(महेश शर्मा). नेशनल पार्क और टाइगर-पेंथर रिजर्व में शिकार की घटनाओं पर रोकथाम के नाम पर खर्च किए गए 50 करोड़ के प्रोजेक्ट में संबंधित फर्म के आगे अफसर असहाय बने हुए हैं। रणथंभौर-सरिस्का जैसी जगह पर ये वाइल्ड लाइफ सर्विलेंस एंड एंटी पोचिंग
सिस्टम के टावर 5-6 महीने से खराब पड़े हैं।
वन विभाग के अफसर फर्म को चिल्ला-चिल्ला कर थक गए, लेकिन इस ओर सुनवाई नहीं हो रही। दोनों के फील्ड डायरेक्टर टीसी वर्मा और आरएन मीणा के मुताबिक पहले से कम चल रहे स्टाफ के चलते इससे और परेशानी बढ़ गई है। इसके बावजूद संबंधित फर्म पर क्या कार्रवाई की गई, इस पर डीओआईटी के जिम्मेदार चुप्पी साधे हैं।
उधर मुकंदरा में टाइगर लगातार हताहत हो गए, रणथंभौर में आए दिन शिकार-अवैध माइनिंग की घटनाएं होती रही, इसके बावजूद इन टावरों का थर्मल पावर बेकार साबित हुआ। संबंधित वन अफसरों के मुताबिक ये प्रोजेक्ट टाइगर मॉनिटरिंग में फेल है। केवल मवेशियों के झुंड ट्रैस कर पाता है, कोई भी पोचर आसानी से कैमरे के भेदकर भीतर आ सकता है।
दबी जुबान से कई अफसरों ने पूरे प्रोजेक्ट को नाकारा बताकर इस पर हुए खर्च को राजस्व का दुरुपयोग बताया है। उधर मौजूदा हालात पर जांच-पड़ताल करा उपयोग सुनिश्चित कराने के बजाय अब 15 करोड़ रुपए और खर्च किए जा रहे हैं। मतलब साफ है जैसे-तैसे फर्मों के जरिए बुकिंग कराई जाए, भले ही इसका फायदा राज्य हित में हो या नहीं।
रात में ही होती हैं शिकार की घटनाएं, उसी दौरान सेंटर बंद
किसी भी जंगल में वन्यजीवों के साथ क्राइम की घटनाएं रात में ही होती है। लेकिन कंपनी के प्रतिनिधि हर जंगल के सेंटर पर ताला जड़ निकल जाते हैं। वन विभाग भी मौन। क्या यही इस प्रोजेक्ट का मकसद था? इस सवाल पर जिम्मेदार चुप हैं।
एक जंगल को कवर नहीं किया, हर जगह बुकिंग
50 करोड़ खर्च करने के दौरान ही बुकिंग बढ़ाने के खेल शुरू हो गए थे। इसके चलते किसी एक जंगल की पैरीफेरी को पूरी तरह कवर करने के बजाए हर जगह थोड़े-थोड़े कैमरे लगा दिए, ताकि काम मिलता रहे। अब 15 करोड़ से फिर वही किया जा रहा है। इस बजट से सरिस्का में 14, रणथंभौर मुकंदरा और जैसलमेर में 4-4 टावर लगाए जाएंगे। जिसके वर्कऑर्डर किए जा चुके।
सीएमओ को तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजी, हकीकत कुछ और
डीओआईटी में प्रोजेक्ट इंचार्ज सोनिया चतुर्वेदी के मुताबिक मामले पर सीएमओ को रिपोर्ट भेजी गई है। हालांकि इसकी हकीकत कुछ और ही है कि डीओआईटी ने केवल पुरानी रिपोर्ट को कॉपी-पेस्ट करके भेजा है। प्रोजेक्ट क्यों फेल हुआ पड़ा है और इसमें किसकी लापरवाही हो रही है, इस पर फिलहाल कोई जिम्मेदारी तय नहीं है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
टिप्पणियाँ