सूरतगढ़ थर्मल में 660 मेगावाट की सातवीं क्रिटिकल इकाई शुरू, अब हर रोज यहां तैयार होगी 158.4 लाख यूनिट बिजली
राजस्थान उत्पादन निगम ने थर्मल की सुपर क्रिटिकल 660 मेगावाट की 7 नंबर इकाई से मंगलवार से बिजली का व्यवसायिक उत्पादन शुरू किया है। ऐसे में थर्मल परियोजना में 2160 मेगावाट बिजली उत्पादन करने की क्षमता हो गई है। यही कारण है कि सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर संयंत्र को राजस्थान का आधुनिक तीर्थ स्थल के उपनाम से भी जाना जाता है।
परियोजना से पूर्व में 250-250 मेगावाट की 6 इकाइयों से 1500 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा था। ऐसे में प्रदेश के बिजली उत्पादन के क्षेत्र में 660 मेगावाट बिजली की वृद्धि हो गई है। इससे प्रदेश को बिजली के क्षेत्र में न केवल करोड़ों रुपए का लाभ मिलेगा, बल्कि आमजन को भी राहत मिलेगी। गौरतलब है कि भेल कंपनी ने सोमवार रात 12 बजे से 7 नंबर इकाई को व्यवसायिक उत्पादन के लिए विद्युत उत्पादन निगम को सौंप दिया था। इकाई से वर्तमान में फुल लोड पर बिजली का उत्पादन हो रहा है।
दिसंबर 19 में हुआ था सातवीं इकाई का ट्रायल, अब एक साल बाद फुल लोड पर व्यावसाियक उत्पादन शुरू
परियोजना के अतिरिक्त मुख्य अभियंता केसर सिंह ने बताया कि परियोजना की 7 व 8 नंबर क्रिटिकल इकाई की लागत करीब 9160 करोड़ आएगी। यह लागत 8 नंबर इकाई के शुरू होने तक बढ़ भी सकती है। जानकारी के अनुसार परियोजना की 7 व 8 नंबर क्रिटिकल इकाई निर्माण लागत रिवाइज करने के बाद 11 हजार करोड़ प्रदेश की सरकार की ओर से स्वीकृत हुए थे। वहीं, इस राशि में सीएसआर फंड से क्वार्टरों का निर्माण व पार्क सहित अन्य कार्याें पर राशि खर्च की जाएगी। ऐसे में अब सूरतगढ़ थर्मल पावर स्टेशन कोयले से बिजली उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश का पहला पावर स्टेशन बन गया है। यहां से प्रदेश को सर्वाधिक बिजली प्राप्त होगी। उल्लेखनीय है कि परियोजना की 660-660 मेगावाट की 7 व 8 नंबर क्रिटिकल इकाइयों को कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शिलान्यास किया था।
भास्कर नॉलेज... रोज होगी 7 हजार टन कोयले की खपत, अप्रैल 2021 में शुरू होगी 660 मेगावाट की 8वीं इकाई
परियोजना के अतिरिक्त मुख्य अभियंता केसर सिंह ने बताया कि परियोजना की 660 मेगावाट की 7 नंबर इकाई से प्रतिदिन 158.4 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। साथ ही करीब 300 टन प्रतिघंटा के हिसाब से प्रतिदिन साढ़े 7 हजार टन कोयले की खपत होगी। उल्लेखनीय है कि 660 मेगावाट की 7वीं सुपर क्रिटिकल इकाई से परीक्षण के तौर पर 18 दिसंबर 2019 को सिंक्रोनाइज कर 210 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया गया था।
वहीं अब व्यवसायिक उत्पादन शुरू होने के बाद इकाई से फुल लोड पर बिजली का उत्पादन किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार 7 व 8 नंबर क्रिटिकल इकाई का निर्माण वर्ष 2014 में शुरू हुआ था। वहीं, इकाइयों से वर्ष 2016 सितंबर माह में बिजली का उत्पादन शुरू होना प्रस्तावित था। लेकिन कंपनी ने विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए वर्ष 2019 में सिंक्रोनाइज कर 210 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया गया था।
करीब 1 साल बाद कंपनी ने इकाई को व्यवसायिक उत्पादन के लिए सौंपा है। थर्मल अधिकारियों के मुताबिक दोनों इकाइयों की लागत करीब 9160 करोड़ रुपए आएगी। वहीं, 8 नंबर इकाई के अप्रैल 2021 में व्यवसायिक तौर पर बिजली का उत्पादन होने की संभावना है।
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