स्कूलाें में विद्यार्थियाें काे आलस त्यागकर अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाले शिक्षक खुद ही समय पर अपने स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं। यह स्थिति पूरे प्रदेश की बनी हुई है।
हालांकि एक राहत की बात है कि बांसवाड़ा जिले ने इस बार इस मामले में साख बचाई है। जाे ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने वाले टाॅप 5 जिलाें में शामिल है। और अच्छी बात यह है कि टाॅप टेन जिलाें में उदयपुर संभाग के तीन जिले शामिल हैं।
चित्ताैड़गढ़ 1 पहले, बांसवाड़ा चाैथे और डूंगरपुर जिला 10वें स्थान पर काबिज है। बाकि दूसरे जिलाें में शिक्षकाें का प्रदर्शन काफी कमजाेर ही रहा है। ऐसे में अब माध्यमिक शिक्षा निदेशक साैरभ स्वामी ने संबंधित जिला अधिकारियाें काे नाेटिस देने की कार्यवाही शुरू कर दी है। शिक्षकाें काे भी नाेटिस दिए जाएंगे। ऐसे में अब विभाग के शिक्षकाें में खलबली मची हुई है।
विद्यार्थियाें काे हाे रहा नुकसान: शाला दर्पण पर ऑनलाइन हाजरी दर्ज कराने के पीछे विभाग और सरकार की मंशा यह है कि शिक्षक समय पर स्कूल आए और विद्यार्थियाें काे उनके अनुभव का लाभ दें। लेकिन हालात यह है कि शिक्षक सरकार के इस फरमान काे नजरअंदाज भी कर रहे हैं।
यही कारण है कि निदेशालय से कम उपस्थिति वाले 5 जिलाें के अधिकारियाें काे ताे नाेटिस भी जारी किए जा चुके हैं। जिसमें सीडीईओ धाैलपुर, जैसलमेर, कराैली, जाेधपुर, सिराेही के अधिकारी शामिल हैं। गौरलब है कि छह माह पहले जिले में शिक्षा विभाग के इंतजाम लचर थे। परीक्षा परिणाम और जिला स्तर पर विभाग काे अपडेट रखने में भी बांसवाड़ा प्रदेश के तमाम जिलाें में सबसे पीछे था।
इसको लेकर राजस्थान कौंसिल ऑफ स्कूल एजुकेशन की ओर से रैंकिंग जारी की थी। जिसमें राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने भी सभी मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियाें काे अपने-अपने जिलाें की परफाॅर्मेंस सुधारने के निर्देश दिए थे। प्रदेश की इस रैंकिंग में बांसवाड़ा नीचे से तीसरे यानी 31वें पायदान पर था। वहीं डूंगरपुर 18, उदयपुर 28 और प्रतापगढ़ 33वें स्थानपर था।
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