हाईकोर्ट ने प्रताप नगर इलाके में तीन कॉमर्शियल भूखंडों की न्यूनतम आरक्षित दर से ज्यादा बोली लगाने के बाद भी बिना किसी कारण बोली की प्रक्रिया निरस्त करने पर राजस्थान हाउसिंग बोर्ड चेयरमैन व डिप्टी हाउसिंग बोर्ड कमिश्नर सहित अन्य से जवाब मांगा है। साथ ही हाउसिंग बोर्ड को पाबंद किया है कि वह कामर्शियल भूखंड संख्या 100/ एसपी-63, 100/एसपी 82 व 100/एसपी 89 की न तो नीलामी करे और न ही इन भूखंडों को किसी अन्य काे आवंटित करे।
जस्टिस एके गौड़ ने यह अंतरिम निर्देश विजय मामनानी व दो अन्य की याचिका पर दिया। अधिवक्ता विकास सोमानी ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड ने प्रताप नगर में तीन कॉमर्शियल भूखंडों की ई-नीलामी के जरिए बिक्री करने की सूचना जारी की और न्यूनतम आरक्षित मूल्य 65,500 रुपए रखा। जिस पर तीनों प्रार्थियों ने न्यूनतम आरक्षित कीमत से उच्च बोली 78,000 रुपए, 66,000 रुपए व 66,000 रुपए लगाई व सफल रहे।
लेकिन हाउसिंग बोर्ड ने 13 नवंबर 2020 को एक आदेश जारी कर बिना किसी कारण ही इन भूखंडों की नीलामी की बोली निरस्त कर दी। इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि हाउसिंग बोर्ड ने भूखंडों की बोली ई-ऑक्शन कमेटी की सिफारिशों के विपरीत जाकर निरस्त की है। जब एक बार भूखंडों की नीलामी की प्रक्रिया हो गई थी और प्रार्थियों ने इसकी उच्च बोली लगाई थी तो बिना किसी कारण नीलामी रद्द नहीं कर सकते।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
टिप्पणियाँ