जिला परिषद ने ग्राम पंचायतों की खनिज रॉयल्टी राशि पर कुंडली मार रखी है। वर्ष 2016-17 तक जिले में विभिन्न खनिजों से रॉयल्टी के रूप में 47.84 लाख रुपए प्राप्त हुए। जिला परिषद ने उक्त राशि संबंधित ग्राम पंचायतों को हस्तातंरित ही नहीं की। इस मामले को लेकर कई बार बैठकों में जनप्रतिनिधियों ने मुद्दा उठाया। ऑडिट टीम ने आपत्ति जताते हुए राशि पंचायतों को हस्तांतरित करने के बात कही। बावजूद इसके जिला परिषद ने चार साल बाद भी राशि जारी नहीं की है।
गंभीर लापरवाही: बजट खर्च किया न सरकार को लौटाया, मनमर्जी से काम किए मंजूर
योजनाएं बंद होने के 5 साल बाद सरकार को नहीं लौटाए 5 करोड़
- राज्य सरकार द्वारा बार-बार आदेश जारी कर बंद पड़ी योजनाओं का 5 करोड़ 16 लाख रुपए का बजट लौटाने के निर्देश दिए गए, लेकिन अफसरों ने ध्यान ही नहीं दिया। राज्य वित्त आयोग द्वितीय, ग्यारवां वित्त आयोग समेत 21 योजनाएं शामिल है। ऑडिट रिपोर्ट में अफसरों की लापरवाही सामने आई है। प्रकरण प्रमुख शासन सचिव पंचायतीराज विभाग को कार्रवाई के लिए भेजा गया।
- 2014-15: विलेज मास्टर प्लान की कार्ययोजना में कमियां पाई गई। कार्य समय पर पूरे नहीं करवाने से 62 लाख रुपए खर्च नहीं हुए।
- 2015-16: विलेज मास्टर प्लान में निरस्त किए गए कार्यों की राशि 43.75 लाख रुपए को राजकोष में जमा नहीं करवाया। विभिन्न योजनाओं के तहत करवाए गए निर्माण कार्यों की निर्धारित मापदंड व गुणवत्ता सुनिश्चित किए बिना 40 लाख खर्च।
- 2016-17: बंद व मृत प्राय योजनाओं की अवशेष राशि 3.50 करोड़ राजकोष में जमा नहीं करवाए।
- 2017-18: सक्षम स्वीकृति व अनुमोदन के अभाव में 3.46 लाख रुपए के कार्यों की मंजूरी में अनियमितताएं।
शिक्षक भर्ती: 7 लाख रुपए का समायोजन नहीं
शिक्षक भर्ती 2012 के लिए अग्रिम राशि 4 लाख रुपए का समायोजन नहीं किया गया। शिक्षक भर्ती 2013 के लिए अग्रिम राशि 90 हजार रुपए समायोजित शेष है। जिला परिषद ने 7 लाख रुपए मय ब्याज का समायोजन नहीं।
बीआरजीएफ: केंद्र को 123 लाख नहीं लौटाए
जिले को वर्ष 2014-15 व 16 में विकास कार्यों के लिए बजट आवंटित किया गया। 123 लाख रुपए खर्च नहीं हुए। वर्ष 2018-19 के वार्षिक लेखों की जांच में पाया गया कि योजना की राशि 123 लाख रुपए पीडी खातों में अवशेष है।
रोकड़ पुस्तिका, पीडी पासबुक व बैंक लेखा में 975 लाख रुपए की गंभीर अनियमितताएं
कार्यालय अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी के लेखा अवधि 2018-19 के अभिलेखों की जांच में पाया गया कि 31 मार्च 2019 को संधारित पीडी खातों व रोकड़ पुस्तिका व कार्यालय द्वारा संधारित अन्य योजनाओं के बैंक खातों व रोकड़ पुस्तिका में 9 करोड़ 75 लाख रुपए का अंतर दर्शाया गया था। इसका कारण रोकड़ बही में दर्ज किया गया नहीं आहरण अधिकारी से सत्यापन करवाया गया।
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