया। अब इसके प्लान पर काम शुरू होने वाला है। कलेक्टर इंद्रजीत सिंह का कहना है कि भीतरी शहर के यातायात को लेकर भी बातचीत हुई। इसकी प्लानिंग के लिए जेडीए व निगम के इंजीनियर्स, अफसरों से बातचीत शुरू हो गई है। भीतरी शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए किन बातों पर फोकस करना पड़ेगा, इसके लिए भास्कर ने समस्याएं जानीं, साथ ही विशेषज्ञों से इनके समाधान के सुझाव भी जाने।
समस्या - अनगिनत व बेकाबू टैक्सियां, सड़कों पर दुकानों का सामान
- वॉल सिटी में अभी नई सड़क, घंटाघर से सिरे बाजार, आडा बाजार होते हुए जालोरी गेट तक यातायात का दबाव है।
- पीक टाइम में तो यहां से कार लेकर जाना तो दूर की बात दुपहिया वाहन से गुजरना मुमकिल नहीं है।
- ऑटो रिक्शा और लोडिंग टैक्सियों की भरमार है। भीतरी शहर में 10-15 हजार ऑटो का दबाव रहता है।
- साथ ही दुकानों के आगे सामान रखने के कारण भी पैदल चलने में दिक्कत होती है।
- इन कारणों से सुबह नौ बजे से रात दस बजे तक यातायात सुगम नहीं हो पाता है।
- पहले यहां लोडिंग टैक्सी को रात के समय ही जाने की अनुमति थी। कई जगह वन वे भी था, लेकिन कई सालों से ये व्यवस्थाएं ठप हैं।
सुझाव: ई-रिक्शा को अनुमति व वाहनों पर नियंत्रण
- भीतरी शहर के ट्रैफिक को सुधारने के लिए वाहनों को नियंत्रित करना जरूरी है।
- चारपहिया वाहनों की एंट्री टाइम के आधार पर ही होनी चाहिए।
- शहर के लोगों के आने-जाने के लिए ई-रिक्शा जैसे विकल्प या छोटे इलेक्ट्रॉनिक वाहनों पर विचार किया जा सकता है।
- ट्रांसपोर्ट नगर से माल लेकर आने वाले लाेडिंग टैक्सियों पर नियंत्रण करने की जरूरत है। हाईकोर्ट के पुराने आदेशानुसार व्यवस्था लागू की जा सकती है। - पुराने शहर की सड़कों को चौड़ा करना तो संभव नहीं है, ऐसे में इस तरह के वैकल्पिक समाधानों पर फोकस करने की जरूरत है।
विकास: शहर के इन प्रोजेक्ट्स पर भी फोकस
- शहर के भीड़-भाड़ वाले पुराने बाजारों में यातायात को सुगम बनाने के साथ-साथ शहर के सौंदर्यीकरण की योजना।
- शहर के हेरिटेज लुक, वहां के सांस्कृतिक विरासत व पुराने भवनों की सुंदरता में निखारने का प्लान।
- सभी बाजारों में वाहनों के साथ-साथ साइकिल ट्रैक एवं फुटपाथ के लिए पर्याप्त जगह हो।
- विश्व स्तरीय ऑडिटोरियम के साथ कन्वेंशन सेंटर जिसमें 1500 के बैठने की क्षमता वाला ऑडिटोरियम, प्रदर्शनी स्थल, कन्वेंशन हॉल, कॉन्फ्रेंस हॉल, मीटिंग रूम, एमपी थियेटर, रेस्टोरेंट, पुस्तकालय, पार्किंग आदि का निर्माण होगा।
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