(शिवांग चतुर्वेदी). रेलवे में इन दिनों चाय एक बड़ा मुद्दा बन गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि हाल ही में रेलमंत्री ने देश के सभी स्टेशनों पर कुल्हड़ में चाय दिए जाने की बात कही। हालांकि रेलमंत्री खुद इस बात से अनभिज्ञ हैं कि जिस घोषणा को वे नया बता रहे हैं, उसे तो विभाग पिछले सितंबर में ही जारी कर चुका है।
बावजूद इसके स्टेशनों पर कुल्हड़ की बजाय प्लास्टिक के कप में ही चाय दी जा रही है। हालांकि रेलमंत्री द्वारा पिछले दिनों एक कार्यक्रम के दौरान में कुल्हड़ में चाय दिए जाने की बात कहने के बाद अब स्टेशनों पर कुल्हड़ दिखने तो लगे हैं। लेकिन सिर्फ मांगे जाने पर ही कुल्हड़ में चाय दी जा रही है। यानि अभी भी प्लास्टिक के कप उपयोग में लिए जा रहे हैं।
दरअसल पिछले साल रेलवे बोर्ड ने ही देशभर के 400 बड़े स्टेशनों पर कुल्हड़ में चाय दिए जाने के आदेश जारी किए थे। लेकिन यह वास्तविकता के धरातल पर नहीं लागू हो सके। उत्तर पश्चिम रेलवे के तत्कालीन डिप्टी सीसीएम सी आर कुमावत ने भी उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर, बीकानेर सहित 25 स्टेशनों पर कुल्हड़ में चाय देने के आदेश जारी किए थे।
लेकिन यह प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो सके थे। अब जब खुद रेलमंत्री पीयूष गोयल ने कुल्हड़ में चाय दिए जाने की बात को नया बताकर लागू करने के लिए कहा, तो रेलवे प्रशासन हरकत में आया। हालांकि वेंडर्स की दलील है कि एक कुल्हड़ 1.60 रुपए का और एक प्लास्टिक कप 50 पैसे का पड़ता है। ऐसे में रेलवे ने बिना चाय की रेट बढ़ाए इसे लागू किया है। जिसके चलते ही कुल्हड़ के साथ प्लास्टिक के कप में भी चाय दी जा रही है।
वास्तविकता ये : स्टेशनों पर कुल्हड़ बंद होने का कोई आदेश कभी जारी ही नहीं हुआ
रेलवे के खानपान की व्यवस्था संभालने वाली पीएसयू इंडियन रेलवे टूरिज्म एंड कैटरिंग कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) पर रेलमंत्री के आदेशों का असर देखने को नहीं मिल रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि आईआरसीटीसी के जयपुर रीजनल के मुख्यालय ने अभी तक भी स्टेशनों और ट्रेनों में कुल्हड़ में चाय दिए जाने के कोई आदेश जारी नहीं किए हैं। जिसके चलते आईआरसीटीसी की जयपुर स्टेशन पर बनी फूड यूनिट्स पर प्लास्टिक के कप में ही चाय दी जा रही है।
2004-2009 में हुई थी शुरुआत
कुल्हड़ में चाय देने की बात कर केंद्र सरकार एक तरफ जहां पर्यावरण संरक्षण में एक बड़ा निर्णय लिए जाने की बात कर रही है। तो वहीं स्थानीय स्तर पर कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने का भी दावा किया जा रहा है। जबकि स्टेशनों पर कुल्हड़ में चाय दिए जाने की शुरुआत पहली बार यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल (2004-2009) में रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने की थी। उसके बाद स्टेशनों पर कुल्हड़ में चाय नहीं दिए जाने जैसा कोई आधिकारिक आदेश नहीं निकाला गया था।
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