देश में महंगा तेल खरीदने में हम दूसरे नंबर पर, 94.92 प्रति लीटर बिक रहा पेट्रोल, परिवहन और अधिक टैक्स है कारण
(राजेश कुमार)
देशभर में पेट्रोल- डीजल के दाम ऊंचाइयां छू रहे हैं लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी कि हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों में देश का सबसे महंगा पेट्रोल-डीजल बिक रहा है। पिछले एक महीने के आंकड़े देखें तो राज्य में पेट्रोल डीजल के दाम 11 से 13 रुपए तक बढ़ गए। हाल ही में तेल कंपनियों की तरफ से रविवार को की गई बढ़ोतरी के बाद ट्रांसपोर्टेशन सहित वैट आदि के कारण श्रीगंगानगर में पेट्रोल के दाम 95.53 और डीजल 87.23 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गए हैं।
वहीं दूसरे नंबर पर हनुमानगढ़ में पेट्रोल 94.92 और डीजल 86.58 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। वर्तमान में पड़ोसी राज्य हरियाणा के चौटाला जिले में पेट्रोल 83.49 और डीजल 75.89 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है। यानी हमारे जिले में पड़ोसी राज्यों से करीब 11.43 प्रति लीटर तक महंगा पड़ रहा है। कोविड़ महामारी के दौर में आमजन को पेट्रोल- डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। विशेषज्ञों की माने तो राजस्थान सरकार की ओर से लगाए गए वैट और सेस की वजह से हमारे प्रदेश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ गए हैं। इससे आमजन काफी परेशान हैं।
भास्कर पड़ताल पेट्रोल पर 38 और डीजल पर 28 प्रतिशत लग रहा वैट, अन्य राज्यों से 10 % अधिक
आपको बता दें कि राजस्थान में पेट्रोल पर 1.5 और डीजल पर 1.75 रुपए रुपए रोड सेस लगाया जाता है। एसोसिएशन के सचिव दीपक गोयल ने बताया कि राजस्थान सरकार अन्य राज्यों की अपेक्षा 10% ज्यादा वैट वसूलती है। राज्य में पेट्रोल पर 38 प्रतिशत और डीजल पर 28 प्रतिशत वैट है यानी कि प्रदेश सरकार पूरे भारत में सबसे अधिक वैट वसूलती है। दूसरा सबसे बड़ा कारण यह है कि दोनों जिलों में जयपुर, जोधपुर, चित्तौड़गढ़ आदि जगहों से सप्लाई आती है। ऐसे में ट्रांसपोर्टेशन की वजह से पेट्रोल राजधानी जयपुर की तुलना में 3 से 4 रुपए महंगा है। यही वजह है कि हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर के लोगों को सबसे ज्यादा आर्थिक भार झेलना पड़ता है।
2 लाख ली. से ऊपर तेल की खपत रोज जिले में प्रति माह 70 लाख लीटर से अधिक पेट्रोल-डीजल की खपत: पेट्रोलियम एसोसिएशन के अनुसार जब सीमावर्ती राज्यों में पेट्रोल डीजल के रेट में अंतर कम था तो जिले में हर माह करीब 25 से 30 लाख लीटर पेट्रोल और करीब 30 से 40 लाख लीटर डीजल की खपत होती थी। सिर्फ आईओसी के पंपों पर ही 18 लाख लीटर डीजल और 12 लाख लीटर पेट्रोल की बिक्री हो जाती थी। यानी अगर जिले भर में सभी पेट्रोल पंपों के आंकड़े मिलकर देखें तो रोजाना 1 लाख लीटर पेट्रोल और 1 लाख 33 हजार लीटर डीजल की खपत हो रही है। रेट में अंतर की वजह से वर्तमान में जिले भर के पेट्रोल पंपों की बिकी 10 से 15 लाख लीटर प्रतिमाह तक आ गई है।
रु1000 तक की बचत हर 100 ली. पर ट्रक चालकों सहित आम उपभोक्ता भी पड़ोसी राज्य से भरवा रहे डीजल: ट्रांसपोर्टर्स, ट्रक-बस चालक सहित आमजन भी अब सीमावर्ती जिले चौटाला से डीजल पेट्रोल भरवा कर लाते हैं ताकि फायदा हो सके। क्योंकि, अगर ट्रक मालिक चौटाला से 100 लीटर डीजल भरवाता है तो उसे 7589 रुपए का पड़ता है जबकि हनुमानगढ़ से 100 लीटर डीजल भरवाने पर वाहन चालक को 8658 रुपए देने पड़ रहे हैं यानी पड़ोसी राज्य से पेट्रोल डीजल भरवाने पर उसे प्रत्येक 100 लीटर पर 1000 से अधिक रुपए की बचत होती है। वर्तमान में ट्रक ऑपरेटर्स सहित आम उपभोक्ता भी सीमावर्ती राज्य से पेट्रोल-डीजल ला रहे हैं।
एक्सपर्ट व्यू-राज्य सरकार को टैक्स कम करके और पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति नजदीकी डिपो से करवानी चाहिए
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल सस्ता होने के बावजूद देश मे पेट्रोलियम पदार्थों पर टैक्स बहुत अधिक हैं। विडंबना तो यह है कि राजस्थान में अन्य राज्यों के अपेक्षा टैक्स और सेस से कीमतें ओर बढ़ी हैं। वहीं दोनों जिलों में पेट्रोल-डीज़ल की आपूर्ति जोधपुर, जयपुर, चित्तौड़गढ़ आदि जगहों से होती है। ट्रांसपोर्टेशन चार्ज भी ज्यादा लगते हैं। इस वजह से दोनों जिलों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें सबसे अधिक हैं। सीमावर्ती राज्यों में अब रेट में 10 रुपए से अधिक अंतर आ गया है ऐसे में बड़े पैमाने पर वहां से तस्करी के कारण टैक्स राजस्व की हानि हो रही हैं। सरकार को टैक्स कम करके और पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति नजदीकी डिपो से करवानी चाहिए।
डॉ. संतोष राजपुरोहित, पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान आर्थिक परिषद।
देश के चार बड़े महानगरों में पेट्रोल-डीजल के दाम
शहर पेट्रोल डीजल
दिल्ली 83.71 73.87
मुंबई 90.34 80.51
कोलकाता 85.19 77.44
चेन्नई 86.51 79.21 हनुमानगढ़ 94.92 86.58
श्रीगंगानगर 95.53 87.23
*राशि रुपयों में
4 उपायों से जिले में 3 से रु4 प्रति लीटर घट सकता है दाम
- राज्य सरकार वैट कम करे। इससे सीमावर्ती जिले में पेट्रोल डीजल के दाम में ज्यादा अंतर नहीं बचेगा। राजस्व की हानि रुकेगी।
- पेपर डिपो कांसेप्ट अपना सकते हैं। इसमें जिले के सभी डीलर पेपर डिपो को आर्डर देंगे। तेल पहुंचाने का खर्चा कंपनी वहन करेगी ओर ट्रांसपोर्टेशन चार्ज नहीं लगेगा।
- ट्रांसपोर्टेशन चार्ज के एकीकरण से राज्य स्तर पर काफी हद तक मूल्यों पर असर पड़ेगा।
- दोहरी कर प्रणाली लागू कर सीमावर्ती जिलों में वैट पड़ोसी राज्यों के सामान कर देना।
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