कोटा की अर्थव्यवस्था को हुआ ‘कोरोना’, कोिचंग की ‘वैक्सीन’ लगे तो दूर हो बेरोजगारी का ‘वायरस’

हे सरकार! कोटावासियों की पुकार सुनो। यहां कोचिंग बंद हैं। कोचिंग ही कोटा की लाइफ लाइन है। यहां की अर्थव्यवस्था कोचिंग पर टिकी हुई है। क्योंकि यहां देश के विभिन्न राज्य से करीब 1.50 लाख बच्चे कोचिंग करने आते हैं। जिसे कोटा में हर साल करीब 3 हजार करोड़ का कारोबार होता है। पिछले 10 महीने से शहर में काेचिंग बंद हैं।
काेचिंग नहीं खुलने से काेटा में आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हाेने लगी है। इससे आम आदमी से लेकर व्यापारी वर्ग तक परेशान हैं। यदि सरकार ने काेचिंग संस्थानाें काे अनलाॅक नहीं किया ताे काेटा आर्थिक स्थिति बदहाल हाे जाएगी। दैनिक भास्कर ने जब काेचिंग से जुड़े लाेगाें का दर्द जाना ताे उनकी दर्द भरी कहानी सामने आई। लाेगों की आंसू टपक आए। बाेले की जल्द काेचिंग नहीं खुले ताे हम राेजी-राेटी के लिए माेहताज हाे जाएंगे।

मैस संचालक: पत्नी मजदूरी कर रही है : बाबूसिंह

काेटा में पिछले 20 साल से मैश चला रहा हूं। लेकिन, काेचिंग बंद हाेने से स्थित स्थिति गंभीर हाे गई हैं। पहले स्टूडेंट्स की मैस पर भीड़ उमड़ती थी। समय तक नहीं मिलता है। 16 जनाें का कुल स्टाफ था। लेकिन, सब कुछ बंद हाेने से सभी स्टाफ काे हटा दिया है। पांच टिफिन से राेजगार चल रहा है। अब बर्तन खुद मांजता हूं। पहले महीने में 40 से 50 हजार की बचत हाे जाती थी। अब खर्चा तक नहीं निकल रहा है। खर्च निकालने के लिए मैस के आधे बर्तन बेच दिए हैं।

हाॅस्टल संचालक: कर्ज नहीं चुका पा रहा: भगवान
पिछले 12 साल से हाॅस्टल लीज पर लेकर परिवार का खर्च चला रहा हूं। लेकिन, काेचिंग बंद हाेने के बाद से स्थिति गंभीर हाे चुकी है। स्थिति यह है कि कर्ज लेकर और फाइनेंस से व्यवस्था कर जाे लीज पर हाॅस्टल लिए हुए हैं उनकी नल-बिजली के बिला की व्यवस्था कर रहा हूं। हर महीने करीब 30 हजार रुपए का खर्च है। लेकिन, अब ताे कमर टूट चुकी है। सरकार काेचिंग खाेले, नहीं ताे हमारी स्थिति संभल नहीं पाएगी।
चाय विक्रेता: 200 रुपए भी कमाई नहीं : बंटी
पहले काेचिंग बच्चाें के कारण चाय की अच्छी बिक्री हाेती थी। टाइम नहीं मिलता था। 20 लीटर से अधिक दूध की खपत हाे जाती थी और 1000 रुपए से अधिक आमदनी रोज हाे जाती थी। लेकिन, जब से काेचिंग बंद है। तभी से खर्चा तक नहीं निकल रहा है। मुश्किल से दाे लीटर दूध की भी चाय भी नहीं बिकती है। 200 रुपए की आमदनी भी नहीं हो रही है। परिवार में आठ मेंबर हैं। खर्च निकालना मुश्किल है।

ड्राइवर की पत्नी: घर चलना हुआ मुश्किल : संताेष
काेचिंग्स बंद हाेने की काेचिंग में पति की जाॅब छूट गई। वाे ड्राइवर का कार्य करते थे। शहर में इस उम्र में उन्हें छाेटी-माेटी नाैकरी भी नहीं मिल पा रही है। मैं भी स्कूल में पढ़ाती थी। मेरे भी जाॅब छूट गई। किराए का मकान भी खाली करना पड़ा। अब बेटा दूसरी जगह काम करता है। चिंता है कि घर का खर्च चलाऊं। मैं भी अब करीब पांच किमी दूर पैदल जाकर तीन महीने की ट्यूशन कर रही हूं।

जूस विक्रेता: खर्च तक नहीं निकल रहा: धर्मेंद्र

पहले काेचिंग के बच्चे हाेने से महीने में करीब एक से डेढ़ लाख रुपए की इनकम हाे जाती थी। लेकिन, अब काेचिंग हाेने से स्थिति गंभीर हाे चुकी है। सुबह से शाम तक एक हजार रुपए तक का जूस सहित अन्य की बिक्री तक नहीं हाेती है। हालत यह है कि स्टाॅफ माल एक्सपायरी हाेने से करीब 50 हजार रुपए का नुकसान हाे गया है। अब ताे राेज का खर्च निकालना मुश्किल हाे गया है।

राशन विक्रेता: 1 लाख का माल फेंकना पड़ा : आशीष

काेचिंग्स हाॅस्टल्स में राशन की सप्लाई का काम पहले अच्छा था। हर महीने करीब डेढ़ लाख रुपए तक इनकम हाे जाती थी। अन्य लाेगाें काे भी राेजगार मिला हुआ था। लेकिन, काेचिंग बंद हाेने से करीब एक लाख रुपए के किराना आयटम एक्सपायरी हाे गए जिन्हें फैंकना पड़ा। हालत यह है कि अब ताे परिवार का खर्च निकालना मुश्किल हाे गया है। अब काेचिंग खुल जाए ताे हमारी बिगड़ी हालत सुधर जाए।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
कोचिंग बंद होने से बेरोजगार हुए मैस संचालक के परिवार को नरेगा में मजदूरी करने की आ चुकी है स्थिति।


टिप्पणियाँ