प्रदेश के तीन रिजर्व में से पहली बार मुकंदरा रिजर्व के ईकाे-सेंसेटिव जाेन का फाइनल नाेटिफिकेशन घाेषित हुआ है। ऐसे में काेटा सहित बूंदी, झालावाड़, चित्ताैड़गढ़ रिजर्व एरिया के आसपास लंबे समय से रिजर्व के विकास से लेकर अन्य गतिविधियाें काे लेकर बना संशय अब दूर हाे चुका है। ईकाे-सेंसेटिव जाेन की गाइडलाइन के अनुसार 10 किमी की सीमा घटाकर 1 किमी करने के संबंध में फाइनल नाेटिफिकेशन जारी हुआ है।
माॅनिटरिंग कमेटी के चेयरमैन होंगे कोटा कलेक्टर
ईकाे- सेंसेटिव जाेन के नाेटिफिकेशन की निगरानी के लिए माॅनिटिरिंग कमेटी का गठन हाेगा। इसमें पदेन अध्यक्ष काेटा कलेक्टर हाेंगे। साथ ही सदस्य सचिव मुकंदरा रिजर्व के डीसीएफ हाेंगे। इनके अलावा प्रभागीय अधिकारी रामगंजमंडी, झालावाड़, बूंदी, रावतभाटा के सदस्य के अलावा चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन, राज्य सरकार की ओर से नाेमीनेट किए जाने वाले वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठन का प्रतिनिधि, राज्य सरकार द्वारा नाेमिनेट जैव विविधता के एक विशेषज्ञ, राज्य के प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से संबंधित एक विशेषज्ञ के अलावा प्रधान पंचायत समिति लाडपुरा, भैंसराेड़गढ़, झालरापाटन, तालेड़ा, खैराबाद के संबंधित क्षेत्र के लिए सदस्य हाेंगे।
जबकि पहले रिजर्व एरिया के करीब 10 किमी के दायरे में हाेटल, खनन से लेकर अन्य गतिविधियां बैन थी और इसके बाद भी लाेगाें में असमंजस की स्थिति और लाेगाें में अाक्राेश बना था। वहीं, दूसरी ओर विभाग काे ईकाे-सेंसेटिव जाेन के अधिकार मिलने से विभाग काे भी काफी राहत मिली, जबकि मुकंदरा में स्टाफ की कमी से लेकर रिजर्व एरिया में माॅनिटरिंग में भी परेशानी थी। अब इससे रिजर्व की चुनाैतियाें में राहत मिल सकेगी। पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अाेर से जारी फाइनल नाेटिफिकेशन के बाद काेटा, झालावाड़, बूंदी और चित्ताैड़गढ़ की मुकंदरा रिजर्व की सीमा के चाराें और शून्य से 1.0 किमी तक विस्तारित क्षेत्र काे ईकाे- सेंसेटिव जाेन घाेषित किया है। रिजर्व काेटा के लाडपुरा, सांगाेद, रामगंजमंडी तहसील के अलावा झालावाड़ में झालरापाटन तहसील के अलावा बूंदी के तालेड़ा तहसील और चित्ताैड़गढ़ के रावतभाटा तहसील में स्थित है।
विरासत संरक्षण की याेजना बनाई जाएगी
फाइनल नाेटिफिकेशन से रिजर्व में विरासत का भी संरक्षण हाेगा। नाेटिफिकेशन में इसका जिक्र है। इसमें रिजर्व की राॅक पेंटिंग्स, झरने, दर्रे, गुफाएं आदि माेेन्यूमेंट्स की पहचान की जाएगी। साथ ही उनकी सुरक्षा और कंजर्वेशन के लिए अांचलिक महायाेजना के हिस्से के रूप में एक विरासत संरक्षण याेजना बनाई जाएगी।
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