लाइलाज बीमारी ‘सिकल सेल एनीमिया’ की होगी स्क्रीनिंग पायलट प्रोजेक्ट में जयपुर और जनजाति क्षेत्रों का चयन
(सुरेन्द्र स्वामी). प्रदेश में थैलेसीमिया, हीमोफिलिया के बाद सरकार ने लाइलाज जन्मजात बीमारी सिकल सेल एनीमिया (एससीए) की स्क्रीनिंग की तैयारी कर ली है। बीमारी से प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की स्क्रीनिंग कर इलाज करेगी।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत जयपुर समेत जनजाति क्षेत्र में स्क्रीनिंग की जाएगी।
स्क्रीनिंग करने के बाद आंकड़ों के आधार पर एसएमएस जयपुर, जेएलएन अजमेर, जोधपुर, आरएनटी उदयपुर, बीकानेर और कोटा मेडिकल कॉलेज के डे-केयर सेंटरों पर इलाज किया जाएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यह 86 बच्चों में से एक में यह मिलती है। केन्द्र सरकार के बायोटेक्नोलोजी विभाग की ओर से बीमारी को फैलने से रोकने के लिए प्रोटोकॉल जारी किए है।
लाल रुधिर कोशिका में विकार से होता सिकल सेल एनीमिया
यह लाल रुधिर कोशिका या आरबीसी विकार के कारण होता है। इसमें असामान्य हीमोग्लोबिन टर्म सिकल हीमोग्लोबिन या हीमोग्लोबिन एस आरबीसी में उपस्थित होता है। यह बीमारी जन्म से ही होती है, लेकिन बीमार होने के बाद 5 से 6 माह का समय लग सकता है। सिकल सेल विशेषता या ट्रेट एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को अपने माता-पिता में से किसी एक से पैतृक रूप से यह सिकल सेल जीन प्राप्त होता है लेकिन बीमारी नहीं मिलती। ऐसा व्यक्ति स्वस्थ जीवन जीता है. लेकिन अगर उनके जीवनसाथी को भी सिकल सेल ट्रेट हो तो उनके बच्चे को सिकल सेल बीमारी होने का खतरा अधिक होता है। शरीर में दर्द, बैक्टीरियल संक्रमण, हाथ-पैर में सूजन, एनीमिया और आंखों को नुकसान हो सकता है।
गहन मंथन के बाद लिया निर्णय
विशेषज्ञ और डॉक्टरों के बीच गहन मंथन के बाद सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग करने का निर्णय लिया। मिशन निदेशक (एनएचएम) नरेश ठकराल ने सभी अधिकारियों को स्क्रीनिंग की जल्द सुविधा के निर्देश दिए। बैठक में अंजली राजोरिया (एडिशनल कमिश्नर, टीएडी), अरुणा राजोरिया, (सीईओ, स्टेट एश्योरेंस एजेन्सी), डॉ.पायल.सी.देसाई (निदेशक, सिकल सेल रिसर्च, यूएसए), डॉ.विवेक अरोड़ा (आरएनटी मेडिकल कॉलेज उदयपुर के पीडियाट्रिक्स के विभागाध्यक्ष), डॉ.कपिल गर्ग (सीनियर प्रोफेसर , पीडियाट्रिक हिमेटोलॉजी ओंकोलोजी, जेके लोन जयपुर), डॉ.विष्णु शर्मा (हिमेटोलोजिस्ट, एसएमएस जयपुर), डॉ.डी.पी.सिंह, डॉ.ए.के.मेहता, डॉ.आर.एल.सुमन, डॉ.दिनेश खराड़ी और मनीष चौधरी आदि।
^थैलेसीमिया, हीमोफीलिया की तरह अब सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग करने का निर्णय हुआ है। इससे बीमारी से पीड़ित मरीजों का पता चल सकेगा। इसके आधार पर ही पॉलिसी बनाकर इलाज करना आसान होगा।
डॉ.अशोक जैन, स्टेट नोडल अधिकारी, ब्लड सेल एनएचएम
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