केंद्र सरकार ने आयुर्वेद शल्य चिकित्सा में 39 तरह की बीमारियों में दी ऑपरेशन करने की अनुमति

भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद की ओर से एमएस शल्य तंत्र आयुर्वेद के डिग्रीधारियों को 39 तरह के छोटे-बड़े ऑपरेशन करने की इजाजत दी गई है। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से गत 19 नवंबर को एक गजट नोटिफिकेशन भी निकाला गया। अब मरीज एलोपैथिक के साथ-साथ आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में भी ऑपरेशन करवा सकेगा।

हालांकि वर्तमान में हर्निया, गांठ, एपेंडिक्स, बवासीर सहित कुछ तरह के ऑपरेशन आयुर्वेद चिकित्सा में किए जा रहे हैं, पर अब 39 तरह की बीमारियों में ऑपरेशन की इजाजत मिलने से आयुर्वेद पर विश्वास के साथ आयुर्वेदिक डॉक्टर्स को नई संजीवनी मिलने की उम्मीद जगी है। दरअसल शल्य क्रिया स्नातक स्तर की साढ़े पांच वर्ष की डिग्री के बाद 3 वर्ष का स्नातकोत्तर एमएस कोर्स अधिकृत किया गया। सरकार की ओर से जारी गजट नोटिफिकेशन में एमएस शल्य तंत्र में डिग्रीधारी डॉक्टरों को 39 ऑपरेशन की अनुमति दी है।

इन 39 रोगों में मिली अनुमति

दुष्टनिजव्रणलेखन, छेदन, फोड़े का वेदन, त्वचा की ग्राफ्टिंग, सामान्य सिस्ट का उच्छेदन, सिरा-स्त्रायुकोथ का छेदन, सद्यो व्रण प्रबंधन, प्राणष्टशल्य निर्हरण, भग्न चिकित्सा, संघिमोक्ष, उदर रोग निदान चिकित्सा, अर्श-क्षारकर्म, परकर्तिकासत्रिरुद्ध गुदा, भंगदर छेदन, नाडीव्रणछेदन, गुदा-भ्रंण, अश्मरी, सूत्रग्रह, मूत्रग्रह, निरुद्ध प्रकश, वृद्धिरोग चिकित्सा आदि प्रमुख है।
इधर विरोध शुरू

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आई एम ए) जोधपुर चेप्टर ने मंगलवार को मेडिकल चौराहा, गांधी की प्रतिमा के समीप कोविड गाइडलाइन की पालना करते हुए हाल ही में सांकेतिक प्रदर्शन कर रोष जताया। आईएमए सदस्य डॉ. सिद्धार्थ राज लोढ़ा ने बताया कि हाल ही में आयुर्वेद डॉक्टरों को एक संक्षिप्त औपचारिक प्रशिक्षण के पश्चात सर्जरी की अनुमति दी है जो न केवल मात्र असंवैधानिक है, अपितु मानवीय दृष्टिकोण से भी अनुचित है। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. पीएम मेहता व रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. दीपक पारीक ने इस निर्णय को तुरंत वापस लेने का आह्वान किया।



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Central government allows operation in Ayurveda surgery in 39 types of diseases


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