धार्मिक नगरी हरिद्वार स्थित हर की पैड़ी में राजपूत समाज की पहली धर्मशाला का शनिवार को हवन व धार्मिक अनुष्ठानों के साथ शुभारंभ हुआ। राता भाखर बालेसर के संत मूलगिरि महाराज, मदन पुरी, महंत गोतम्बर मंदिर बस्तवा, संतोष गिरि, तेना आदि संत-महात्माओं के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में प्रताप सिंह बेलवा राणाजी, धर्मशाला ट्रस्ट के अध्यक्ष गायड़ सिंह खारी बेरी, सचिव भगवान सिंह तेना, प्रभूसिंह बेलवा, नारायण सिंह तेना, भूर सिंह, नारायण सिंह बस्तवा, सुजान सिंह, विशन सिंह सिसोदिया भूंगरा, गुलाब सिंह मेरिया, उत्तम सिंह बुड़किया, डॉ. लक्ष्मण सिंह गड़ा, करण सिंह केतु हामा, हमीर सिंह बेलवा, ठेकेदार चैनसिंह, सवाई सिंह बालेसर, खेतसिंह खिरजां, सवाईसिंह खारी बेरी, स्वरूपसिंह डेडा, भंवरसिंह देवानिया, सोहन सिंह लवारन, हरिसिंह ढेलाणा, देवी सिंह सगरा, आणंद सिंह देवातू, सांग सिंह भालू, सुमेरसिंह, नखत सिंह तेना, हनुमान महाराज दुर्गावतां सहित बड़ी संख्या में स्वजातीय बंधु मौजूद थे।
ट्रस्ट अध्यक्ष ने बताया कि हरिद्वार में राजपूत समाज की पहली धर्मशाला शेरगढ़ के राजपूत बंधुओं ने बनवाई हैं। इससे पहले किसी भी क्षेत्र के राजपूतों की हरिद्वार में कोई धर्मशाला नहीं थी। शेरगढ़ परगने में शेरगढ़, बालेसर, देचू, सेखाला व चामू पंचायत समितियों का क्षेत्र आता है।
चार मंजिला इमारत में स्थित है 30 कमरे
धर्मशाला में प्रथम तल सहित चार मंजिला इमारत बनवाई गई है। प्रथम तल पर रसोई व स्टोर रूम के साथ चार पहिया वाहनों की पार्किंग हैं। ऊपर के तीन मंजिल में 9-9 रूम सहित कुल 27 कमरे हैं। सभी रूम सभी सुविधा संपन्न व वातानुकूलितहै। छत पर एक कमरा सहित पूरी धर्मशाला में 30 कमरे व पार्किंग है।
प्रथम तल से छत तक लिफ्ट भी लगवाई गई है। उन्होंने बताया कि अभी फर्नीचर का कुछ कार्य शेष है, जो चल रहा है। उन्होंने बताया कि वैशाख मास से पहले कोई अच्छा शुभ मुहूर्त नहीं है तथा कुछ समय बाद हरिद्वार में कुंभ भी है, इसी कारण इसका शुभारंभ किया गया है। उन्होंने बताया कि धर्मशाला के निर्माण में साढ़े चार से पांच करोड़ रुपए का खर्चा आने का अनुमान है।
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