प्लगेरिज्म राेकने के लिए यूजीसी की ओर से साॅफ्टवेयर जरूरी करने के बाद पीएचडी थीसिस में साहित्य चाेरी पर लगाम लगनी शुरू हाे गई है। 10 फीसदी तक रेफरेंस मेटेरियल की छूट हाेने के बाद कई शाेधार्थियाें काे थीसिस में संशाेधन करना पड़ रहा है, लेकिन नई व्यवस्था से पहले पीएचडी थीसिस में साहित्य की चाेरी का प्रतिशत अच्छा खासा रहा है।
विशेषज्ञाें की माने ताे पहले सामाजिक विज्ञान संकाय में हाेने वाली पीएचडी में 65 से 70 फीसदी तक मेटेरियल इधर-उधर का हाेता था, इसे रेफरेंस के नाम पर उपयाेग किया जाता रहा है। रेफरेंस के नाम पर साहित्य की चाेरी पर यूजीसी की पहल के बाद अब लगाम लग रही है।
एमडीएस यूनिवर्सिटी में वर्तमान में 615 शाेधार्थी रजिस्टर्ड हैं। इनमें से महज 80 शाेधार्थियाें की ही थीसिस उर्कुंड साॅफ्टवेयर पर जांच में रेफरेंस में पास हुई, जबकि कई की थीसिस में दस फीसदी से ज्यादा साहित्य रेफरेंस के नाम पर उपयाेग किया था, जिसे संशाेधन के लिए लाैटाया गया है। कई शाेधार्थियाें ने नए नियम लागू हाेने के बाद अब तक थीसिस जांच के लिए जमा नहीं कराई है। अब संशाेधन के बाद ही इसे जमा कराएंगे।
यूजीसी : प्लगेरिज्म राेकने के लिए 10 फीसदी छूट के साथ साॅफ्टवेयर जरूरी
एमडीएस यूनिवर्सिटी और एसपीसीजीसीए में ज्यादातर सुपरवाइजर्स मानते हैं कि पहले पीएचडी में साहित्य चाेरी काे मापने का काेई आसान तरीका नहीं हाेने से दिक्कतें थी। शाेधार्थी जाे मेटेरियल जुटाता था, उसे सुपरवाइजर जांचता था, इसमें प्लगेरिज्म किस स्तर पर हुआ है, यह पूरी तरह सुपरवाइजर की याददाश्त के दम पर ही पता लगाया जा सकता था।
ऐसे में ज्यादातर मेटेरियल रेफरेंस के नाम पर काॅपी पेस्ट करने की संभावनाएं रहती थी। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर यूनिवर्सिटी के एक प्राेफेसर ने बताया कि रेफरेंस के नाम पर साहित्य चाेरी 70 फीसदी तक भी हाेता रहा है।
इस संकाय में अनुमानित इतनी साहित्य चाेरी
पीएचडी सुपरवाइजर्स के मुताबिक साेशल साइंस में यह आंकड़ा 65 से 70 फीसदी, साइंस में 40 से 45 फीसदी, काॅमर्स में 30 से 35 फीसदी और मैनेजमेंट में 35 से 40 फीसदी तक हाेता था। यूजीसी ने इसी प्लगेरिज्म काे राेकने के लिए 10 फीसदी तक छूट के साथ साॅफ्टवेयर जरूरी किया है।
बिना रेफरेंस ही चलता था काम, ज्यादतर मामलों में मैटर कॉपी
सुपरवाइजर डाॅ. एलके व्यास के मुताबिक ज्यादातर शाेधार्थी संदर्भ भी सही नहीं डालते थे। ऐसे में साहित्य चाेरी की आशंका ज्यादा रहती थी। पहले 40 से 50 फीसदी विद्यार्थी संदर्भ ही नहीं डालते थे। आखिरी पन्ने पर विब्लाेग्राफी (ग्रंथ सूची) रखते थे। सुपरवाइजर कई बार वक्त की कमी के कारण इस गंथ सूची काे अवाइड कर देते थे। जिससे रेफरेंस के नाम पर साहित्य चाेरी का ग्राफ बढ़ता रहा। लेकिन अब संबंधित चेप्टर के आगे ही रेफरेंस का जिक्र जरूरी कर दिया गया है।
इसलिए हाेती है साहित्य की चाेरी एमडीएसयू में उर्कुंड साॅफ्टवेयर पर थीसिस जांच के लिए बनी कमेटी के समन्वयक अश्विन तिवारी बताते हैं कि साहित्य की चाेरी करके जल्द से जल्द पीएचडी पूरी करने की हाेड रहती है। पीएचडी के लिए 5 साल का समय दिया जाता है। लेकिन जल्द कहीं नियुक्ति के लिए, प्रमाेशन के लिए, पब्लिकेशन में प्रसिद्ध हाेने के लिए एपीआई स्काेर बढ़ाने के लिए और समय की कमी, नाॅलेज की कमी और करियर एडवांसमेंट का लाभ लेने लिए शाेधार्थी इधर उधर का मैटर काॅपी करते रहे हैं।
आंकड़ाें में एमडीएसयू की पीएचडी
- वर्तमान में रजिस्टर्ड पीएचडी सुपरवाइजर : 233
- वर्तमान में रजिस्टर्ड शाेधार्थी : 615
- साॅफ्टवेयर पर अपलाेड थीसिस - 80 (सत्र 2019-20, 19 अगस्त 2020 तक)
- प्राेफेसर काे शाेधार्थी अलाॅट हाेते हैं : 10
- एसाेसिएट प्राेफेसर काे अलाॅट हाेते हैं : 8
- असिस्टेंट प्राेफेसर काे अलाॅट हाेते हैं : 6
- रिटायर सुपरवाइजर काे अलाॅट हाेते हैं : 3
- एमडीएसयू में पीएचडी शुरू हुई - 1990 से।
- अब तक कुल पीएचडी अवार्ड हुई : 2053
एमडीएसयू में पिछले 6 सत्राें की यह है स्थिति
सत्र 2014-15 में 64 पीएचडी अवार्ड।
सत्र 2015-16 में 42 पीएचडी अवार्ड।
सत्र 2016-17 में 18 पीएचडी अवार्ड।
सत्र 2018- 19 में 18 पीएचडी अवार्ड।
सत्र 2019-20 में 04 पीएचडी अब तक अवार्ड हाे चुकी है
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