शहर की पहली नदी; दो साल की देरी के बाद अब रफ्तार से बहेगी, किनारे का सहारा; कोर्ट से मंजूरी मिलते ही फ्रंटलाइन टूरिज्म बढ़ेगा
जयपुर शहर की पहली नदी द्रव्यवती दो साल की देरी के बाद अब रफ्तार से बहेगी। क्योंकि अक्टूबर 2021 तक ‘द्रव्यवती रिवर फ्रंट’ का काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद यही मेगाप्राेजेक्ट शहर के लिए पर्यटन का नया हब बनेगा और विकास की वजह भी। लॉकडाउन के बाद बंद हुआ इसका काम फिर से शुरू हो गया है। काम करने वाली फर्म टाटा प्राइवेट लिमिटेड की ही मान लें तो भी प्रोजेक्ट अक्टूबर 2021 में पूरा होगा, जिसके लिए वह जेडीए को लिखित आश्वासन दे चुका है।
बहरहाल अब पंचायत-प्रधान, निगम और उपचुनावों के बाद फिर से विधानसभा चुनावों को भुनाने के लिए प्रोजेक्ट की पाल बांधना जरूरी होगा। ऐसा इसलिए भी कि 47 किमी लंबी द्रव्यवती सीधे तौर पर 200 कॉलोनियों के फ्रंट से गुजरती है। इसका शहर के करीब 2 लाख लोगों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में सरकार भी इसे पूरा करना चाहती है।
यह प्रोजेक्ट पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का ड्रीम प्रोजेक्ट था। अक्टूबर 2018 में उन्होंने इसका उद्घघाटन भी कर दिया था। लेकिन सत्ता बदलने के बाद से इसका काम ठंडे बस्ते में चला गया। हालांकि अब गहलोत सरकार इस प्रोजेक्ट को लेकर सक्रय हो गई है। सरकार ने इस प्रोजेक्ट में और करोड़ों के बजट घोषणा की है। अभी तक फर्म के बकाया पर भी बिल पास हुए हैं। यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल भी दूसरे प्रोजेक्ट की बजाए इस ओर नरमी दिखा रहे हैं।
द्रव्यवती प्रोजेक्ट को शुरू करने वाली पूरी टीम बदल चुकी है, सिवाय एकाध एक्सईएन के। नई टीम ने काम का जिम्मा संभाला है। डायरेक्टर इंजीनियर वीएस सूंडा के रिटायरमेंट में छह माह का समय बचा है। ऐसे में वे पूरा प्रोजेक्ट कर जाना चाहते हैं। वहीं युवा जेडीए कमिश्नर गौरव गोयल ने भी सरकार से बात की है। यानी प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए सरकार, कार्यदायी संस्था व जेडीए तीनों एक प्लेटफॉर्म पर हैं।
- 47 किमी है इस प्रोजेक्ट की लंबाई। नाहरगढ़ की तलहटी से ढूंढ नदी तक
- 200 कॉलोनियाें के किनारे से गुजरती है द्रव्यवती नदी
- राज्य सरकार, जेडीए और कार्यदायी संस्था तीनोंे अब काम में दिखा रहे तेजी
- 201 हेक्टेयर जमीन है 7 जोन में द्रव्यवती नदी के दोनों किनारों पर
- 94 हेक्टेयर जमीन खाली है किनारों पर, लेकिन मामला कोर्ट में लंबित
जेडीए यह केस जीता तो दूसरे प्रोजेक्ट के लिए पैसा भी इसी प्रोजेक्ट से आएगा
द्रव्यवती रिवर फ्रंट के साथ पर्यटन के अलावा सबसे बड़ा पहलू यह है कि इसके दाेनों किनारों पर करीब 201 हेक्टेयर जमीन है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस जमीन में भी 7 जोन में 94 हेक्टेयर जमीन खाली पड़ी हुई है। इसका मामला अभी कोर्ट में लंबित है। अगर जेडीए इस केस काे जीतता है और इसका स्वामित्व उसे मिलता है तो इस बेशकीमती जमीन से द्रव्यवती ही नहीं बाकी प्राेजेक्ट के हालात भी सुधर जाएंगे।
यह जमीन जेडीए को मिलती है तो फ्रंटलाइन पर टूरिज्म, डवलपमेंट से जुड़ी गतिविधियां होंगी। जेडीए को प्रोजेक्ट की लागत से ज्यादा पैसा मिलेगा, जिसका फायदा दूसरे प्रोजेक्ट को भी मिलेगा। जेडीए के डायरेक्टर इंजीनियरिंग, वीएस सूंडा के अनुसार- महामारी के अनलॉक के बाद काम फिर से शुरू हुआ है। अब बचे हुए काम भी पूरे होंगे। इसके लिए फर्म को सारी बातों से अवगत करा दिया है।
खाली जमीनों का बेशकीमती गणित
जोन जमीन (हे.) खाली
जोन-2 100.97 7.44
जोन-4 7.90 7.90
जोन-5 13.37 2.10
जोन-8 19.47 16.64
जोन-9 36.79 36.79
जोन-14 23.1 23.1
प्रोजेक्ट में अभी ये काम होने बाकी
द्रव्यवती प्रोजेक्ट पर अभी वॉक वे, स्टोन क्लेडिंग, मिलिट्री एरिया में चैनलिंग, विधानी में लाइनिंग, ग्रास लैंड, टायलेट ब्लॉक, सिटआउट, गेट, फिनिशिंग के काम बकाया हैं। देलावास एसटीपी प्लांट, कोर्ट केसेज, सुशीलपुरा में निर्माण और गोनेर के आगे किसानों के मसले सुलझना बाकी हैं।
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