हाईकोर्ट ने एक मामले में महिला पर्यवेक्षक को पोषाहार आपूर्ति में अनियमितता के संबंध में 9 साल बाद चार्जशीट देने पर अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास सचिव और आईसीडीएस निदेशक से जवाब मांगते हुए चार्जशीट में जांच पर रोक लगा दी है। अदालत ने यह अंतरिम निर्देश अनिता रसाल की याचिका पर दिया।
याचिका में कहा कि प्रार्थिया महिला बाल विकास विभाग में पर्यवेक्षक है। विभाग ने 19 अक्टूबर को उसे यह कहकर चार्जशीट दी कि उसने 2011 में किशोरी बालिकाओं को पोषाहार नहीं दिया था। इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि चार्जशीट में जिन महीनों का उल्लेख किया है उस दौरान उसे लिखित में पोषाहार की आपूर्ति का आदेश ही नहीं मिला था।
बाद में लिखित आदेश मिलने पर पोषाहार की पुन: सप्लाई शुरू कर दी। वहीं घटना के नौ साल बाद चार्जशीट देना गलत है क्योंकि लंबे समय के बाद कार्मिक के पास रिकार्ड हीं नहीं रहता और वह अपना पक्ष सही तरीके से नहीं रख सकता। इसलिए दी गई चार्जशीट में जांच पर रोक लगाई जाए।
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