5.64 कराेड़ से बना एमसीएच भवन; अभी यहां चल रहा कोविड वार्ड, हर माह औसत 450 प्रसव, नतीजा- बरामदे में लगे हैं बेड

जिला अस्पताल में 5.64 करोड़ रुपए खर्च 40 हजार वर्ग फीट एरिया में नया एमसीएच भवन बनाए जाने के बाद भी महिला व शिशु रोग विभाग में सुविधाओं का इजाफा नहीं हो सका। इसकी मुख्य वजह नए एमसीएच भवन में कोरोना डेडिकेटेड अस्पताल बनाना है। यह भवन जिस उद्देश्य से बनाया था, उसके मुताबिक उपयाेग नहीं होने की वजह से महिला एवं शिशु रोग विभाग में मरीजों काे अब भी पुरानी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। कोरोना महामारी के खत्म होने या फिर कोरोना डेडिकेटेड अस्पताल अन्यत्र शिफ्ट होने की सूरत में ही नए एमसीएच भवन का उपयोग हो सकता है। फिलहाल हालात ये हैं कि महिला वार्ड में 50 बेड की क्षमता के विपरीत 117 बेड लगाने पड़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में महिला बरामदे में भी प्रसूताओं के लिए वेटिंग एरिया बनाते हुए बैड लगाना मजबूरी बन चुका है।


अस्पताल में महिला वार्ड व शिशु रोग वार्ड में रोगियों की संख्या बढ़ने की वजह से दो साल पूर्व एमसीएच का विस्तार करने की जरूरत महसूस की गई थी। राज्य सरकार से नेशनल हेल्थ मिशन के तहत नया एमसीएच भवन बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था। इसके लिए वर्तमान एमसीएच के पास नया एमसीएच भवन और स्टाफ क्वार्टर बनाने के लिए 7.41 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए थे। इसमें से 5.64 करोड़ रुपए से 51 हजार वर्ग फुट में नया एमसीएच भवन तैयार किया गया। इसमें एक साइड में 40 हजार वर्ग फुट में दो मंजिला नया एमसीएच भवन बनाया गया है।

पुराने एमसीएच भवन की पहली मंजिल पर 11 हजार वर्ग फुट में निर्माण किया गया। नया एमसीएच भवन मार्च में तैयार हुआ था। इसी दौरान मार्च में कोरोना का संक्रमण शुरू हो गया। पहले जिला अस्पताल के पुराने भवन में कोरोना वार्ड बनाया गया। तब सामान्य ओपीडी व आईपीडी नए एमसीएच भवन में शिफ्ट करनी पड़ी। फिर सामान्य व्यवस्थाएं पुराने भवन में शिफ्ट करते हुए नए एमसीएच काे कोरोना डेडिकेटेड अस्पताल बना दिया गया।

नए एमसीएच भवन की क्षमता 100 बेड है, शिशु नर्सरी भी 24 बेड की

एमसीएच की क्षमता 50 बेड से बढ़ाकर 100 बेड करना प्रस्तावित है। इससे शिशु रोग विभाग की नर्सरी (एसएनसीयू) की क्षमता भी 12 बेड से बढ़कर 24 बेड हाे जाएगी। वर्तमान में एमसीएच में महीने में 300 सामान्य और 150 सिजेरियन सहित औसतन 450 प्रसव होते हैं। भर्ती महिलाओं की संख्या 80 से 100 के बीच रहती है। नर्सरी में बीमार नवजात बच्चों को रखने के लिए 12 रेडिएंट वार्मर हैं जबकि भर्ती बच्चों की संख्या 20 से 22 रहती है। ऐसी स्थिति में संक्रमण का फैलाव रोकने के लिए दो रेडिएंट वार्मर के बीच पर्याप्त दूरी रख पाना ताे दूर एक रेडिएंट वार्मर में दो-दो बच्चों को भी रखना पड़ता है। नए एमसीएच भवन में 24 बेड की नर्सरी होगी। वहां 150 बेड की क्षमता होगी।


कोरिडोर बना रहे मजदूरों व ठेकेदार को कोरोना, काम की रफ्तार धीमी पड़ी : नए एमसीएच भवन और वर्तमान एमसीएच भवन को पहली मंजिल से जोड़ने क लिए 36 लाख रुपए से कोरिडोर बन रहा है। इस काेरिडोर की लंबाई 16 मीटर व चौड़ाई 4 मीटर है। इसका काम दो महीने में पूरा करना था। कोरोना डेडिकेटेड अस्पताल के समीप काम करने के दौरान तीन मजदूर व एक ठेकेदार कोरोना पॉजिटिव हो गए। इससे काम की रफ्तार एक बार धीमी पड़ गई है। पहले नए एमसीएच भवन के उपरी हिस्से को महिला एवं शिशु रोग विभाग के लिए काम में लेने पर विचार किया जा रहा था। लेकिन अब मजदूरों के संक्रमित होने की घटना के बाद ऐसा करने की संभावना भी खत्म हो गई है। कोरिडोर बनाने का काम अंतिम चरण में है।

नए एमसीएच भवन का उपयोग कोरोना मरीजों को भर्ती करने के लिए हो रहा है। ऐसी स्थिति में भवन खाली होेने पर संक्रमण रहित करने क बाद ही किसी अन्य काम के लिए उपयोग में लिया जा सकता है। हालातों को देखते हुए कोरोना महामारी खत्म होने या फिर कोरोना डेडिकेटेड अस्पताल किसी अन्य जगह शिफ्ट होने पर भी नए एमसीएच में महिला व शिशु रोग वार्ड शिफ्ट किया जा सकता है।
-डॉ. केएस कामरा, पीएमओ, जिला अस्पताल, श्रीगंगानगर।



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MCH building made of 5.64 crores; Kovid ward is running here now, average 450 deliveries every month, result - beds are in the verandah


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