5 साल में मुंबई को पीछे छोड़कर नंबर-1 बनेंगे हम, सांचौर में 1 ब्लॉक में देश का 23% क्रूड ऑयल, 10 ब्लॉक और खुलेंगे
(भंवर जांगिड़). थार के रेगिस्तान में आसमान से आग बरसती है, अब तो धोरों के गर्भ भी आग उगलने लगे हैं। बाड़मेर में सिणधरी के पास कोशलू गांव में जलदाय विभाग के बरसों से बंद पड़े ट्यूबवेल से आग की लपटें निकल रही है। पानी का यह कुआं भले ही सूख गया है, लेकिन जमीन से प्राकृतिक गैस खूब निकल रही है। इस किस्से से पूरे देश को समझ जाना चाहिए कि पेट्रोलियम मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान ने जनवरी-18 में बाड़मेर में रिफाइनरी के शिलान्यास समारोह में क्यों कहा था कि पश्चिमी राजस्थान देश का एनर्जी बेल्ट बन गया है।
अब इसे दूसरी बात से भी समझ लो कि अभी तो बाड़मेर-सांचौर बेसिन के सिर्फ 1 ब्लॉक में वेदांता ने तेल उत्पादन किया है वह भी देश के कुल कच्चे तेल उत्पादन का 23% है। इस कंपनी को अगले 5 साल में 10 नए ब्लॉक से भी तेल उत्पादन करना बाकी है, इसलिए भले ही हम अभी बॉम्बे हाई के बाद दूसरे नंबर है, लेकिन जब नए ब्लॉक तेल की धाराएं बहाएंगे तो बॉम्बे हाई को दूसरे नंबर पर धकेल देंगे।
बाड़मेर-सांचौर बेसिन से अभी 1.60 लाख बैरल तेल प्रतिदिन उत्पादित हो रहा है और बॉम्बे हाई का उत्पादन 2.30 लाख बैरल के करीब है। वेदांता के कार्पोरेट कम्युनिकेशन जीएम अयोध्याप्रसाद गौड़ का कहना है कि अगले पांच साल में ईओआर तकनीक से मौजूदा कुओं से ज्यादा तेल निकालने, नए ब्लॉक में 3डी सर्वेक्षण और कुओं की खुदाई का काम करने का लक्ष्य लेकर बढ़ रहे हैं।
एक के बाद एक आई चार बाधाएं, इच्छाशक्ति के आगे सब हारी
पहली बाधा : 1968 से थार में ओएनजीसी, ऑयल इंडिया के अलावा शैल कंपनी ने भी यह संकेत दिए थे कि जमीन में पेट्रोलियम का बड़ा भंडार मिलने की उम्मीद नहीं है। केयर्न एनर्जी ने उच्च घनत्व-त्रिआयामी सर्वेक्षण कर जमीन में सात किमी गहराई का चित्रण निकाला। बाड़मेर में दो किमी अंदर ड्रिल कर मंगला जैसे विशाल भंडार को खोज निकाला।
दूसरी बाधा: थार के जैव समृद्ध रेगिस्तान में न्यूनतम पर्यावरण प्रभाव के साथ काम करने की चुनौती थी। केयर्न ने क्षेत्र में पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से वैलपैड तकनीक को देश में पहली बार काम में लिया। इस मल्टी वैलपैड ड्रिलिंग से भूमि के एकल और छोटे टुकड़े में कई बोरवेल को ड्रिल किया जाता है।
तीसरी बाधा: खोजे गए तेल भंडार की प्रकृति को लेकर थी। क्योंकि किसी भी क्रूड ऑयल में उपस्थित सल्फर की मात्रा के आधार पर उसकी गुणवत्ता तय होती है। इसे सल्फर की कम मात्रा वाला ‘स्वीट क्रूड’ माना गया, लेकिन यहां मोम की अधिक मात्रा विलेन साबित हुई। देश की जानी-मानी रिफाइनरियों ने यह कह कर हाथ खींच लिए कि तेल में मोम अधिक है।
चौथी बाधा: जब बाड़मेर से पाइपलाइन बिछाने की बात आई तो यह बड़ी चिंता की वजह बन गई कि 65 डिग्री से कम तापमान होते ही तेल पाइपलाइन में जमने लगेगा। निराकरण के लिए अमेरिका के ह्युस्टन शहर की लेबोरेट्रीज में बाड़मेर जैसे वातावरण के बीच परीक्षण किए गए। सतत गर्म रखे जाने वाली इंसुलेटेड पाइपलाइन के रूप में समाधान सामने आया।
सफर; 2001 में सरस्वती तेल से हुई थी सफर की शुरुआत
सबसे पहले शैल ने 2001 में सरस्वती तेल क्षेत्र की खोज गुड़ा मालानी क्षेत्र में की लेकिन उस खोज को इतना छोटा माना गया कि शैल ने निराशा में अपने हाथ खींच इस ब्लॉक को सरेंडर करने का फैसला कर लिया। उस समय केयर्न एनर्जी से जुड़े भू-वैज्ञानिक माइक वाट्स ने बिल गेमेल को यह जुआ खेलने की सलाह दी और 2002 में केयर्न ने परियोजना का 100% नियंत्रण हासिल कर लिया। इसके आगे की कहानी भी ट्विस्ट और टर्न से भरपूर थी।
केयर्न एनर्जी ने अपने शुरुआती प्रयासों में असफलता का सामना किया और बाड़मेर में अपना 16वां कुआं खोदने के बाद जब वो भी निराश होकर मैदान छोड़ने की तैयारी में थी तब 2004 में विशाल तेल भंडार मंगला की खोज हुई। यह 30 वर्षों के लिए भारत में सबसे बड़ी खोज थी। आज, जब राजस्थान भारत की कच्चे तेल की आवश्यकताओं जरूरत में 23% से अधिक का योगदान प्रदान करता है, हम उन बाधाओं पर एक नजर डालेंगे, जिन्हें पार करने के लिए इनोवेशन और नई तकनीक के साथ जिद ने मंजिल दिलवाई।
मंजिल; 11 साल में 350 कुएं खोदे, 200 और खोदे जाएंगे
पिछले 11 साल राजस्थान और बाड़मेर दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहे हैं। बाड़मेर में 29 अगस्त 2009 को मंगला तेल क्षेत्र से उत्पादन शुरू हुआ था। तत्कालीन प्रधानमंत्री डाॅ. मनमोहन सिंह ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व केयर्न एनर्जी के संस्थापक सर बिल गेमेल की उपस्थिति में वॉल्व घुमाकर उत्पादन की प्रतीकात्मक शुरुआत करते हुए प्रदेश की अर्थव्यवस्था की कृषि धुरी को तेल की तरफ शिफ्ट करने का सफर शुरू कर दिया। सिर्फ यही कंपनी बाड़मेर ब्लॉक की 38 डिस्कवरी में 350 से ज्यादा तेल कुएं खोद चुकी है और अगले कुछ सालों में 200 कुएं खोदने का काम पाइप लाइन में चल रहा है।
ऑयल-गैस क्षेत्रों की नीलामी में राजस्थान के 10 ब्लॉक
वेदान्ता-केयर्न ने नई ओपन एंकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (ओएएलपी) के तहत ऑयल व गैस एरिया की पहली नीलामी में प्रस्तावित सभी 55 क्षेत्रों के लिए बोली लगाई। इनमें राजस्थान के 10 और ब्लॉक में अन्वेषण अधिकार हासिल किए। इनमें से 7 ब्लॉक बाड़मेर में और 3 जैसलमेर में हैं।
बदल गई तस्वीर
थार में सदियों से कृषि, पशुपालन, जीविका अथवा आय के नगण्य और बहुत कम साधन के साथ अकाल की मार थी, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। 11 साल में करीब 60 हजार करोड़ रुपए के निवेश के साथ मरुधरा की तस्वीर और तकदीर बदल रही है। एक ओर आर्थिक विकास के नए द्वार खुले हैं तो दूसरी ओर हजारों करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा की बचत हो रही है।
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