राजपूताना रियासतों में बीकानेर का जूनागढ़ किला सबसे बेहतरीन किलों में से एक है। मैदान में बने इस किले की नक्काशी भी अद्भुत है। इस किले की नींव अकबर के शासन काल में विक्रम संवत् 1645 में महाराजा रायसिंह ने रखी थी। इतिहासकार डॉ. शिवकुमार भनोत बताते हैं कि यह किला कटोरे की शेप में है, जो पांच साल में बना था। निर्माण के लिए पानी की जरूरत किले के पीछे बनी झील से की जाती थी।
इसके बाद बीकानेर रियासतों में जो भी शासक बने, उन्होंने अपने महल इसी किले में बनवाए, इसलिए जूनागढ़ को महलों का पुंज भी कहा जाता है। जूनागढ़ में अनूप महल, सरदार महल, जोरावर महल, कर्ण महल, रायसिंह महल, गंगा निवास, रतन निवास, सुजान निवास और कोठी डूंगर निवास बने हुए हैं। विदित रहे कि राजपूताना रियासतों में बने अधिकांश किले पहाड़ों या ऊंचे स्थानों पर बने हुए हैं।
जूनागढ़ को तोहफे में मिला था पहले विश्व युद्ध का विमान
28 जुलाई 1914 से 11 नवंबर 1918 तक चले प्रथम विश्वयुद्ध में उपयोग हुआ विमान बीकानेर के जूनागढ़ की शोभा बढ़ा रहा है। इस प्लेन को बीकानेर में रखे हुए 100 साल से ज्यादा हो गए हैं। युद्ध में ब्रिटेन की तरफ से बीकानेर रियासत के भाग लिया था। युद्ध में होने पर इस पर ब्रिटिश हुकुमत ने बीकानेर फोर्स को यह प्लेन तोहफे में दिया था। तब बीकानेर रियासत से महाराजा गंगासिंह और गंगा िरसाला गया था। प्लेन जूनागढ़ के गंगा निवास में रखा है।
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