रोडवेज के उड़न दस्ते और फ्लाइंग टीमें जयपुर मुख्यालय की 24 घंटे निगरानी में होंगी। रोडवेज फ्लाइंग के अफसर व टीम के सदस्य बस स्टाफ से मिलीभगत नहीं कर सकेंगे। रोडवेज के सभी 52 डिपो के महाप्रबंधक व अफसर भी मुख्यालय के राडार पर रहेंगे। इसके लिए एक साॅफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है, जो जयपुर मुख्यालय के कंट्रोल रूम से ऑपरेट होगा। रोडवेज के सभी अफसरों की गाड़ियों को जीपीएस सिस्टम से कनेक्ट किया जाएगा, जो 24 घंटे गाड़ियों की मूवमेंट पर नजर रखेगा। इसके अलावा सभी महाप्रबंधकों के वाहनों को भी (व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम) वीटीएस से कनेक्ट किया जाएगा।
पहले फेज में करीब 10 लाख रुपए खर्च करके प्रयोग के तौर पर 70 बसों में इसे लगाया जा रहा है। इसके बाद रोडवेज की सभी बसों को भी धीरे-धीरे करके वीटीएस के माध्यम से साॅफ्टवेयर से जोड़ने की योजना है। ताकि मुख्यालय में बैठे अफसर जान सकें कि बसें तय रूट से ही आ जा रही हैं। साथ ही बसें कहां खड़ी हैं और कितनी देर रुकी हैं, इसका टाइम टेबल भी साॅफ्टवेयर से मिलान किया
जा सकेगा।
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