8वीं तक स्कूल, परिजनों काे झूठ बाेल आगे की कक्षाएं लगा रहा, बाेर्ड की अंकतालिका में नाम गलत हुए, सही करने के लिए दाे लाख वसूली

रायसिंहनगर ब्लाॅक के एक प्राइवेट स्कूल संचालक के खिलाफ अलग तरह के आपराधिक मामले की शिकायत की गई है। पीड़ित परिवार ने पूरा मामला उठाते हुए शिक्षा विभाग के निदेशक, कलेक्टर, एसडीएम रायसिंहनगर और जिला शिक्षाधिकारी श्रीगंगानगर काे शिकायत की गई है।

मामला रायसिंहनगर तहसील के गांव 12 बीजीडी का है। परिवादी सतनामसिंह ने शिकायत में बताया है कि उसकी पुत्री रूपाबाई निकट के गांव 6जेकेएम में आजाद हिंद उच्च प्राथमिक विद्यालय में अध्ययनरत थी। 8वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद जब प्रार्थी अपनी पुत्री के साथ टीसी लेने स्कूल गया ताे प्रधानाध्यापक लखविंद्रसिंह ने बताया कि उनके स्कूल की 12वीं तक की मान्यता है। बच्ची काे हमारे पास ही पढ़ाते रहाे। इस पर बच्ची काे उसी स्कूल में आगे के अध्ययन के लिए जारी रखा। बच्ची की 10वींऔर 12वीं की बाेर्ड की अंकतालिकाएं इस स्कूल की नहीं थीं। आराेपी प्रधानाध्यापक ने रायसिंहनगर के ज्ञान ज्याेति सीनियर सेकेंडरी स्कूल से जारी की हुई थीं। आराेपी लखविंद्रसिंह ने कभी इस बारे में पूर्व में साफ साफ नहीं बताया बलकि झूठ बाेलकर बच्ची काे अपने ही स्कूल में पढ़ने काे कहा।

इतना ही नहीं बाेर्ड की अंकतालिकाओं में बच्ची और परिजनाें के नाम ही गलत अंकित किए हुए हैं। इस संबंध में आराेपी से मिलकर शिकायत की ताे उसने नाम सही करवाने के बदले कई बार में दाे लाख रुपए ले लिए जबकि नाम ठीक ही नहीं हाे पाया है। आराेपी पीड़ित के अनपढ़ हाेने का फायदा उठाता रहा और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता रहा। आराेपी ने नाम दुरुस्त करवाने काे ली पीड़ित की पुत्री की अंकतालिकाएं भी नहीं लाैटाई हैं। इस संबंध में आराेपी लखविंद्रसिंह से फाेन पर बात कर पक्ष जानना चाहा। उन्हाेंने बाद में बात करने काे कहा लेकिन फाेन ही नहीं आया।

आराेपी ने फर्जी एसआर रजिस्टर देकर पीड़ित काे अजमेर भेजा, कर्मचारियाें ने वापस लाैटाया

पीड़ित सतनामसिंह ने शिकायत में अधिकारियाें काे बताया कि आराेपी लखविंद्रसिंह ने परिवादी काे पहली बार झूठ बाेलकर कहा कि 7 हजार रुपए खर्चा आएगा और नाम सही हाे जाएंगे। परिवादी ने आराेपी काे रुपए दे दिए लेकिन काफी दिन बीत जाने के बाद भी इस मामले में कुछ नहीं हुआ।

इसके बाद आराेपी ने कहा कि वे एसआर रजिस्टर खुद ही अजमेर ले जाएं और नाम दुरुस्त करवाकर ले आएं। परिवादी आराेपी के दिए एसआर रजिस्टर काे लेकर अजमेर बाेर्ड में चला गया लेकिन वहां पर कर्मचारियाें ने एसआर रजिस्टर फर्जी व कूट रचित बताकर परिवादी काे फर्जीवाड़ा करने काे लेकर धमकाया और मुकदमा दर्ज करवाने की धमकी दी। इस पर परिवादी बड़ी मुश्किल से उनसे माफी मांगकर वापस लाैटा। परिवादी ने बाेर्ड में कर्मचारियाें की आराेपी लखविंद्रसिंह से फाेन पर बात करवाई तब भी आराेपी उनकाे काेई संताेषजनक जवाब नहीं दे पाया।

तीन साल से घर बैठी पीड़िता, आगे की पढ़ाई छूटी, एडमिशन ही नहीं हाे पा रहा, चक्कर लगा लगाकर थके
पीड़िता रूपाबाई ने बताया कि उसका अंक तालिकाओं में नाम रूपा रानी कर दिया है और उसकी मां का नाम संताेदेवी काे संताेष कर दिया है। इस कारण बाेर्ड की दाेनाें अंक तालिकाओं में नाम अलग-अलग हाेने के कारण वह न ताे आगे की कक्षाओं में एडमिशन ले पा रही है न ही किसी नाैकरी के लिए आवेदन कर पा रही है। पीड़िता के पिता अनपढ़ हैं और हम गरीब परिवार से हैं। असंख्य बार स्कूल प्रधानाध्यापक लखविंद्रसिंह के पास जा चुके लेकिन दस्तावेजाें में नाम ठीक नहीं करवा रहे हैं।

आराेप- अंकतालिकाएं और दस्तावेज ले लिए, दाे लाख रुपए वसूल चुका लेकिन नाम दुरुस्त नहीं करवाए
शिकायत में बताया है कि आराेपी लखविंद्रसिंह परिवादी से उसकी बेटी और पत्नी का नाम अंकतालिका में ठीक करवाने के बदले तीन वर्षाें में दाे लाख रुपए वसूल चुका है लेकिन नाम ठीक नहीं हाे पाए हैं। यहां तक कि असली अंक तालिकाएं भी आराेपी के पास ही हैं। अब आराेपी कह रहा है कि अंकतालिकाओं में नाम ठीक हाेने के बाद सीधे जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय में आएंगी। जब दूसरे स्कूल के शिक्षकाें से पूछा ताे उन्हाेंने ऐसा काेई नियम नहीं हाेना बताया। इस पर आराेपी की शिकायत की गई है।

शिकायत की जांच जारी है,दाेषी पाए जाने पर कार्रवाई हाेगी: पीड़ित ने शिकायत की है। इस संबंध में एक कमेटी गठित की हुई है जाे मामले की जांच कर रही है। अभी तक जांच रिपाेर्ट प्राप्त नहीं हुई है। कमेटी की जांच में अगर आराेप सही पाए गए ताे स्कूल के प्रधानाध्यापक तथा अन्य दाेषियाें पर विभागीय नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी तथा मुकदमा भी दर्ज करवाया जाएगा।
-हंसराज यादव, कार्यवाहक जिला शिक्षाधिकारी,श्रीगंगानगर।



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School till 8th, relatives of the family were putting up further classes, names were wrong in the board of the board, recovery of lakhs to correct


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