रेतीले धोरों पर मस्ती, कैंप फायर, कैमल सफारी और पारंपरिक संगीत का आनंद। पश्चिमी राजस्थान में जैसलमेर के बाद अब बीकानेर के धोरे सैलानियों को भाने लगे हैं। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों की मेहनत ने अब रायसर के धोरों को देसी-विदेशी पर्यटकों की पसंदीदा डेस्टिनी बना दी है। प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से 60 हजार लोगों को रोजगार दे रहे इस व्यवसाय में रायसर के धोरे काफी अहम हैं।
60 करोड़ से अधिक का सालाना कारोबार करने वाला पर्यटन उद्योग नए साल पर नई उम्मीद के साथ पावणों के स्वागत में खड़ा है। बीकानेर शहर से रायसर करीब 10 किलोमीटर दूर है। यहां पांच किमी में 7 कैंप बने हैं। इनमें देसी थीम पर हाईटेक झोपड़ियां, देसी खान-पान, कैमल व जीप सफारी, राजस्थानी गीत-संगीत तक के इंतजाम हैं। पहले यहां पर्यटक केवल हैरिटेज साइट देखने के लिए रुकते थे। नाइट स्टे कम था। जब से रायसर के धोरों में कैंप लगने शुरू हुए हैं, विदेशी सैलानियों के साथ ही देसी मेहमान भी शनिवार व रविवार की रात गुजारने लगे हैं। अब यह सिलसिला बढ़ता जा रहा है।
जनवरी में ऊंट उत्सव में आते हैं सर्वाधिक सैलानी
बीकानेर में अक्टूबर से फरवरी पर्यटन के लिए खास है। जनवरी में ऊंट उत्सव के कारण सर्वाधिक पर्यटक आते हैं। इस बार जनवरी के दूसरे सप्ताह में ऊंट उत्सव होने के आसार कम हैं। ऐसे में रायसर के धोरों और हैरिटेज साइट के दम पर पर्यटन व्यवसायी सैलानियों को लुभाने की तैयारी में हैं।
ये है खासियत
नाइट कैंप फायर, ग्रामीण परिवेश में रहना-खाना, कैमल सफारी और सनसेट पाॅइंट का लुत्फ उठा रहे पावणे। इस इलाके को जैसलमेर की तर्ज पर विकसित किया जा सकता है।
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