बीआरजीएफ योजना से डेयरी को नियम विरुद्ध दिए 73 लाख, स्वजलधारा के 21 करोड़ पीडी खाते में रखे, नतीजा: सवा करोड़ ब्याज का नुकसान
जिला परिषद में केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के बजट में 50 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2000 से 2020 तक 20 सालों में अफसरों ने सरकारी राशि में हेराफेरी कर सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगा दिया। राज्य व केंद्र सरकार की योजनाओं से विकास कार्यों के लिए स्वीकृत बजट आनन-फानन में खर्च कर दिया। कहीं पर सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना राशि जारी कर दी तो कहीं पर नियम विरुद्ध कार्य स्वीकृत किए गए।
20011-12 में स्वजलधारा योजना की राशि 21 करोड़ रुपए जिला परिषद के पीडी खाते में जमा रहे, लेकिन बचत खाते में जमा नहीं करवाने से ब्याज पेटे 1 करोड़ 19 लाख रुपए का नुकसान हुआ। वहीं बीआरजेएफ योजना से क्षमता निर्माण मद से दुग्ध डेयरी बाड़मेर को 73 लाख रुपए का बजट नियम विरुद्ध आवंटित कर दिया।
राज्य सरकार के चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर जिला स्तर पर आयोजित समारोह पर अफसरों ने टीएफसी योजना से 7.34 लाख रुपए खर्च कर दिए।यानी सरकार की उपलब्धियां गिनाने के लिए आयोजित कार्यक्रम भी विकास कार्यों की राशि से करवाया गया। ऑडिट रिपोर्ट में इसे गंभीर अनियमितता माना है।
बड़ा सवाल: 20 साल में एक भी सीईओ ने कार्रवाई नहीं की तो फिर ऑडिट करवाने की जरूरत क्या
13 योजनाओं में बिना स्वीकृति के किए 6.76 करोड़ रुपए खर्च
13 सरकारी योजनाओं में आवंटित बजट 6.76 करोड़ खर्च किया। इसके लिए सक्षम अधिकारी से अनुमति नहीं ली। नियम विरुद्ध खर्च राशि का अभी तक पुनर्भरण नहीं किया गया। ऑडिट टीम ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताया है। इसमें निर्बध राशि योजना, संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना, जसाई एससी छात्रावास, बत्तीस जिला बत्तीस काम, राष्ट्रीय मातृत्व लाभ योजना, बंधक श्रमिक योजना, विकलांग कल्याण कोष आदि शामिल है।
ऑडिट रिपोर्ट; ऐसे समझें जिला परिषद के अफसरों की गंभीर लापरवाही
- 2000-2002: विभिन्न योजनाओं की राशियों का बैंक में एफडीआर के रूप में निवेश कर निजी आय का अनाधिकृत अर्जन एवं उपयोग ब्याज सहित पीडी खाते से अर्जित ब्याज का निजी आय में उपयोग कर 90.30 लाख रुपए की गंभीर अनियमिता बरती गई।
- 2003-2004: राष्ट्रीय उन्नत चूल्हा कार्यक्रम के अंतर्गत लाभार्थियों से लागत का 50% वसूली का अभाव राशि 2.29 लाख एवं अन्य अनियमितताएं।
- 2004-2005: ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्रीय अंश प्राप्त राशि में से अनियमित रूप से पी.डी. खाते में हस्तातंरण करना राशि 125 लाख रुपए बचत खाते में नहीं रखने से ब्याज राशि 12.62 लाख रुपए का नुकसान। राज्यांश प्राप्त राशि 118 लाख रुपए को योजना खाते में न रखकर पीडी खाते में रखा।
- 2007-2008: मिड-डे मील कार्यक्रम में वर्ष 2005-06 से वर्ष 2007-08 तक खाद्यान्न के उठाव एवं वितरण में अंतर के कारण सहकारी समिति को अदेय देना राशि 93.17 लाख रुपए की अनियमितताएं।
- 2008-09: विभिन्न योजनाओं के 62.13 लाख रुपए निजी निक्षेप मानकर पीडी खाते में अनियमित जमा रखकर अवरुद्ध रखना एवं निजी निक्षेप पर अर्जित ब्याज राशि रुपए 30.99 लाख को निजी आय मानकर उपयोग किया।
- 2009-11: बारहवां व तेरहवां वित्त आयोग की राशि को बैंक खाते के स्थान पर पीडी खाता में रखने के कारण ब्याज की हानि 4.51 लाख रुपए। दीनदयाल उपाध्याय आदर्श ग्राम योजना के तहत स्वीकृत 10.89 लाख रुपए के निर्माण कार्य नहीं करवाए।
- 2011-12: स्वजल धारा योजना व एनएसपी की राशि 21 करोड़ रुपए का उपयोग नहीं किया गया। इसकी ब्याज राशि 1.19 करोड़़ रुपए का रोकड़ बही में इंद्राज नहीं किया गया।
- 2012-13: बीआरजीएफ योजना में क्षमता निर्माण मद में दुग्ध डेयरी बाड़मेर को नियम विरुद्ध 73 लाख रुपए का बजट आवंटित। निर्माण के बाद असिमित समायोजन के 52 प्रकरणों की राशि 19 लाख रुपए में गड़बड़ी।
- 2013-14: संर्पूण स्वच्छता अभियान से राशि 67 लाख रुपए पीडी खाते में 8 साल तक प्रत्यावर्तन किए जाने से 30 लाख रुपए ब्याज का नुकसान हुआ। स्कूलों में शौचालय निर्माण के लिए सर्व शिक्षा अभियान से जारी राशि बैंक में जमा रखने से प्राप्त ब्याज राशि 6.11 लाख रुपए का वार्षिक लेखों में इंद्राज नहीं।
ऑडिट रिपोर्ट को गंभीरता से लिया जाएगा:कलेक्टर
^ऑडिट तीन स्तर की होती है और उसमें गड़बड़ी सामने आने पर टीम पैरा भी दर्ज करती है। विभाग स्तर पर उसका निस्तारण करना जरूरी है। वित्तीय अनियमितता या गबन का मामला है तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी से वसूली का प्रावधान है। हर साल रिपोर्ट के बाद पालना को लेकर रिव्यू कियाजाता है। जिला परिषद में अनियमितताओं से जुड़े प्रकरण में अगर कार्रवाई नहीं हुई तो जांच करवाएंगे। इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा।
-विश्राम मीणा, कलेक्टर
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