शिक्षकों की कमी के चलते जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय की हालात दिनोदिन खराब होती जा रही है। संभागीय विश्वविद्यालय बनने के बाद भी यहां पर शिक्षकों का टोटा है। कहने को तो यह सबसे बड़ा और पुराना विश्वविद्यालय है, लेकिन यहां कुछ विभाग ऐसे भी हैं, जिनमें महज दो-तीन ही शिक्षक हैं। विवि में शिक्षकों के आधे से ज्यादा पद रिक्त पड़े हैं। हालांकि विवि प्रशासन नई भर्ती करना चाह रहा है, लेकिन राज्य सरकार से अनुमति नहीं मिल रही। एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थिति तो और भी बदतर है।
जेएनवीयू में इंजीनियरिंग, कॉमर्स, आर्ट्स, साइंस और लॉ मिलाकर पांच फैकल्टी है। इनमें शिक्षकों के कुल 500 से अधिक पद हैं, लेकिन वर्तमान में करीब 325 शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं। शिक्षकों की कमी के कारण शोध कार्य और नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सबसे अहम यह है कि कुछ विभागों में तो शिक्षकों की अच्छी-खासी संख्या है, लेकिन कुछ ऐसे विभाग हैं, जहां शिक्षकों की गिनती शुरू होते ही खत्म हो जाती है।
कमेटी 80 प्रतिशत काम कर चुकी, सरकार को भेजेंगे प्रस्ताव
- विवि में शिक्षकों के पद बहुत ज्यादा खाली हैं, ये सारे पद स्वीकृत हैं। इसके लिए एक कमेटी पूर्व में बना दी थी, जिसने अपना 80 प्रतिशत काम पूरा कर लिया है। शीघ्र ही पद भरने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजेंगे। - प्रो. पीसी त्रिवेदी, कुलपति, जेएनवीयू
इंजीनियरिंग व साइंस तक की हालात खस्ता, पत्रकारिता में शिक्षक ही नहीं
कहने को तो इंजीनियरिंग को तकनीकी शिक्षा से जोड़ा जाता है, लेकिन जेएनवीयू में इंजीनियरिंग फैकल्टी की हालात भी अन्य फैकल्टी के समान है। यहां 10 ब्रांचों में से एक ही ऐसा विभाग है, जहां पर शिक्षकों की संख्या दहाई में है। केमिकल में 3, माइनिंग में दो, इलेक्ट्रिकल व स्ट्रक्चर में पांच-पांच तो पी एंड आई व इलेक्ट्रॉनिक्स में 6-6 शिक्षक ही हैं।
विज्ञान संकाय में तो भू-गर्भ विज्ञान विभाग में केवल दो शिक्षक ही कार्यरत हैं। गणित में 8 शिक्षक ही कार्यरत हैं। वहीं आर्ट्स में विभाग ज्यादा हैं, लेकिन शिक्षकों का अनुपात बहुत भिन्न है। लोक प्रशासन में एक, दर्शन शास्त्र विभाग में एक, राजस्थानी में 3, संस्कृत में 3, संगीत में 3, फिजिकल एजुकेशन में 2, मनोविज्ञान में 4 शिक्षक कार्यरत हैं। पत्रकारिता में शिक्षक ही नहीं है, हिंदी के शिक्षक को जिम्मा दिया हुआ है। कॉमर्स में एकाउंटिंग में 4, मैनेजमेंट में 6 और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में 7 शिक्षक हैं। इधर, लॉ फैकल्टी में केवल 9 शिक्षक कार्यरत हैं।
शिक्षक लगाने की बजाय कोर्स ही बंद कर दिया
साइंस फैकल्टी में नए सत्र से गृह विज्ञान पाठ्यक्रम बंद कर दिया गया। कारण कि इसे पढ़ाने के लिए टीचर्स ही नहीं हैं। नए शिक्षकों को लगाने की बजाय कोर्स को ही बंद करना बेहतर समझा गया। इसे पीजी स्तर पर बंद कर दिया गया है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
टिप्पणियाँ